आंवला की बेटी ने राष्ट्रीय मंच पर रचा नया कीर्तिमान
रैंप पर बिखेरी सितारों जैसी चमक, आत्मविश्वास और अदाओं से निर्णायकों का जीता दिल
टेलीग्राम संवाद
जयपुर/ बरेली/आंवला। जयपुर की वह शाम किसी फिल्मी पर्दे से कम नहीं थी। चारों तरफ जगमगाती रोशनियां, कैमरों के चमकते फ्लैश, सजे-धजे मेहमानों की मौजूदगी और संगीत की धुन पर थिरकता भव्य मंच… जैसे फैशन की दुनिया के तमाम रंग एक ही शाम में उतर आए हों। रैंप पर कदम रखने वाली हर प्रतिभागी के साथ निगाहें घूमतीं और कैमरों की चमक उस पल को अपने भीतर कैद करने को बेताब नजर आती।फिर मंच की रोशनी कुछ पल के लिए थमी… संगीत का सुर बदला और रैंप पर कदम रखा आंवला की बेटी डॉ. सुगंधा महाजन ने।आत्मविश्वास से भरी चाल, चेहरे पर ग्लैमर की चमक और अंदाज में ऐसी शालीनता कि रैंप पर उनकी मौजूदगी ने पूरा माहौल अपने नाम कर लिया। दर्शकों की निगाहें उन पर टिक गईं और कैमरों के फ्लैश लगातार चमकते रहे। उस पल ऐसा लगा मानो जयपुर की फैशन नाइट में आंवला की मिट्टी की खुशबू भी सितारों के बीच अपनी अलग पहचान बना रही हो।
रैंप पर सुगंधा के हर कदम के साथ तालियों की गूंज बढ़ती गई। यह सिर्फ सौंदर्य का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और उस सपने की चमक थी, जिसे एक छोटे से कस्बे की बेटी ने अपनी मेहनत से बड़े मंच तक पहुंचाया था।
और फिर आया वह बहुप्रतीक्षित पल…मंच पर विजेता के नाम की घोषणा हुई और डॉ. सुगंधा महाजन के नाम के साथ पूरा माहौल तालियों से गूंज उठा।सिर पर सजा मिसेज इंडिया इंटरनेशनल 2026 का ताज और चेहरे पर छलकती खुशी ने उस शाम को सुगंधा के लिए यादगार बना दिया।

रैंप पर ग्लैमर, अंदाज में सितारों जैसी चमक
जयपुर में आयोजित मिस एंड मिसेज इंडिया इंटरनेशनल सौंदर्य प्रतियोगिता 2026 में देश के अलग-अलग राज्यों से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। मंच पर जहां खूबसूरती और फैशन का जलवा देखने को मिला, वहीं हर प्रतिभागी अपने आत्मविश्वास और व्यक्तित्व के साथ अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करती नजर आई।उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहीं डॉ. सुगंधा महाजन की प्रस्तुति ने भी निर्णायकों का ध्यान खींचा। रैंप पर उनकी चाल में आत्मविश्वास और व्यक्तित्व में सहजता नजर आई।चार दिनों तक चले इस आयोजन में प्रतिभागियों को प्रतिभा प्रदर्शन, प्रशिक्षण सत्र, कार्यशालाओं और विभिन्न प्रतिस्पर्धात्मक चरणों से गुजरना पड़ा। मुकाबला जैसे-जैसे अंतिम दौर की ओर बढ़ा, मंच की चमक के साथ तनाव और उत्सुकता भी बढ़ती गई।अंततः अंतिम पांच प्रतिभागियों का चयन हुआ और इनमें सुगंधा ने भी अपनी जगह बनाई।

सवाल-जवाब के दौर में भी कायम रहा जलवा
भव्य अंतिम चरण में रैंप पर सुगंधा का अंदाज देखने लायक रहा। लेकिन असली परीक्षा सिर्फ खूबसूरती और प्रस्तुति की नहीं थी। सवाल-जवाब के दौर में उनकी सोच, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व को भी परखा गया।रैंप की चमक और सवालों के बीच संतुलित अंदाज ने सुगंधा को विजेता की दौड़ में मजबूत स्थिति में पहुंचाया।जब अंतिम घोषणा हुई और मिसेज इंडिया इंटरनेशनल 2026 के लिए उनका नाम पुकारा गया, तो वह पल किसी फिल्मी क्लाइमेक्स से कम नहीं था।

चमकते ताज के पीछे पिता की याद
सिर पर सजा ताज जितना चमकदार था, उसके पीछे छिपी कहानी उतनी ही भावुक।डॉ. सुगंधा महाजन ने अपनी इस उपलब्धि को अपने दिवंगत पिता स्व. हरिओम गुप्ता को समर्पित किया है। पिछले वर्ष पिता के निधन के बाद मिली यह सफलता उनके लिए सिर्फ सौंदर्य प्रतियोगिता की जीत नहीं, बल्कि पिता के सपनों और उनके दिए संस्कारों को सम्मान देने का अवसर भी है।जिस पिता ने बेटी को निडर होकर आगे बढ़ना सिखाया, उनकी सीख उस शाम रैंप पर सुगंधा के आत्मविश्वास में साफ नजर आई।

खूबसूरती के मंच से कहीं आगे है सुगंधा की पहचान
सुगंधा की कहानी सिर्फ रैंप, फैशन और ताज तक सीमित नहीं है। वह शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं।आंवला और बरेली में वह प्रतिष्ठित होम्योपैथिक चिकित्सक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने मनोविज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य में स्नातकोत्तर शिक्षा हासिल की है और इस क्षेत्र में राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर पांच स्वर्ण पदक प्राप्त किए हैं। वर्तमान में वह नैदानिक मनोविज्ञान में शोध उपाधि भी कर रही हैं। यानी रैंप की चमक के पीछे ज्ञान की रोशनी भी उतनी ही दमदार है।

मां के संस्कार, पिता का हौसला और बेटी का आत्मविश्वास
सुगंधा अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां श्रीमती आर्ची गुप्ता और दिवंगत पिता स्व. हरिओम गुप्ता को देती हैं।उनकी मां ने दसवीं कक्षा तक उन्हें स्वयं पढ़ाया और पढ़ाई के साथ-साथ अलग-अलग गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया। वहीं पिता ने उन्हें मुश्किलों से लड़ना, निडर रहना और हर परिस्थिति में आत्मविश्वास बनाए रखना सिखाया।सुगंधा के मुताबिक, पिता ने उन्हें “एक शेरनी की तरह परवरिश” दी, जबकि मां ने उन्हें संस्कार और जीवन-मूल्यों की मजबूत नींव दी।
आंवला से जयपुर तक… एक ताज, कई सपनों की चमक
जयपुर की उस ग्लैमरस शाम में जब सुगंधा के सिर पर ताज सजा, तो मंच की रोशनियां भी जैसे उनकी कहानी के आगे फीकी पड़ गईं।यह जीत एक ऐसे सफर की तस्वीर है, जिसमें एक छोटे कस्बे की बेटी ने शिक्षा को अपनी ताकत बनाया, माता-पिता के संस्कारों को अपना आधार बनाया और आत्मविश्वास के साथ फैशन की चमकती दुनिया में कदम रखा।उस शाम रैंप पर सिर्फ एक विजेता नहीं चली थी… आंवला की बेटी अपने साथ अपने माता-पिता के सपने लेकर चली थी। और जब ताज उसके सिर पर सजा, तो तालियों की गूंज में एक छोटे से कस्बे की बड़ी कामयाबी की कहानी सुनाई दे रही थी।











