वेलकम टू द जंगल’ की कास्टिंग के पीछे महीनों की मेहनत,ऐसे तैयार हुई 34 कलाकारों वाली मल्टी-स्टार कास्ट-गिरधर स्वामी की लंबी तलाश और कई दौर के मंथन के बाद तय हुए कलाकार

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‘महाभारत’ के लोकप्रिय चेहरों को भी मिला फिल्म में मौका

हमारे संपादक (दिल्ली-एनसीआर) पवन सचदेवा की पिछले सप्ताह कास्टिंग डायरेक्टर गिरधर स्वामी से हुई विशेष बातचीत पर आधारित

टेलीग्राम संवाद, मुंबई। बॉलीवुड की बड़ी मल्टी-स्टार कॉमेडी फिल्मों में शुमार हो रही ‘वेलकम टू द जंगल’ की चमक सिर्फ पर्दे पर नजर आने वाले सितारों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे महीनों तक चली एक ऐसी कास्टिंग कवायद है, जिसमें हर किरदार के लिए सही चेहरे की तलाश की गई। इस पूरी प्रक्रिया की कमान संभालने वाले कास्टिंग डायरेक्टर गिरधर स्वामी के लिए चुनौती सिर्फ बड़े नामों को एक साथ लाना नहीं, बल्कि उन्हें कहानी और किरदार की जरूरत के मुताबिक फिट करना था।

गिरधर स्वामी के मुताबिक फिल्म की कास्टिंग प्रक्रिया करीब दो से तीन महीने तक चली। इस दौरान अलग-अलग कलाकारों की प्रोफाइल देखी गईं, संभावित नामों पर चर्चा हुई और कई विकल्पों पर विचार किया गया। मकसद साफ था—किरदार के साथ ऐसा कलाकार जोड़ा जाए, जो स्क्रीन पर अपनी मौजूदगी से उस भूमिका को प्रभावी बना सके।

फिल्मी दुनिया में किसी बड़े प्रोजेक्ट की कास्टिंग अक्सर उसके स्टार वैल्यू से जोड़ी जाती है, लेकिन गिरधर स्वामी की सोच इससे कुछ अलग नजर आती है। उनका मानना है कि कास्टिंग का मतलब केवल लोकप्रिय चेहरों की सूची तैयार करना नहीं है। असली काम यह समझना है कि कहानी किस कलाकार की मांग कर रही है।

‘वेलकम टू द जंगल’ के लिए भी इसी सोच के साथ अलग-अलग प्रोफाइल तलाशे गए। शुरुआती दौर में कई कलाकारों पर विचार हुआ। ‘लगान’ में काम कर चुके कलाकारों और खिलाड़ियों को भी संभावित विकल्पों में शामिल किया गया। बातचीत और विचार-विमर्श का दौर चला, लेकिन कास्टिंग की दिशा आगे चलकर एक नए विकल्प की ओर बढ़ी।

कास्टिंग के अगले चरण में भारतीय टेलीविजन के लोकप्रिय धारावाहिक ‘महाभारत’ से जुड़े अनुभवी कलाकारों को फिल्म का हिस्सा बनाने का विचार सामने आया। इसके बाद इन कलाकारों से बातचीत शुरू हुई और उनके अनुभव, स्क्रीन प्रेजेंस तथा प्रस्तावित किरदारों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

इसी क्रम में फिरोज खान, पंकज धीर और पुनीत इस्सर जैसे अनुभवी कलाकार फिल्म से जुड़े। इन कलाकारों ने ‘महाभारत’ में अपने यादगार किरदारों से घर-घर में पहचान बनाई थी। ऐसे चेहरों को एक बड़े कॉमेडी एंटरटेनर में नए अंदाज में देखना फिल्म की कास्टिंग को और दिलचस्प बनाता है।

