लखनऊ में ब्याज पर पूरी छूट, बरेली में करदाताओं को राहत क्यों नहीं: राजेश अग्रवाल

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टेलीग्राम संवाद

बरेली। नगर निगम की हाउस टैक्स एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) में ब्याज पर छूट और जीआईएस सर्वे के बाद हुए कर निर्धारण को लेकर पार्षद राजेश अग्रवाल ने टैक्स विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि लखनऊ नगर निगम में ब्याज लगने की तारीख से पूरी छूट दी जा रही है, जबकि बरेली में करदाताओं को सीमित राहत मिल रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब लखनऊ में ऐसी व्यवस्था लागू है तो बरेली के लोगों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा है?

राजेश अग्रवाल ने लखनऊ नगर निगम के एक बिल का उदाहरण देते हुए बताया कि 5.18 लाख रुपये के बकाये में 2.95 लाख रुपये ब्याज माफ किया जा रहा है। इसके बाद करीब 2.13 लाख रुपये जमा करने होंगे। उन्होंने मांग की कि बरेली में भी ब्याज लगने की तारीख से छूट दी जाए।

पार्षद ने आरोप लगाया कि जीआईएस सर्वे में कई संपत्तियों का गलत कर निर्धारण किया गया। इससे गरीब परिवारों पर हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ गया। डीडीपुरम की एक संपत्ति को गलत क्षेत्र और वार्ड में दर्ज करने का मामला भी उठाया। उनका आरोप है कि इन मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जीआईएस सर्वे के नाम पर टैक्स निर्धारण और वसूली की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए।

राजेश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि विभाग में फाइलों और रजिस्टरों का उचित रखरखाव नहीं हो रहा है। सॉफ्टवेयर के नाम पर जिम्मेदारी से बचा जाता है और कंप्यूटर में बदलाव की गुंजाइश बनी रहती है।

उन्होंने टैक्स विभाग में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की तैनाती पर सवाल उठाते हुए कहा कि कर्मचारियों का समय-समय पर कार्यक्षेत्र नहीं बदला जा रहा है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। आरोप लगाया कि कुछ आउटसोर्सिंग कर्मचारी रिश्वत लेकर कर निर्धारण और बिलों में बदलाव कर रहे हैं। उन्होंने नगर आयुक्त से विभाग की कार्यप्रणाली की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी उठाए सवाल

पार्षद ने नगर निगम के निर्माण कार्यों में कथित कमीशनखोरी और गुणवत्ता से समझौते का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जनता से टैक्स वसूलने में जितनी तत्परता दिखाई जाती है, उतनी ही गंभीरता सड़क, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाएं देने में भी होनी चाहिए। अधिकारियों को आश्वासन देने के बजाय ईमानदारी से काम करके दिखाना चाहिए। उन्होंने नगर आयुक्त से टैक्स विभाग की कार्यप्रणाली की जांच कराने, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का कार्यक्षेत्र बदलने और अनियमितताओं में शामिल लोगों पर कार्रवाई की मांग की।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि नगर निगम में ऐसे अधिकारियों की जरूरत है, जो ईमानदारी से काम करें और जनता की शिकायतों का समय से निस्तारण कराएं। उन्होंने नगर आयुक्त के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख रखते हुए निगम की समग्र कार्यप्रणाली में सुधार की मांग की।

समय से टैक्स जमा करने वालों को भी नुकसान

पार्षद ने ओटीएस की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों ने पहले ही टैक्स जमा कर दिया है, उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। उदाहरण देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति ने दो लाख रुपये के बकाये में से 60 हजार रुपये पहले जमा कर दिए, तो विभाग पूरी रकम को ब्याज मानकर छूट देने से इन्कार कर रहा है। इससे समय पर टैक्स जमा करने वाले करदाताओं को नुकसान हो रहा है, जबकि बकायेदारों को योजना के तहत राहत मिल रही है।

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