उत्तर प्रदेश को डेयरी पावरहाउस बनाने की दिशा में बढ़ी Leads Genetics

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बरेली। उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख डेयरी हब बनाने की दिशा में अब पारंपरिक पशुपालन से आगे बढ़कर वैज्ञानिक जेनेटिक्स, आधुनिक प्रजनन तकनीक और उन्नत पशुधन प्रबंधन को केंद्र में लाने की कवायद तेज होती दिखाई दे रही है। बरेली स्थित भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित Dairy Conclave—स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम में डेयरी उद्योग की इसी बदलती तस्वीर की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में Leads Genetics Pvt. Ltd. ने अपनी अत्याधुनिक जेनेटिक्स, प्रजनन और पशुधन सुधार संबंधी तकनीकों का प्रदर्शन करते हुए उत्तर प्रदेश के डेयरी क्षेत्र में तकनीकी बदलाव की संभावनाओं को सामने रखा।

समागम में प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, अपर मुख्य सचिव पशुपालन एवं दुग्ध विकास मुकेश कुमार मेश्राम, दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के., मंडलायुक्त शंभु कुमार, जिलाधिकारी अविनाश सिंह सहित विभागीय अधिकारी, वैज्ञानिक, पशुपालक, दुग्ध उत्पादक, उद्यमी और निवेशक मौजूद रहे। आयोजन में डेयरी क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने, पशुधन की आनुवंशिक गुणवत्ता सुधारने और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर विशेष जोर दिखाई दिया।

डेयरी उद्योग में पशुओं की संख्या बढ़ाने के बजाय उनकी आनुवंशिक क्षमता और उत्पादकता बढ़ाने की रणनीति को भविष्य की अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। Leads Genetics ने अपने स्टॉल के माध्यम से इसी दृष्टिकोण को सामने रखा। कंपनी की ओर से इम्पोर्टेड जर्मप्लाज्म, EMBRAPA के साथ तकनीकी साझेदारी, IVF एवं Embryo Transfer (ET), सेक्स-सॉर्टेड सीमेन और जीनोमिक्स आधारित सेवाओं से जुड़ी तकनीकों की जानकारी दी गई।

कंपनी का जोर इस बात पर है कि वैज्ञानिक प्रजनन कार्यक्रमों के माध्यम से बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशुधन का विकास किया जाए। इससे आने वाली पीढ़ियों में दूध उत्पादन क्षमता, पशुधन की गुणवत्ता और डेयरी फार्मिंग की आर्थिक दक्षता को बेहतर बनाने की संभावनाएं पैदा होती हैं।

Leads Genetics के स्टॉल पर पहुंचे पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कंपनी की तकनीकी पहलों में रुचि दिखाई और टीम से जेनेटिक्स तथा आधुनिक प्रजनन तकनीकों के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने भी स्टॉल का अवलोकन किया और कंपनी द्वारा डेयरी क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र के विस्तार के लिए पशुपालकों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पशुपालन से जोड़ना समय की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि बेहतर नस्ल, वैज्ञानिक प्रजनन और गुणवत्तापूर्ण पशुधन संसाधनों के इस्तेमाल से दूध उत्पादन की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। सरकार की प्राथमिकता है कि आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पशुपालन का लाभ प्रदेश के अधिक से अधिक पशुपालकों तक पहुंचे, जिससे डेयरी क्षेत्र को अधिक संगठित, उत्पादक और रोजगारपरक बनाया जा सके।धर्मपाल सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र की अपार संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित पशुपालन से पशुधन की गुणवत्ता में सुधार के साथ दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में भी बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

Leads Genetics की ओर से अपने तकनीकी नेटवर्क में EMBRAPA के साथ सहयोग को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक विशेषज्ञता और स्थानीय डेयरी जरूरतों के बीच तालमेल स्थापित करने की दिशा में ऐसी साझेदारियां महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

कंपनी के स्टॉल पर IVF और Embryo Transfer जैसी उन्नत प्रजनन तकनीकों की जानकारी भी दी गई। इन तकनीकों का उद्देश्य उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले पशुधन के प्रजनन कार्यक्रमों को वैज्ञानिक आधार देना है। इसी तरह सेक्स-सॉर्टेड सीमेन जैसी तकनीकें डेयरी पशुपालन में प्रजनन प्रबंधन को अधिक लक्ष्य आधारित बनाने में उपयोगी हो सकती हैं।

डेयरी उद्योग अब केवल पशु की वर्तमान उत्पादकता देखने तक सीमित नहीं रह गया है। आधुनिक जीनोमिक्स तकनीक पशु के आनुवंशिक गुणों को समझने और प्रजनन संबंधी बेहतर निर्णय लेने की दिशा में नई संभावनाएं खोल रही है। Leads Genetics ने इसी तकनीकी बदलाव को अपने प्रदर्शन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।

जीनोमिक्स आधारित सेवाओं के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले पशुधन के चयन और वैज्ञानिक प्रजनन कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाएं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन तकनीकों को उचित प्रशिक्षण, डेटा और वैज्ञानिक पशुधन प्रबंधन के साथ जोड़ा जाए तो डेयरी उत्पादन की गुणवत्ता और दक्षता में दीर्घकालिक सुधार किया जा सकता है।


सरकार और उद्योग के बीच बढ़ता संवाद

Dairy Conclave का एक महत्वपूर्ण पहलू सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच संवाद का मंच तैयार होना भी रहा। एक तरफ विभागीय अधिकारी और वैज्ञानिक डेयरी क्षेत्र की नीतिगत एवं तकनीकी जरूरतों पर चर्चा कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर निजी क्षेत्र की कंपनियां अपनी तकनीक और भविष्य की संभावनाएं सामने रख रही थीं।

ऐसे मंचों पर तकनीक का प्रदर्शन केवल कारोबारी अवसरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे नीति निर्माताओं और उद्योग के बीच वास्तविक जरूरतों को समझने का अवसर भी मिलता है। उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र के व्यापक विस्तार को देखते हुए इस तरह के संवाद भविष्य की रणनीति बनाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।


डेयरी सेक्टर में निवेश और तकनीक का नया समीकरण

उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र का विस्तार अब केवल दूध उत्पादन बढ़ाने की चुनौती नहीं है। इसके साथ पशुधन की गुणवत्ता, प्रजनन दक्षता, वैज्ञानिक प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य, डेटा आधारित चयन और किसानों को बाजार से जोड़ने जैसी चुनौतियां भी जुड़ी हैं। ऐसे में तकनीक आधारित डेयरी मॉडल आने वाले वर्षों में उद्योग की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


बरेली से निकला तकनीक आधारित डेयरी विकास का संदेश

उत्तर प्रदेश को डेयरी पावरहाउस बनाने की दिशा में यदि आधुनिक तकनीक को पशुपालकों की रोजमर्रा की जरूरतों से जोड़ा जाता है, तो इसका असर दूध उत्पादन से आगे बढ़कर ग्रामीण रोजगार, पशुधन की गुणवत्ता और डेयरी आधारित अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। बरेली में आयोजित यह समागम इसी बदलते डेयरी परिदृश्य का संकेत देता नजर आया, जहां परंपरागत पशुपालन और अत्याधुनिक जेनेटिक्स के बीच एक नया तकनीकी सेतु तैयार करने की कोशिश दिखाई दी।

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