मां और बहनों पर कैंची से हमले के मामले में अमन रावत दोषी

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अपर सत्र न्यायाधीश रविन्द्र प्रसाद गुप्ता ने सुनाया फैसला

गजेन्द्र पटेल (विधि संवाददाता)

टेलीग्राम संवाद लखनऊ।मां और दो बहनों पर कैंची से हमला करने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कक्ष संख्या-17, लखनऊ की अदालत ने अमन रावत को दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 324 और 325 के तहत दोषसिद्ध किया, जबकि हत्या के प्रयास और गाली-गलौज के आरोपों से बरी कर दिया। न्यायालय ने मामले में अभियुक्त की स्वीकारोक्ति, घायलों की गवाही, चिकित्सीय साक्ष्यों और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद यह निर्णय सुनाया।

अपर सत्र न्यायाधीश रविन्द्र प्रसाद गुप्ता ने 16 अक्टूबर 2026 को निर्णय सुनाते हुए अमन रावत को तीन धाराओं में कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत के आदेश के अनुसार, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अभियुक्त पहले से जेल में बिताई गई अवधि का लाभ पाने का पात्र होगा।

नशे के लिए पैसे मांगने और हमले का था आरोप

अभियोजन के अनुसार, घटना 25 मार्च 2024 की सुबह करीब चार बजे लखनऊ के तेलीबाग स्थित कुबेर बगिया इलाके में हुई थी। आरोप था कि अमन रावत अपनी मां सरोज और बहनों रीमा व मोनी के पास पहुंचा और नशे के लिए पैसे मांगने लगा। पैसे देने से इनकार करने पर विवाद हुआ। मां के शोर मचाने पर बीच-बचाव के लिए आई दोनों बहनों पर कैंची से हमला किए जाने का आरोप लगाया गया था। घटना में तीनों को चोटें आई थीं और उन्हें उपचार के लिए सिविल अस्पताल ले जाया गया था।

मां सरोज की लिखित शिकायत पर पीजीआई थाने में मुकदमा अपराध संख्या 179/2024 दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद अमन रावत के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराओं 323, 324, 307 और 504 के तहत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था।

गवाही के दौरान परिवार ने किया था समझौता

मुकदमे की सुनवाई के दौरान मां सरोज और दोनों बहनों के बयान दर्ज किए गए। बहनों ने अदालत में अपने भाई के विरुद्ध कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाने और उसे क्षमा करने की बात कही। परिवार की ओर से समझौते से संबंधित दस्तावेज भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे। गवाहों के बयानों में घटना और चोटों को लेकर अलग-अलग बातें सामने आईं।

अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि घायलों को आई चोटें और अन्य साक्ष्य अभियुक्त की भूमिका की पुष्टि करते हैं। वहीं, बचाव पक्ष ने कहा कि घटना आपसी कहासुनी और हाथापाई का परिणाम थी तथा परिवार के बीच समझौता हो चुका है। बचाव पक्ष की ओर से यह भी बताया गया कि अभियुक्त ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कम से कम दंड दिए जाने की प्रार्थना की थी।

चिकित्सीय साक्ष्य भी बने सुनवाई का आधार

मुकदमे में चिकित्सक डॉ. एसके वर्मा ने घायलों की मेडिकल रिपोर्ट अदालत में प्रमाणित की। अभिलेखों के अनुसार, रीमा के पेट के दाहिने हिस्से में टांके लगा घाव था, जबकि मोनी के बाएं हाथ पर करीब नौ सेंटीमीटर का घाव था, जिसमें आठ टांके लगे थे। सरोज के शरीर पर भी कई चोटें दर्ज की गई थीं। अदालत ने मौखिक गवाही, चिकित्सीय रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया।

इन धाराओं में सुनाई गई सजा

न्यायालय के दंडादेश के अनुसार, अमन रावत को धारा 323 के तहत एक वर्ष का कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड, धारा 324 के तहत दो वर्ष का कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 325 के तहत दो वर्ष छह माह का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में संबंधित धाराओं के तहत अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है।

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