नए कलाकारों को सही मौका देना मेरी सबसे बड़ी खुशी : गिरधर स्वामी

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टेलीग्राम संवाद ,मुंबई। राजस्थान के चूरू जिले के छोटे से गांव अबासर से निकलकर मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में पहचान बनाने वाले गिरधर स्वामी की कहानी संघर्ष, मेहनत और प्रतिभा को पहचानने की कला की मिसाल है। जयपुर के थिएटर से रचनात्मक सफर शुरू करने वाले गिरधर स्वामी ने वर्ष 2009 में फिल्म ‘3 इडियट्स’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 18 वर्ष से अधिक के करियर में वह 75 से ज्यादा फीचर फिल्मों, 10 से अधिक शॉर्ट फिल्मों और 15 से ज्यादा म्यूजिक वीडियो की कास्टिंग से जुड़े रहे हैं। ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’, ‘अंधाधुन’, ‘सनम तेरी कसम’, ‘कुली नंबर 1’, ‘यारियां 2’ और ‘वेलकम टू द जंगल’ जैसी फिल्मों से उनका नाम जुड़ा है। नए कलाकारों को अवसर देने वाले गिरधर स्वामी का मानना है कि प्रतिभा के साथ काम के प्रति फोकस, सही दिशा और निरंतर मेहनत सफलता के लिए जरूरी है।

गिरधर स्वामी : शुरुआती वर्षों में काफी मेहनत करनी पड़ी। न कोई जान-पहचान थी और न कोई पहचान। चार-पांच साल लगातार काम करने के बाद इंडस्ट्री को समझना शुरू किया। आज मेरी कोशिश रहती है कि जो मुश्किलें मुझे झेलनी पड़ीं, वे नए युवाओं को न उठानी पड़ें। इसलिए नए लोगों को सही दिशा देने और उनकी मदद करने की कोशिश करता हूं।

गिरधर स्वामी : मुझे शुरू से ही रचनात्मक काम पसंद था। लगा कि इससे बेहतर काम क्या होगा कि आप लोगों को आगे बढ़ने में मदद करें। धीरे-धीरे यही मेरा पेशा बन गया। मैं अपनी कार्यशैली से खुश हूं और नए कलाकारों को अवसर देना मुझे अच्छा लगता है।

गिरधर स्वामी : ‘3 इडियट्स’ मेरे लिए सपने जैसा था। शुरुआत में मुझे अंदाजा नहीं था कि यह कितना बड़ा अवसर है। बाद में महसूस हुआ कि मैंने कितने दिग्गज लोगों के साथ काम किया। निर्देशक राजकुमार हिरानी मेरे लिए गुरु समान हैं। उनसे काम करके बहुत कुछ सीखने को मिला। उनके साथ काम करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

गिरधर स्वामी : सबसे जरूरी है कि कलाकार काम को लेकर कितना फोकस्ड है। शुरुआत में अभिनय थोड़ा कम आता हो तो वह सीखा जा सकता है, लेकिन काम के प्रति लगन और फोकस होना जरूरी है। इसके साथ ही जिस किरदार के लिए कास्टिंग हो रही है, उसकी जरूरत के अनुसार कलाकार का चयन किया जाता है।

गिरधर स्वामी : मैंने कई नए कलाकारों को इंडस्ट्री में ब्रेक दिया। मधुर भंडारकर की ‘कैलेंडर गर्ल्स’ में पांच नई लड़कियों को लॉन्च किया। ‘सनम तेरी कसम’ के मुख्य अभिनेता हर्षवर्धन राणे की कास्टिंग भी मैंने की। मेरी कोशिश रहती है कि नए टैलेंट को सही अवसर मिले। अगर मेरी वजह से किसी को अपने सपने पूरे करने की प्रेरणा मिलती है तो यह मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है।

गिरधर स्वामी : जब शुरुआत की थी, तब सोशल मीडिया नहीं था। ऑफिस-ऑफिस जाकर काम करना पड़ता था। आज व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और ईमेल के जरिये प्रोफाइल आसानी से भेजी जा सकती है। इससे कास्टिंग डायरेक्टर और नए कलाकारों दोनों तक पहुंच आसान हुई है। सही तरीके से मेहनत करने और सही लोगों तक पहुंचने पर अवसर मिल सकते हैं।

गिरधर स्वामी : ओटीटी की वजह से ज्यादा कलाकारों को काम करने के अवसर मिले हैं। फिल्मों में कलाकारों की संख्या सीमित होती है, जबकि ओटीटी में ज्यादा लोगों के लिए जगह है। मेरे हिसाब से यह अच्छी बात है और नए टैलेंट के लिए अवसर बढ़े हैं।

गिरधर स्वामी : मुंबई सपनों का शहर है। अपने सपनों पर ताला नहीं लगाना चाहिए। मुंबई आकर अपने करियर को आजमाना चाहिए। सही लोगों के साथ जुड़ना बहुत जरूरी है। बॉलीवुड में यह भी मायने रखता है कि आप किन लोगों के साथ जुड़ते हैं और किससे सीखते हैं। मेहनत करते रहें, सही लोगों तक पहुंचें और सपनों को कभी न छोड़ें।

गिरधर स्वामी : ‘सनम तेरी कसम’ और ‘वेलकम टू द जंगल’ दोनों मेरे लिए खास हैं। ‘सनम तेरी कसम’ में हर्षवर्धन राणे की कास्टिंग मेरे लिए विशेष उपलब्धि है। वहीं ‘वेलकम टू द जंगल’ बड़ी मल्टी-स्टार कास्ट और बड़े मनोरंजन वाली फिल्म है। इससे जुड़ना गर्व की बात है।

गिरधर स्वामी : मैं अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां और बहन को देना चाहता हूं। शुरुआती दिनों में जब मैं ज्यादा नहीं कमा रहा था, तब मेरी बहन ने मेरा बहुत साथ दिया। मां ने भी हमेशा हौसला बढ़ाया। मेरा मानना है कि जिसके साथ परिवार होता है, वह कभी पीछे नहीं रहता। भविष्य की योजना पर गिरधर स्वामी कहते हैं कि उनका सपना नए टैलेंट को ज्यादा से ज्यादा अवसर देना है। उनके मुताबिक सफलता सिर्फ अपनी मंजिल तक पहुंचना नहीं, बल्कि दूसरों को भी उनकी मंजिल तक पहुंचने में मदद करना है। राजस्थान के छोटे से गांव से मुंबई तक का उनका सफर इसी सोच, संघर्ष और निरंतर मेहनत की प्रेरक कहानी है।

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