टेलीग्राम संवाद
बरेली। नामीग्रामी कच्ची घानी सरसों तेल नाम से विभिन्न ब्रांड बाजार में बिक रहे हैं लेकिन यह कितने शुद्ध है यह किसी को पता नहीं। पिछले दिनों लिए गए सैंपल में तमाम खुलासा हुआ है। जिसमें चक्र, रविंद्रा और बावर्ची जैसे कच्ची घानी सरसों तेल ब्रांड भी शामिल है। जांच में अशुद्धि उपाय जाने पर भी विभाग मौन है। लेकिन जनसेवक अदालतों में पहुंचने लगे हैं। खाद्य तेलों में हो रही मिलावट संबंधी एक परिवाद वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र पाल गुप्ता में दायर की है। इस पर अदालत ने कदम उठाया है।

बरेली अदालत ने चर्चित ‘चक कच्ची घानी’ तेल बनाने वाली कंपनी मेसर्स खंडेलवाल एडिबल ऑयल प्रबंध निदेशक पर मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत के इस फैसले को खाद्य मिलावट और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र पाल गुप्ता
मामले में आरोप लगाया गया है कि कंपनी वास्तविक कच्ची घानी पद्धति से सरसों तेल का उत्पादन नहीं करती, बल्कि सस्ते दामों पर आयातित पाम ऑयल, सोयाबीन, राइस ब्रान और अन्य रिफाइंड तेलों का इस्तेमाल कर उपभोक्ताओं को भ्रमित कर रही है। शिकायत में कहा गया है कि इन तेलों को रासायनिक प्रक्रिया और अत्यधिक तापमान पर रिफाइन किया जाता है, जिससे इनके प्राकृतिक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। परिवाद में यह भी आरोप है कि तेल को आकर्षक बनाने और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने के लिए उसमें सरसों जैसी कृत्रिम तीखी गंध मिलाई जाती है।














