संत परंपरा की कहानियों को पर्दे पर गढ़ रहे गिरधर स्वामी, ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद ‘तेरा साई’ में दमदार कलाकारों का चयन

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पवन सचदेवा
सम्पादक(दिल्ली-एनसीआर)

भारतीय सिनेमा में कलाकारों के चयन को कहानी की आत्मा के अनुरूप आकार देने वाले कास्टिंग निर्देशक गिरधर स्वामी इन दिनों आध्यात्मिक और संत परंपरा से जुड़ी फिल्मों के कारण चर्चा में हैं। हाल ही में करीब दो करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सफलता में उनकी कास्टिंग भूमिका महत्वपूर्ण रही, वहीं अब उनकी कलाकार चयन कला आगामी फिल्म ‘तेरा साई’ में भी दिखाई देगी। साईं बाबा के जीवन और उनके मानवता, प्रेम, करुणा तथा सद्भाव के संदेश पर आधारित इस फिल्म में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित अभिनेता संजय मिश्रा साईं बाबा की केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं।

‘हनुमान अंश’ ने अपनी कहानी और आध्यात्मिक भावभूमि के कारण दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। नीम करोली बाबा के जीवन और हनुमान भक्ति से प्रेरित इस कथा का केंद्र लक्ष्मीनारायण नामक बालक है, जिसकी मां की मृत्यु के बाद उसके भीतर ईश्वर को जानने की तीव्र जिज्ञासा जन्म लेती है। मां की तलाश से शुरू होने वाली यह यात्रा आगे चलकर ईश्वर की खोज, प्रेम, करुणा, सेवा और मानवता के व्यापक अर्थ तक पहुंचती है।

फिल्म की कहानी का विशेष पक्ष यह है कि इसमें नीम करोली बाबा को सीधे भगवान हनुमान के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उनकी हनुमान भक्ति और उससे उपजे आध्यात्मिक भाव को केंद्र में रखा गया है। यही वजह है कि फिल्म धार्मिक आस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी प्रमुखता देती है।
‘हनुमान अंश’ में कास्टिंग बनी अहम कड़ी
आध्यात्मिक विषय वाली फिल्मों में कलाकारों का चयन सामान्य फिल्मों की तुलना में अधिक संवेदनशील प्रक्रिया माना जाता है। चरित्र की उम्र, व्यक्तित्व, भाषा, शारीरिक उपस्थिति और अभिनय क्षमता के साथ यह भी देखना पड़ता है कि कलाकार दर्शकों के मन में पहले से स्थापित आस्था और भावनात्मक जुड़ाव के अनुरूप भूमिका को विश्वसनीय बना सके।

‘हनुमान अंश’ में इसी जिम्मेदारी से जुड़े गिरधर स्वामी ने विभिन्न चरित्रों के लिए उपयुक्त कलाकारों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फिल्म के केंद्रीय अभिनेता शोभिनव सत्य के चयन की कहानी भी उल्लेखनीय रही। वह शुरुआत में फिल्म से सहायक निर्देशक के रूप में जुड़े थे, लेकिन शूटिंग के पहले ही दिन मूल अभिनेता के गंभीर रूप से बीमार पड़ जाने के बाद परिस्थितियां बदल गईं। उनके अभिनय परीक्षण के बाद निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने उन्हें नीम करोली बाबा की केंद्रीय भूमिका के लिए चुना।

शोभिनव सत्य ने बाबा के जीवन के विभिन्न चरणों को पर्दे पर प्रस्तुत किया। वहीं विहान शेडगे ने कम उम्र के महाराज जी की भूमिका निभाई। फिल्म में चंदन आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी और गुलशन पांडेय सहित अन्य कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।

फिल्म की सफलता ने यह भी दिखाया कि दर्शकों का जुड़ाव केवल बड़े बजट या बड़े सितारों तक सीमित नहीं है। मजबूत कथा, भावनात्मक प्रभाव और विषय की प्रामाणिकता सीमित संसाधनों वाली फिल्म को भी व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचा सकती है। फिल्म के कारोबार को लेकर बाद की रिपोर्टों में दो सौ करोड़ रुपये से अधिक के आंकड़े का दावा किया गया है।
‘तेरा साई’ में संजय मिश्रा बने साईं बाबा
‘हनुमान अंश’ के बाद गिरधर स्वामी अब ‘तेरा साई’ जैसी संत परंपरा पर आधारित फिल्म से जुड़े हैं। पलाश मुच्छल द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म में संजय मिश्रा साईं बाबा की भूमिका में दिखाई देंगे। उनके साथ सयाजी शिंदे, मनोज जोशी, ओंकार दास मानिकपुरी, अविका गौर और रोहन मेहरा जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।

