परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी से अपराध साबित
धारा 302 और 394 में आजीवन कारावास, कुल ₹1.56 लाख अर्थदंड
विशेष प्रतिनिधि
टेलीग्राम संवाद, लखनऊ। अलीगंज क्षेत्र में 90 वर्षीय वृद्धा शैल कुमारी उर्फ स्नेहलता की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कक्ष संख्या-17, लखनऊ ने आरोपी मानस सारस्वत उर्फ कन्टू को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी को हत्या के साथ लूट और बरामद माल से संबंधित धाराओं में भी दोषसिद्ध किया। फैसला 03 सितंबर 2026 को अपर सत्र न्यायाधीश रविन्द्र प्रसाद गुप्ता ने सुनाया।
अदालत के फैसले के अनुसार अभियोजन ने मानस के खिलाफ धारा 302, 394, 411 भारतीय दंड संहिता तथा धारा 4/25 आयुध अधिनियम के आरोपों को परिस्थितिजन्य, मौखिक और दस्तावेजीय साक्ष्यों के आधार पर युक्तियुक्त संदेह से परे साबित किया। न्यायालय ने आरोपी को इन सभी आरोपों में दोषसिद्ध किया।
दादी के घर गया था आरोपी, बाद में हत्या
मामला 15 अक्टूबर 2023 का है। अभियोजन के मुताबिक शैल कुमारी उर्फ स्नेहलता त्रिवेणीनगर में अकेली रहती थीं। घटना वाले दिन उनका पोता मानस सारस्वत उर्फ कन्टू भी घर पर मौजूद था। परिवार के सदस्य के घर से जाने के बाद वृद्धा की हत्या कर दी गई। जांच में सामने आया कि आरोपी ने रुपये और सोने के कंगन लूटने के इरादे से उन पर बांके से वार किए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर समेत शरीर पर कई गंभीर चोटें मिलीं। चिकित्सकीय साक्ष्य के अनुसार मृत्यु सिर की चोटों के कारण कोमा में जाने से हुई थी और चोटें मृत्यु से पूर्व की थीं।
पुलिस ने आरोपी से रुपये, कंगन और बांका बरामद किया
अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक गिरफ्तारी के समय मानस के कब्जे से ₹1,850 नकद, दो पीली धातु के कंगन और मोबाइल फोन बरामद हुआ। बाद में उसकी निशानदेही पर पुराने पक्का पुल के नीचे झाड़ियों से घटना में प्रयुक्त बांका बरामद किया गया। आरोपी के पहने पीले रंग के फुल बांह वाले टी-शर्ट पर भी खून के धब्बे पाए गए थे।
न्यायालय ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी पर विचार करते हुए अभियोजन के मामले को स्वीकार किया। फैसले में कहा गया कि उपलब्ध मौखिक और अभिलेखीय साक्ष्य आरोपी की भूमिका को स्थापित करते हैं।
कोर्ट ने माना—हत्या गंभीर, लेकिन मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ नहीं
सजा के प्रश्न पर अदालत ने कहा कि अपराध गंभीर और भयावह है, लेकिन मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित होने तथा इसे ‘विरल से विरलतम’ श्रेणी का अपराध न मानते हुए मृत्युदंड देना उचित नहीं है। आरोपी की उम्र और अपराध की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा को उचित माना।
चार धाराओं में सजा, सभी सजाएं साथ चलेंगी
कोर्ट ने धारा 302 IPC में आजीवन कारावास और ₹1 लाख अर्थदंड, धारा 394 IPC में आजीवन कारावास और ₹50 हजार अर्थदंड, धारा 411 IPC में तीन वर्ष का कारावास और ₹5 हजार अर्थदंड तथा धारा 4/25 आयुध अधिनियम में तीन वर्ष का कारावास और ₹1 हजार अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर संबंधित अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और पूर्व में जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।
अदालत ने दोषसिद्ध आरोपी का सजायाबी वारंट बनाकर उसे जिला कारागार भेजने का आदेश दिया।











