- इंटरनेशनल दो दिवसीय International Soy Conclave इंदौर में शुरू
- उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए डॉ. आलोक मुखर्जी सम्मानित
टेलीग्राम संवाद
इंदौर।भारतीय सोयाबीन क्षेत्र को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और आर्थिक रूप से लाभकारी बनाने की दिशा में लीड्स कनेक्ट ने तकनीक आधारित कृषि समाधान और विश्वसनीय आंकड़ों की भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित किया है। इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव 2026
(International Soy Conclave) के पहले दिन कंपनी ने अपने ‘संकल्प’ (SANKALP) मंच के माध्यम से सोयाबीन की पूरी मूल्य श्रृंखला को समझने, फसल की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और आंकड़ों के आधार पर बेहतर निर्णय लेने की संभावनाएं प्रस्तुत कीं। कंपनी का जोर इस बात पर रहा कि कृषि में केवल आंकड़े जुटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सटीकता, विश्वसनीयता और व्यावहारिक उपयोगिता ही किसानों से लेकर प्रसंस्करण उद्योग और नीति-निर्माताओं तक के लिए वास्तविक बदलाव का आधार बन सकती है।
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) SOPA की ओर से आयोजित इस कॉन्क्लेव की थीम ‘आत्मनिर्भर भारत—तेल एवं प्रोटीन के विजन को सशक्त बनाना’ है। इसमें कृषि विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और सोयाबीन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। चर्चा के केंद्र में प्रौद्योगिकी आधारित कृषि, टिकाऊ सोयाबीन उत्पादन और भारत की खाद्य तेल एवं प्रोटीन सुरक्षा को मजबूत करने के उपाय रहे।


संकल्प मंच से सोयाबीन क्षेत्र को नई दिशा देने की पहल
कॉन्क्लेव के पहले दिन लीड्स कनेक्ट के डॉ. आलोक मुखर्जी की प्रस्तुति प्रमुख आकर्षण रही। उन्होंने ‘संकल्प’ मंच की अवधारणा और उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस तरह आधुनिक तकनीक, कृषि संबंधी जानकारी और विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों को एकीकृत करके सोयाबीन मूल्य श्रृंखला की गतिविधियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
इस मंच का उद्देश्य सोयाबीन उत्पादन से जुड़ी परिस्थितियों, फसल की स्थिति और मूल्य श्रृंखला के विभिन्न चरणों का समग्र आकलन करने में मदद करना है। इसके साथ ही फसल निगरानी रिपोर्ट और आंकड़ा आधारित विश्लेषण के जरिए कृषि संबंधी निर्णयों को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने की संभावनाओं को भी सामने रखा गया।
लीड्स कनेक्ट की यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब देश में खाद्य तेलों की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने, तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने और कृषि उत्पादकता में सुधार की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। ऐसे में विश्वसनीय जानकारी पर आधारित निर्णय किसानों, कृषि संस्थानों और उद्योग जगत के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

आंकड़ों की मात्रा नहीं, गुणवत्ता है असली ताकत
डॉ. आलोक मुखर्जी ने अपनी प्रस्तुति में स्पष्ट किया कि कृषि क्षेत्र में बड़ी मात्रा में आंकड़े एकत्र करना अपने आप में उपलब्धि नहीं है। उनकी गुणवत्ता, सटीकता और विश्वसनीयता अधिक महत्वपूर्ण है। कृषि संबंधी निर्णय तभी प्रभावी हो सकते हैं, जब उनके लिए इस्तेमाल की जाने वाली जानकारी वास्तविक परिस्थितियों को सही तरीके से दर्शाती हो और व्यावहारिक उपयोग के योग्य हो।
उन्होंने कहा कि फसल निगरानी का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इन आंकड़ों का विश्लेषण करके ऐसे निष्कर्ष निकालना जरूरी है, जिनसे फसल के स्वास्थ्य, खेतों की वास्तविक स्थिति, उत्पादकता और टिकाऊ कृषि पद्धतियों में सुधार किया जा सके।