साईं बाबा का चरित्र केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। उनके जीवन से जुड़े प्रेम, सेवा, करुणा, विश्वास और मानवता के संदेश को फिल्म की कथा का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। ऐसे में साईं बाबा की भूमिका के लिए संजय मिश्रा का चयन विशेष महत्व रखता है। अपने सहज और प्रभावशाली अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले मिश्रा से उनके आध्यात्मिक व्यक्तित्व के साथ मानवीय पक्ष को भी पर्दे पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की उम्मीद की जा रही है।

फिल्म की मजबूत कलाकार टोली में वरिष्ठ अभिनेताओं सयाजी शिंदे और मनोज जोशी की मौजूदगी के साथ ओंकार दास मानिकपुरी, अविका गौर और रोहन मेहरा जैसे कलाकारों को शामिल किया गया है। अलग-अलग अभिनय अनुभव और व्यक्तित्व वाले इन कलाकारों का चयन कथा के विभिन्न चरित्रों को विश्वसनीय बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कलाकार चयन में वर्षों का अनुभव
गिरधर स्वामी हिंदी फिल्म उद्योग में लंबे समय से कास्टिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके कलाकार चयन से जुड़ी फिल्मों में ‘थ्री इडियट्स’, ‘राउडी राठौर’, ‘वजीर’, ‘सनम तेरी कसम’, ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’, ‘अंधाधुन’, ‘कुली नंबर वन’, ‘यारियां 2’ और ‘वेलकम टू द जंगल’ जैसी चर्चित फिल्में शामिल हैं।

उनके लिए कास्टिंग का अर्थ महज कलाकार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि कहानी के प्रत्येक चरित्र के लिए ऐसा चेहरा और व्यक्तित्व तलाशना है जो उस भूमिका को जीवंत कर सके। यही दृष्टिकोण ‘हनुमान अंश’ और ‘तेरा साई’ जैसी आध्यात्मिक फिल्मों में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, जहां पात्रों से दर्शकों की भावनात्मक और आस्था संबंधी अपेक्षाएं जुड़ी होती हैं।
‘तेरा साई’ के प्रदर्शन की तैयारी
‘तेरा साई’ का मुख्य छायांकन पूरा हो चुका है और फिल्म फिलहाल निर्माणोत्तर प्रक्रिया में है। निर्माताओं ने फिल्म में उस दौर और वातावरण को विश्वसनीय रूप से पुनः सृजित करने पर विशेष ध्यान दिया है, जिसमें साईं बाबा का जीवन रहा।

फिल्म को 5 फरवरी 2027 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने की घोषणा की गई है। इसे हिंदी के साथ मराठी, तेलुगु और तमिल भाषाओं में भी दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी है।

‘हनुमान अंश’ से ‘तेरा साई’ तक गिरधर स्वामी का जुड़ाव इस मायने में भी खास है कि दोनों फिल्में संत परंपरा और आध्यात्मिक चेतना से जुड़ी कथाओं को अलग-अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती हैं। एक ओर नीम करोली बाबा की हनुमान भक्ति, सेवा और करुणा की कथा है तो दूसरी ओर साईं बाबा के माध्यम से प्रेम, विश्वास, सद्भाव और मानवता का संदेश सामने लाने का प्रयास।

इन दोनों फिल्मों में पर्दे पर दिखाई देने वाले कलाकारों के पीछे की कास्टिंग प्रक्रिया भी कथा को विश्वसनीय बनाने की अहम कड़ी है। यही वजह है कि गिरधर स्वामी के लिए ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद ‘तेरा साई’ केवल एक और फिल्म नहीं, बल्कि संत और आध्यात्मिक कथाओं को उपयुक्त कलाकारों के माध्यम से प्रभावी रूप देने की उनकी कला की अगली महत्वपूर्ण परीक्षा भी मानी जा सकती है।

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