गिरधर स्वामी के लिए किसी किरदार की कास्टिंग तब तक पूरी नहीं मानी जाती, जब तक उपलब्ध विकल्पों में से सबसे उपयुक्त कलाकार सामने न आ जाए। उनका जोर इस बात पर रहता है कि आसान या पहला विकल्प चुनने के बजाय संभावनाओं की पूरी गुंजाइश तलाशी जाए।उनके लंबे अनुभव ने इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। अलग-अलग फिल्मों, कलाकारों और फिल्म निर्माताओं के साथ काम करने के दौरान उन्होंने विभिन्न तरह के किरदारों की जरूरतों को समझा है। यही अनुभव ‘वेलकम टू द जंगल’ जैसी बड़ी मल्टी-स्टार फिल्म में काम आया।

गिरधर स्वामी का कास्टिंग करियर 18 साल से अधिक के अनुभव से समृद्ध है। वह ‘3 इडियट्स’, ‘राउडी राठौर’, ‘मैं तेरा हीरो’, ‘कैलेंडर गर्ल्स’, ‘वजीर’, ‘सनम तेरी कसम’, ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’, ‘अंधाधुन’, ‘कुली नंबर 1’ और ‘यारियां 2’ जैसी फिल्मों की कास्टिंग से जुड़े रहे हैं।

इस लंबे सफर में अलग-अलग जॉनर और अलग-अलग तरह के किरदारों के लिए कलाकार तलाशने का अनुभव उन्हें मिला। यही वजह है कि करीब 34 कलाकारों वाली बड़ी स्टार कास्ट को तैयार करना उनके लिए सिर्फ नामों को जोड़ने का काम नहीं रहा, बल्कि एक बड़े रचनात्मक संतुलन की कवायद भी बनी।

‘वेलकम टू द जंगल’ की खासियत इसकी विशाल मल्टी-स्टार कास्ट है। करीब 34 कलाकारों को एक ही फिल्म में जगह देना अपने आप में बड़ी चुनौती है। इतनी बड़ी कास्ट में हर कलाकार की अपनी स्क्रीन प्रेजेंस, कॉमिक टाइमिंग और किरदार की अलग जरूरत होती है।

ऐसे में कास्टिंग डायरेक्टर के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं होता कि कौन कलाकार लोकप्रिय है, बल्कि यह भी होता है कि कौन कलाकार उस खास भूमिका में कितना प्रभाव छोड़ सकता है। उम्र, व्यक्तित्व, अभिनय क्षमता, कॉमिक टाइमिंग और कहानी की जरूरत के बीच संतुलन बनाना इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा रहा।

पर्दे के पीछे की मेहनत अब पर्दे पर दिखने को तैयार

फिल्मों में दर्शकों को अंतिम परिणाम दिखाई देता है, लेकिन उसके पीछे होने वाली कास्टिंग की लंबी प्रक्रिया अक्सर नजरों से ओझल रहती है। ‘वेलकम टू द जंगल’ के मामले में भी कई महीनों तक कलाकारों की तलाश, बातचीत, विकल्पों पर विचार और किरदारों के अनुरूप चयन का सिलसिला चलता रहा।

राजस्थान के छोटे से गांव अबासर से मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचे गिरधर स्वामी के लिए यह प्रोजेक्ट उनके लंबे कास्टिंग सफर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनके अनुभव और लगातार बेहतर विकल्प तलाशने की सोच ने इस बड़े प्रोजेक्ट की कास्टिंग को आकार देने में अहम भूमिका निभाई।

फिल्मी पर्दे पर जब करीब 34 कलाकार एक साथ नजर आएंगे, तब दर्शकों को शायद सिर्फ सितारों की चमक दिखाई दे। लेकिन उस चमक के पीछे महीनों की तलाश, बातचीत और चयन की कहानी भी जुड़ी है।

गिरधर स्वामी की कास्टिंग यात्रा का सार यही है—किरदार बड़ा हो या छोटा, कोशिश हमेशा उसी कलाकार को तलाशने की होनी चाहिए जो उस भूमिका के लिए सबसे बेहतर हो। ‘वेलकम टू द जंगल’ की विशाल कास्ट इसी सोच और लंबी मेहनत का नतीजा है।

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