बरेली में होगा देश का पहला कैटल जीनोमिक्स समिट, जुटेंगे पशुधन विज्ञान के दिग्गज

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बरेली। पशुधन क्षेत्र में आनुवंशिक सुधार, आधुनिक प्रजनन तकनीकों और जीनोमिक्स के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर बरेली में देश का पहला कैटल जीनोमिक्स समिट-2026 आयोजित होने जा रहा है। बीएल एग्रो की सहयोगी कंपनी लीड्स जेनेटिक्स की ओर से 14 और 15 सितंबर को फतेहगंज पश्चिमी स्थित बीएल कामधेनु फार्म में होने वाले इस दो दिवसीय आयोजन में पशुधन विज्ञान, कृषि, डेयरी, आनुवंशिकी और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ देश-विदेश के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

14 सितंबर को सुबह 9 से 9:30 बजे तक प्रतिनिधियों का पंजीकरण होगा। इसके बाद 9:30 से 10:30 बजे तक लीड्स जेनेटिक्स की सीक्वेंसिंग प्रयोगशाला का भ्रमण कराया जाएगा। 10:30 से 11 बजे तक चाय का अवकाश रहेगा।

सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक उद्घाटन समारोह होगा। इसमें अतिथियों के स्वागत और दीप प्रज्ज्वलन के बाद बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल स्वागत संबोधन देंगे। मुख्य अतिथि के रूप में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल संबोधित करेंगे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री अरुण कुमार सक्सेना तथा भारत में तंजानिया की उच्चायुक्त अनिसा कपूफी मबेगा भी संबोधित करेंगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ऑनलाइन विशेष संबोधन देंगे।

दोपहर 12 से 12:30 बजे तक भारत की पहली स्वदेशी गिर कैटल एसएनपी चिप का लोकार्पण किया जाएगा। यह चिप फाजेंडा फ्लोरेस्टा, डीएनए-मार्क और एंब्रापा के सहयोग से विकसित की गई है। इसका शुभारंभ मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों द्वारा किया जाएगा।

इसके बाद 12:30 से 1 बजे तक भारत-ब्राजील सहयोग पर पैनल चर्चा होगी। इसमें डॉ. मार्कोस और रोजेरियो भारतीय देशी नस्ल गिर से वैश्विक स्तर पर पशुधन सुधार और भारत-ब्राजील साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे। दोपहर 1 से 2:30 बजे तक लंच एवं प्रेस ब्रीफिंग होगी।

समिट के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक सत्रों में आधुनिक जीनोमिक तकनीकों, प्रजनन विज्ञान और नस्ल सुधार को लेकर विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे। दूसरे दिन 15 सितंबर को सुबह 9:30 से 10:30 बजे तक एनजीएस प्रयोग की योजना पर डॉ. आशीष दुबे और डॉ. पार्थसारधि गोदिथाला सत्र लेंगे। इसके बाद 10:30 से 11 बजे तक चाय का अवकाश और 11 से 12 बजे तक प्रयोगशाला भ्रमण होगा, जिसमें नोवासीक रन अपडेट और टेपस्टेशन पर लाइब्रेरी क्यूसी की जानकारी दी जाएगी।

दोपहर 12 से 1 बजे तक ‘जीनोमिक सिलेक्शन—अगली पीढ़ी के प्रजनन की दिशा में बड़ी छलांग’ विषय पर पैनल चर्चा होगी। इसमें डीयूवीएएसयू मथुरा के चेयरमैन एवं पूर्व पशुपालन आयुक्त डॉ. अभिजीत मित्रा, एनआईएबी हैदराबाद के वैज्ञानिक डॉ. सरवर आजम, आईसीएआर-एनआरसीसी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वेद प्रकाश, उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राकेश नेगी और एनडीडीबी के वरिष्ठ प्रबंधक डॉ. ए. सुधाकर शामिल होंगे।

1 से 1:30 बजे तक प्रेमास लाइफ साइंसेज के डिप्टी मैनेजर विशाल मिश्रा बायोइन्फॉर्मेटिक्स टीम चर्चा और क्यूसी मेट्रिक्स पर बात करेंगे। 1:30 से 2:30 बजे तक लंच ब्रेक रहेगा।

दोपहर 2:30 से 3:30 बजे तक डॉ. एसके अग्रवाल ‘रिप्रोडक्टिव बायोटेक्नोलॉजी एट वर्क : द लीड्स जेनेटिक्स आईवीएफ जर्नी’ विषय पर जानकारी देंगे, जबकि डॉ. आशीष दुबे ‘लीड्स जेनेटिक्स—ए बिलियन डॉलर मूव’ विषय पर प्रस्तुति देंगे। इसी दौरान एनजीएस सेटअप से संबंधित हैंड्स-ऑन वर्कशॉप और लैब गतिविधि समानांतर रूप से चलेगी।

इसके बाद 3:30 से 4:30 बजे तक ‘खाद्य सुरक्षा और भारत की तैयारियां’ विषय पर पैनल चर्चा होगी। मॉडरेटर प्रवीण गुप्ता होंगे। पैनल में आईसीएआर-एनआईएएनपी बेंगलुरु के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरासामी सेजियन, सीसीएस मेरठ के डॉ. वीके बरनवाल, आईसीएआर-आईआईएचआर बेंगलुरु के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रवि शंकर, लीड्स जेनेटिक्स के प्रबंध निदेशक आशीष खंडेलवाल और लीड्स कनेक्ट के प्रबंध निदेशक नवनीत रविकर शामिल होंगे।

4:30 से 5:30 बजे तक ‘ब्रीडिंग फॉर टुमारो—भारत के जेनेटिक इम्प्रूवमेंट कार्यक्रम को आगे बढ़ाना’ विषय पर चर्चा होगी। इसमें आईसीएआर के चेयरमैन डॉ. केएमएल पाठक, आईसीएआर के पूर्व एडीजी डॉ. विशेष कुमार सक्सेना, आईसीएआर-आईवीआरआई के संयुक्त निदेशक डॉ. एसके सिंह, आईसीएआर-सीआईआरजी मखदूम के निदेशक डॉ. मनीष चैट्टी और मॉडरेटर के रूप में आईसीएआर-सीआईआरजी के पूर्व निदेशक डॉ. एसके अग्रवाल शामिल होंगे।

शाम 5 बजे से हाई टी और समापन समारोह होगा, जिसमें आयोजन की उपलब्धियों और आगे की दिशा पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद रात 8 बजे से द ग्रैंड निर्वाणा होटल में कॉकटेल एवं डिनर का आयोजन रखा गया है।

कुल मिलाकर, बरेली में होने वाला यह समिट पशुधन क्षेत्र में विज्ञान और उद्योग के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनने जा रहा है। भारतीय देशी नस्लों की आनुवंशिक क्षमता, आधुनिक प्रजनन तकनीक, जीनोमिक चयन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रयोगशाला आधारित अनुसंधान जैसे विषयों पर होने वाला मंथन देश में पशुधन सुधार की दिशा को नई गति देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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