टेलीग्राम संवाद
बरेली। रक्षाबंधन पर डाक विभाग हर वर्ष उत्साह से काम करता था लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं दिखा। रक्षाबंधन में सिर्फ तीन दिन बचे हैं काउंटर पर एक भी लिफाफा नहीं है। ग्राहक परेशान हो रहे हैं। मुख्य डाकघर परिसर में रक्षाबंधन संबंधी लिफाफा रखे जाते थे लेकिन इस बार अफसराे ने ऐसा नहीं किया टूटी हुई दो ट्रे जरूर रख दी।

सोमवार अपराह्न संवाद टीम रक्षाबंधन संबंधी डाक व्यवस्था जानकारी लेने पहुंची। सबसे पहले मुलाकात पोस्टमास्टर से हुई उन्होंने परिचय देने के बाद आई कार्ड मांगा इसके बाद कुछ बात आगे बढ़ी। उन्होंने रक्षाबंधन पर डाक व्यवस्था संबंधी कई दावे किए लेकिन हकीकत में वहां पर कुछ नहीं था इसी बीच काउंटर से एक कर्मचारी आया उससे जानकारी ली गई की लिफाफा दिखाइए कैसे हैं उसने बताया लिफाफा तो कोई है ही नहीं। फिर किया था पोस्ट मास्टर साहब इधर-उधर झांकने लगे। कुल मिलाकर व्यवस्था संबंधी दावा ध्वस्त हो गया।
सबसे बड़े डाकघर में राखियां भेजने के लिए विशेष लिफाफे तक उपलब्ध नहीं। इतना ही नहीं, राखियां रखने के लिए रखी गई डलिया भी टूटी हुई है। मौके पर व्यवस्था के नाम पर महज खानापूर्ति नजर आई।
रक्षाबंधन से पहले डाकघरों में राखियों की बड़ी संख्या में बुकिंग और डिलीवरी को देखते हुए विशेष तैयारियां की जाती हैं। इसी व्यवस्था का जायजा लेने के लिए जब शहर के प्रमुख डाकघर का निरीक्षण किया गया तो वहां हालात इसके उलट मिले। राखी भेजने के लिए विशेष लिफाफे उपलब्ध नहीं थे। एक कर्मचारी ने बताया कि सिर्फ 50 लिफाफे आए थे, जो खत्म हो चुके हैं। रिकॉर्ड के लिए भी कोई लिफाफा उपलब्ध नहीं मिला।
इस संबंध में एसएससी पोस्ट से संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने फोन भी उठाना पसंद नहीं किया उनका व्हाट्सएप पर मैसेज भी दिया फिर भी कोई रिस्पांस नहीं दिया। मनमानी का सबसे बड़ा नमूना मुख्य डाकघर में देखने को मिला।










