जस्टिस रवि कुमार दिवाकर की अदालत का बड़ा आदेश

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  • ड्रग्स केस में जब्त रकम रिलीज करने की अर्जी खारिज
  • पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई के निर्देश
  • मुजफ्फरनगर में एनडीपीएस एक्ट के मुकदमे से जुड़ा मामला
  • विशेष न्यायाधीश ने बरामदगी, विवेचना और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल

गजेन्द्र पटेल (विधि संवाददाता)

टेलीग्राम संवाद, मुजफ्फरनगर। एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में जब्त धनराशि को रिलीज कराने की मांग पर सुनवाई करते हुए मुजफ्फरनगर की विशेष अदालत ने अभियुक्त शाजेब उर्फ शाजेब सिद्दीकी की अर्जी खारिज कर दी। विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट एवं अपर सत्र न्यायाधीश, त्वरित न्यायालय संख्या-03 रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने अपने आदेश में मामले की बरामदगी, विवेचना और पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर टिप्पणियां की हैं। अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति उच्च पुलिस अधिकारियों और संबंधित प्राधिकारियों को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।

हाईकोर्ट के आदेश पर दोबारा हुई सुनवाई

मामला थाना कोतवाली नगर, मुजफ्फरनगर में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के मुकदमे से संबंधित है। अभियुक्त शाजेब उर्फ शाजेब सिद्दीकी ने जब्त धनराशि रिलीज कराने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इससे पहले उसकी अर्जी खारिज हो चुकी थी। इसके बाद अभियुक्त ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था।

आदेश के मुताबिक, हाईकोर्ट ने 24 सितंबर 2026 को पूर्व आदेश निरस्त करते हुए अभियुक्त को आवश्यक अभिलेखों के साथ दोबारा प्रार्थना पत्र देने का अवसर दिया था। साथ ही विचारण न्यायालय को निर्धारित अवधि में प्रार्थना पत्र का निस्तारण करने का निर्देश दिया गया था।

नशीले कैप्सूल और इंजेक्शन की बरामदगी का उल्लेख

अदालत ने बरामदगी संबंधी अभिलेखों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस के अनुसार, 2 फरवरी 2024 को अभियुक्त शाजेब और उसके साथियों को गिरफ्तार किया गया था। मामले में नशीले कैप्सूल, इंजेक्शन, दो कारों और नकदी की बरामदगी दर्शाई गई थी। आदेश में बरामद मादक पदार्थों की मात्रा को वाणिज्यिक मात्रा की श्रेणी में बताया गया है।

अभियोजन के अनुसार, अभियुक्तों ने नशीले कैप्सूल और इंजेक्शन की खरीद तथा अलग-अलग स्थानों पर आपूर्ति से संबंधित बातें बताई थीं। अदालत ने बरामदगी और विवेचना से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण करते हुए मामले के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया।

रकम को मादक पदार्थों के कारोबार से जोड़ने का आधार

अभियुक्त की ओर से दलील दी गई थी कि वह थोक में फलों की सप्लाई का कारोबार करता है और बरामद धनराशि उसके कारोबार की थी। उसने रकम रिलीज करने की मांग करते हुए अपने पक्ष में दस्तावेजों और अन्य तथ्यों का हवाला दिया।

दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने रकम को मादक पदार्थों के कारोबार से संबंधित बताते हुए उसकी रिहाई का विरोध किया। अदालत ने आदेश में बरामदगी के अभिलेखों, अभियुक्त के बयानों और प्रस्तुत दस्तावेजों पर विचार करने के बाद धनराशि रिलीज करने की अर्जी निरस्त कर दी।

पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी

आदेश का महत्वपूर्ण पहलू पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर की गई टिप्पणी है। अदालत ने बरामदगी और विवेचना से जुड़े तथ्यों के विश्लेषण के बाद तत्कालीन बरामदगीकर्ता उपनिरीक्षक विनोद कुमार, तत्कालीन विवेचक संजय गिरी, तत्कालीन थाना प्रभारी महावीर सिंह चौहान, तत्कालीन क्षेत्राधिकारी नगर व्योम बिंदल, तत्कालीन एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापति तथा तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह की भूमिका का उल्लेख किया है।

अदालत ने आदेश में इन अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई किए जाने के लिए आदेश की प्रति संबंधित उच्च अधिकारियों और प्राधिकारियों को भेजने के निर्देश दिए हैं। यह टिप्पणी न्यायिक आदेश का हिस्सा है; संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और किसी संभावित कार्रवाई का अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया के अधीन होगा।

एनडीपीएस एक्ट के उद्देश्य का भी किया उल्लेख

विशेष न्यायाधीश ने आदेश में एनडीपीएस एक्ट, 1985 के उद्देश्य और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार से समाज पर पड़ने वाले प्रभावों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि प्रतिबंधित पदार्थों का अवैध व्यापार केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी गंभीर दुष्प्रभाव उत्पन्न करता है।

अदालत ने अभियुक्त की धनराशि रिलीज कराने की अर्जी खारिज करते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई के लिए आदेश की प्रतियां संबंधित प्राधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया है।

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