- गवाह का वेतन रोकने के आदेश
- लखनऊ की अदालत ने गवाही में देरी पर अपनाया सख्त रुख
- निरीक्षक के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने के निर्देश
गजेन्द्र पटेल(विधि संवाददाता)
टेलीग्राम संवाद, लखनऊ। वर्ष 2013 के एक गंभीर आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन गवाह को अदालत में पेश नहीं किए जाने और जमानतीय वारंट की विधिसम्मत तामील में लापरवाही सामने आने पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-17, लखनऊ के न्यायाधीश रविन्द्र प्रसाद गुप्ता, लखनऊ की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कार्यवाही में विलंब के लिए तामील कराने वाले संबंधित कर्मचारी पर दो हजार रुपये और ठाकुरगंज के प्रभारी निरीक्षक पर पांच हजार रुपये का हर्जाना अधिरोपित किया है। साथ ही, अभियोजन गवाह निरीक्षक अवधेश कुमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने, नोटिस देने और न्यायालय में साक्ष्य देने तक उनका वेतन आहरित नहीं किए जाने का आदेश दिया है।
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को चार नवंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश भी दिए हैं। पुलिस आयुक्त, लखनऊ को मामले में जांच कराकर निर्धारित तिथि से पहले रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को संबंधित गवाह की निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सम्मन के बाद भी गवाही के लिए नहीं पहुंचे निरीक्षक
न्यायालय में विचाराधीन सत्र परीक्षण संख्या 727/2014, सरकार बनाम अजय कुमार रावत व अन्य में सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन साक्षी निरीक्षक अवधेश कुमार, जनपद इटावा, को गवाही के लिए प्रस्तुत नहीं किया गया। पत्रावली के अनुसार, छह जुलाई 2026 को उन्हें सम्मन के माध्यम से तलब किया गया था। इसके बाद 28 जुलाई, 17 अगस्त, पांच सितंबर और 30 सितंबर 2026 को सुनवाई की तिथियां निर्धारित की गईं, लेकिन गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हुए।
लगातार अनुपस्थिति के चलते 30 सितंबर 2026 को उनके विरुद्ध 25 हजार रुपये का जमानतीय अधिपत्र जारी करने का आदेश दिया गया था। इसके बावजूद न तो अधिपत्र की विधिसम्मत तामील कराई गई और न ही संबंधित गवाह को साक्ष्य के लिए न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
वारंट की तामील प्रक्रिया पर उठाए सवाल
अदालत ने पत्रावली का अवलोकन करते हुए पाया कि जमानतीय अधिपत्र को संबंधित गवाह के कार्यालय में दाखिल कर दिया गया था, जबकि दंड प्रक्रिया संहिता में निर्धारित तामील की प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया गया। न्यायालय ने इस स्थिति को अभियोजन पक्ष और संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से मुकदमे के निस्तारण में अपेक्षित रुचि नहीं लेने तथा विधिक दायित्वों के समुचित निर्वहन में कमी के रूप में दर्ज किया।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि ठाकुरगंज के प्रभारी निरीक्षक की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि अधिपत्र की विधिसम्मत तामील क्यों नहीं कराई गई। इस लापरवाही के कारण 17 अक्टूबर 2026 की न्यायिक कार्यवाही विलंबित हुई।
चार नवंबर को स्पष्टीकरण के साथ तलब
न्यायालय ने कार्यवाही में विलंब के लिए तामील कराने वाले संबंधित कर्मचारी पर दो हजार रुपये और ठाकुरगंज के प्रभारी निरीक्षक पर पांच हजार रुपये का हर्जाना अधिरोपित किया है। दोनों को चार नवंबर 2026 को हर्जाने की राशि अदा करते हुए व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर यह स्पष्ट करना होगा कि न्यायालय के आदेश का विधिपूर्वक अनुपालन क्यों नहीं किया गया।
आदेश में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित तिथि पर स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होने की स्थिति में यह माना जाएगा कि संबंधित व्यक्तियों को इस संबंध में कुछ नहीं कहना है और उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।
गवाह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट, वेतन रोकने के निर्देश
अदालत ने कहा कि निरीक्षक अवधेश कुमार को पूर्व में सम्मन तामील हो चुका था और वर्तमान तिथि के लिए जारी जमानतीय अधिपत्र भी उनके कार्यालय में दाखिल था। इससे उनके पास प्रकरण की जानकारी होने की बात सामने आती है। इसके बावजूद न्यायालय में उपस्थित नहीं होने पर उनके खिलाफ चार नवंबर 2026 के लिए गैर-जमानती अधिपत्र तथा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 350 के अंतर्गत नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया। न्यायालय में साक्ष्य देने तक उनका वेतन आहरित नहीं किए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पुलिस आयुक्त और इटावा के एसएसपी को भी निर्देश
न्यायालय ने पुलिस आयुक्त, लखनऊ को निर्देश दिया है कि संबंधित थाने द्वारा जमानतीय अधिपत्र की नियमानुसार तामील नहीं कराए जाने के मामले की जांच कराई जाए और निर्धारित तिथि से पहले जांच आख्या प्रस्तुत कराई जाए।
वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, इटावा को निर्देशित किया गया है कि वे अपने स्तर से आवश्यक विधिक आदेश जारी कर संबंधित गवाह की चार नवंबर को न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराएं। आदेश की प्रति कोषाधिकारी, इटावा को भी अनुपालन के लिए भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि यह मामला वर्ष 2013 की घटना से संबंधित है और वर्ष 2014 से विचाराधीन है। प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की धारा 364-ए, 302/34 और 201/34 के तहत आरोप दर्ज हैं। अदालत ने अभियोजन साक्ष्य के लिए अगली तारीख चार नवंबर 2026 निर्धारित की है।









