जज रविंद्र प्रसाद गुप्ता ने दुष्कर्म के दोषी शिवराम को सुनाई 10 साल की सजा

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  • लखनऊ की अदालत ने दुष्कर्म के मामले में एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया
  • धमकी देने का आरोप साबित न होने पर धारा 506 में किया दोषमुक्त
  • जुर्माने की 75 प्रतिशत राशि पीड़िता को मिलेगी

गजेन्द्र पटेल (विधि संवाददाता)

टेलीग्राम संवाद, लखनऊ।।रिश्तों की मर्यादा को तार-तार करने और महिला के साथ दुष्कर्म करने के मामले में लखनऊ की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए शिवराम उर्फ रज्जू को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-17, लखनऊ के न्यायाधीश रविन्द्र प्रसाद गुप्ता ने दोषसिद्ध अभियुक्त पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने जुर्माने की 75 प्रतिशत राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया है। हालांकि, जान से मारने की धमकी देने का आरोप पर्याप्त साक्ष्य से साबित नहीं होने पर अभियुक्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के आरोप से दोषमुक्त कर दिया गया।

सोते समय महिला के साथ दुष्कर्म का आरोप

अभियोजन के अनुसार, घटना 30 जून 2019 की रात करीब 12 बजे लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के जैतीखेड़ा गांव स्थित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) शिविर परिसर में हुई थी। पीड़िता अपने पति और बच्चे के साथ वहां रहकर मजदूरी करती थी। अभियुक्त शिवराम उसका चचिया ससुर था और उसी परिसर में काम करता था। आरोप था कि रात में पीड़िता के सोते समय अभियुक्त उसकी झुग्गी में घुस आया और उसका मुंह दबाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने घटना की जानकारी अपने पति को दी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और एक जुलाई 2019 को मुकदमा दर्ज कराया गया।

पीड़िता और पति की गवाही को माना विश्वसनीय

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसके पति महेंद्रपाल, चिकित्सक डॉ. अर्चना जैन, महिला आरक्षी सीता मौर्या और विवेचक के बयान दर्ज कराए। बचाव पक्ष ने स्वतंत्र गवाहों के अभाव, चिकित्सीय रिपोर्ट में चोट के निशान नहीं मिलने, डीएनए परीक्षण के अभाव और गवाहों के बयानों में अंतर का हवाला देते हुए अभियुक्त को झूठा फंसाए जाने की दलील दी।

अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में गवाहों की संख्या से अधिक उनके बयान की विश्वसनीयता और साक्ष्य की गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है। पीड़िता की गवाही और घटना के बाद उसके पति को दी गई जानकारी सहित उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने दुष्कर्म का आरोप संदेह से परे साबित माना। न्यायालय ने यह भी माना कि चिकित्सीय परीक्षण में चोट नहीं मिलने मात्र से अभियोजन का मामला खारिज नहीं किया जा सकता।

धमकी देने का आरोप नहीं हुआ साबित

अदालत ने साक्ष्यों के विश्लेषण में पाया कि पीड़िता की लिखित शिकायत में जान से मारने की धमकी देने का उल्लेख था, लेकिन न्यायालय में मुख्य परीक्षा और मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज बयान में इस तथ्य की पुष्टि नहीं हुई। इसी आधार पर अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत आरोप साबित नहीं माना और इस आरोप से अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया।

एक लाख रुपये जुर्माना, 75 प्रतिशत राशि पीड़िता को

12 अक्टूबर 2026 को दंड के प्रश्न पर सुनवाई के बाद अदालत ने शिवराम उर्फ रज्जू को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतने का आदेश दिया गया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अभियुक्त द्वारा पहले जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी। अर्थदंड की 75 प्रतिशत राशि पीड़िता को दी जाएगी। दोषसिद्ध अभियुक्त को सजा भुगतने के लिए जेल भेजने का आदेश भी दिया गया।

मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कमलेश कुमार सिंह और श्यामेन्द्र शुक्ला ने पैरवी की, जबकि अभियुक्त की ओर से पैनल अधिवक्ता आशीष कुमार जैन ने पक्ष रखा।

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