इस दृष्टिकोण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण और आधुनिक तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। इनके प्रभावी इस्तेमाल से फसल संबंधी जानकारी को बेहतर तरीके से समझने और समय पर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए आंकड़ों की विश्वसनीयता और जमीनी परिस्थितियों से उनका मेल होना आवश्यक है।
खेत से बाजार तक 360 डिग्री दृष्टिकोण पर जोर
डॉ. मुखर्जी ने सोयाबीन क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 360 डिग्री दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि फसल का स्वास्थ्य, टिकाऊ उत्पादन, उत्पादकता में वृद्धि, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बाजार की जरूरतों को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़े पहलुओं के रूप में देखना होगा।
उनके अनुसार, तकनीक का लाभ केवल खेती के किसी एक चरण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, प्रसंस्करण उद्योगों, उद्योग संगठनों और नीति-निर्माताओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें फसल संबंधी विश्वसनीय जानकारी और आधुनिक विश्लेषण के आधार पर उत्पादन से लेकर बाजार तक बेहतर निर्णय लिए जा सकें। साथ ही, मूल्य श्रृंखला में होने वाले सुधारों का आर्थिक लाभ किसानों तक पहुंचे और सोयाबीन उत्पादन को दीर्घकालिक रूप से अधिक टिकाऊ बनाया जा सके।
उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए डॉ. मुखर्जी को सम्मान
डॉ. आलोक मुखर्जी की प्रस्तुति की गुणवत्ता और प्रासंगिकता को देखते हुए सोपा के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक ने उन्हें उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए पुरस्कार प्रदान किया। यह सम्मान कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित नवाचार, विश्वसनीय आंकड़ों और सोयाबीन मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए अपनाए जा रहे नए दृष्टिकोणों के महत्व को रेखांकित करता है।
कॉन्क्लेव के पहले दिन आयोजित सोपा पुरस्कार समारोह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभिन्न पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया। समारोह में सोयाबीन क्षेत्र से जुड़े योगदानों और उपलब्धियों को मान्यता दी गई।
उद्योग जगत के साथ संवाद और सहयोग पर भी जोर
कॉन्क्लेव में लीड्स कनेक्ट के उपाध्यक्ष राजीव अरोड़ा ने भी भाग लिया। इस दौरान उन्हें सोपा(SOPA)के अध्यक्ष डॉ. दविश जैन सहित उद्योग जगत की कई प्रमुख हस्तियों और प्रतिनिधियों से संवाद का अवसर मिला। उन्होंने केएन ग्रुप के कार्यकारी निदेशक संजय श्रीश्रीमल तथा इंडियन वेजिटेबल ऑयल्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी भावना शाह से भी मुलाकात की।
इन संवादों में भारतीय सोयाबीन एवं वनस्पति तेल क्षेत्र में हो रहे बदलावों, कृषि विकास में प्रौद्योगिकी की भूमिका और विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
तकनीक से किसानों तक लाभ पहुंचाने की रणनीति
अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव 2026 में लीड्स कनेक्ट की भागीदारी कंपनी के तकनीक आधारित कृषि समाधानों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित फसल निगरानी और आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने की व्यवस्था विकसित करने के प्रयासों को दर्शाती है। ‘संकल्प’ मंच और फसल निगरानी रिपोर्ट के जरिए कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि क्षेत्र में तकनीक का वास्तविक मूल्य तभी सामने आएगा, जब उसका इस्तेमाल जमीनी जरूरतों के अनुरूप किया जाए।
सोयाबीन की पूरी मूल्य श्रृंखला में बेहतर समन्वय, उत्पादन संबंधी जानकारी की सटीकता, प्रसंस्करण में मूल्य संवर्धन और बाजारोन्मुख रणनीतियां भारतीय तिलहन क्षेत्र को मजबूत करने में सहायक हो सकती हैं। लीड्स कनेक्ट की पहल इसी व्यापक लक्ष्य से जुड़ी है, जिसमें आधुनिक तकनीक को स्वस्थ फसलों, बेहतर कृषि परिणामों, टिकाऊ उत्पादन और किसानों के आर्थिक हितों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।









