शहजादी हत्याकांड: पत्नी को जिंदा जलाने वाले नदीम को मृत्युदंड

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टेलीग्राम संवाद

मुजफ्फरनगर। छह अप्रैल से अब तक नौ चर्चित मामलों में 22 दोषियों को फांसी की सजा सुनाने वाले न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने सोमवार को पत्नी को जिंदा जलाने के दोषी नदीम को भी मृत्युदंड सुनाया। इसके साथ ही उनकी अदालत से फांसी की सजा पाने वाले दोषियों की संख्या 23 हो गई। फैसले में न्यायाधीश ने न्यायिक दायित्व, दबाव और माफिया के प्रभाव को लेकर तल्ख टिप्पणी भी की।

फैसले में न्यायाधीश ने लिखा कि यदि वह अपराधियों के भय से ग्रस्त हुए तो उनके लिए इस पवित्र न्यायिक संस्था से त्यागपत्र देना उचित होगा। उन्होंने कहा कि वह “मरना पसंद करेंगे, लेकिन डरपोक कहलवाना पसंद नहीं करेंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक वह अपने सिद्धांतों पर चल सकते हैं, तब तक न्यायिक सेवा करते रहेंगे और निर्णय लेने का अधिकार उनका रहेगा।

न्यायाधीश ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के माफिया की ओर से संदेश भिजवाया गया कि अभी तो केवल पत्रावलियां हटवाई गई हैं, अधिक टिप्पणी करने पर प्रभाव का इस्तेमाल कर कोर्ट बदलवा दिया जाएगा या जिले से बाहर ट्रांसफर करा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे दबाव के बावजूद न्यायपालिका को निष्पक्ष, निडर और निर्भीक होकर काम करना चाहिए, क्योंकि आम जनता न्यायालय पर विश्वास करके आती है।

उन्होंने गवाहों के पक्षद्रोही होने और माफिया को राजनीतिक संरक्षण मिलने की आशंका पर भी टिप्पणी की। न्यायाधीश ने कहा कि यदि न्यायाधीश भयग्रस्त होंगे तो न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर होगा।

मुजफ्फरनगर के फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पत्नी शहजादी को जिंदा जलाने के मामले में नदीम को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अदालत ने फैसले में कहा कि अबला नारी को जिंदा जलाने वाला सहानुभूति का हकदार नहीं है और ऐसे अपराध में मृत्युदंड दिया जाना उचित है।

अभियोजन के अनुसार, बागपत के निवाड़ा निवासी दिलशाद ने अपनी पुत्री शहजादी का निकाह जनवरी 2015 में शाहपुर की नई आबादी निवासी नदीम के साथ किया था। दहेज को लेकर प्रताड़ना और बाइक व एक लाख रुपये की मांग का आरोप लगाया गया था। 23 जुलाई 2018 की रात करीब 8:30 बजे विवाद के दौरान शहजादी के साथ मारपीट की गई और उसके ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी गई।

इलाज के दौरान शहजादी का शरीर करीब 98 प्रतिशत तक जल गया था। उसे पहले सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 28 जुलाई 2018 को उसकी मौत हो गई। चिकित्सकीय रिपोर्ट में मौत का कारण जलने और सेप्टिक शॉक को बताया गया था।

अदालत ने मृत्यु से पहले मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए शहजादी के बयान को सजा का महत्वपूर्ण आधार माना। मामले में नदीम के अलावा उसकी मां शमशोदा और ननद सोनी को भी नामजद किया गया था। ट्रायल के दौरान सह-अभियुक्त सास शमशोदा की मृत्यु हो गई, जबकि साक्ष्य के अभाव में ननद सोनी को बरी कर दिया गया।

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