ग्लैमर की चमक छोड़ सनातन सेवा की राह पर इशिका श्री महालक्ष्मी

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पवन सचदेवा

टेलीग्राम संवाद, बागेश्वर धाम/नई दिल्ली।अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं, फिल्मों और मनोरंजन जगत की चकाचौंध से अपनी पहचान बनाने वाली पूर्व मिस वर्ल्ड टूरिज्म इशिका तनेजा ( Miss World Tourism – Ishika Taneja)अब सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक साधना और समाज सेवा को अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। ‘श्री महालक्ष्मी’ और ‘इशिका श्री महालक्ष्मी’ के नाम से अपनी आध्यात्मिक पहचान प्रस्तुत कर रहीं इशिका की नई पहल का केंद्र बेटियों की शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, गोसेवा और सनातन संस्कारों का प्रसार है। मध्य प्रदेश में रीवा के निकट प्रस्तावित श्री महालक्ष्मी धाम इसी संकल्प की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके माध्यम से धार्मिक आस्था को सामाजिक दायित्वों से जोड़ते हुए शिक्षा, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और करुणा पर आधारित सेवा व्यवस्था विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

दिल्ली में पली-बढ़ीं और लंदन से शिक्षा प्राप्त करने वाली इशिका तनेजा ने सौंदर्य प्रतियोगिताओं के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। मिस वर्ल्ड टूरिज्म(miss world tourism ishika taneja) का खिताब हासिल करने के साथ वह मिस इंडिया प्रतियोगिता से भी जुड़ी रहीं। मनोरंजन जगत में उन्होंने फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर की फिल्म ‘इंदु सरकार’ सहित फिल्मों, वेब सीरीज और संगीत परियोजनाओं में काम किया। रणदीप हुड्डा और अर्जुन रामपाल जैसे कलाकारों के साथ काम करने तथा टी-सीरीज की संगीत परियोजनाओं से जुड़ने के कारण भी उन्हें पहचान मिली। इसके अतिरिक्त वह वस्त्र मंत्रालय और ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ से जुड़े अभियानों का हिस्सा रहीं।इशिका के नाम विभिन्न क्षेत्रों में तीन विश्व रिकॉर्ड दर्ज होने की बात भी सामने आई है। इनमें निर्भया और तेजाब हमलों से प्रभावित लोगों सहित पीड़ितों को समर्पित एक रिकॉर्ड शामिल है, जिसके लिए उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा सम्मानित किए जाने का उल्लेख है। अयोध्या के दीपोत्सव में सीता के स्वरूप में उनकी भागीदारी भी एक विश्व रिकॉर्ड से जुड़ी रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम से संबंधित पर्यटन और विदेश मामलों के विषयों में उनके योगदान को लेकर भी विश्व रिकॉर्ड का उल्लेख किया गया है।हालांकि, उपलब्धियों और लोकप्रियता के इस सफर के बीच उनके जीवन में अध्यात्म की ओर बढ़ने का एक नया अध्याय शुरू हुआ। महाकुंभ 2025 के दौरान प्रयागराज में अमृत स्नान के बाद उन्होंने सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक साधना को अपने जीवन में विशेष स्थान दिया। इसी क्रम में उन्होंने द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती से दीक्षा ली और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के अध्ययन की दिशा में आगे बढ़ीं।इशिका स्वयं को साध्वी या संन्यासिनी के बजाय सनातनी कहती हैं। उनका विचार है कि आधुनिकता और भारतीय संस्कृति एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। युवा पीढ़ी, विशेषकर बेटियां, अपने संस्कारों और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और रोजगार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर सकती हैं।

इशिका श्री महालक्ष्मी की आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख आधार ‘महालक्ष्मी भारत अभियान’ है। इसकी मूल अवधारणा ‘अष्टलक्ष्मी से राष्ट्र निर्माण’ पर आधारित है। मां लक्ष्मी के आठ स्वरूपों से जुड़ी धार्मिक मान्यता को शिक्षा, समृद्धि, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण जैसे विषयों से जोड़ने का प्रयास इस अभियान के माध्यम से किया जा रहा है।

फरवरी 2026 में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम के जरिए इस अभियान को व्यापक मंच मिला। इससे जुड़े आयोजनों में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, गजेंद्र सिंह शेखावत, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी इंद्रेश कुमार सहित विभिन्न सार्वजनिक हस्तियों की भागीदारी का उल्लेख किया गया है।अभियान से जुड़े संतों और धर्माचार्यों में स्वामी गोविंद देव गिरि, देवकीनंदन ठाकुर, सुधांशु जी महाराज, आचार्य बालकृष्ण, बाबा रामदेव, जून अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि तथा विश्व हिंदू परिषद के आलोक कुमार के नाम शामिल हैं।अभियान की सोच धार्मिक आस्था को पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय उसे जनकल्याण की गतिविधियों से जोड़ने की है। इस दृष्टिकोण में मां महालक्ष्मी के प्रति श्रद्धा का सामाजिक स्वरूप बेटियों को शिक्षा और सुरक्षा उपलब्ध कराने, महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने तथा जरूरतमंदों की सहायता करने में दिखाई देता है। प्रस्तावित श्री महालक्ष्मी धाम को इसी विचार का संस्थागत स्वरूप देने की योजना है।

मध्य प्रदेश में रीवा के निकट प्रस्तावित श्री महालक्ष्मी धाम को आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक सेवा के समन्वित केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। श्री महालक्ष्मी ट्रस्ट और श्री महालक्ष्मी वर्ल्ड फाउंडेशन के माध्यम से इन उद्देश्यों को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।प्रस्तावित धाम में श्री महालक्ष्मी गुरुकुल, श्री महालक्ष्मी कन्या अनाथालय और श्री महालक्ष्मी गौशाला स्थापित करने की योजना है। इन तीनों संस्थानों के जरिए शिक्षा, बालिका संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और बेसहारा गोवंश की देखभाल को प्राथमिकता देने की परिकल्पना की गई है।श्री महालक्ष्मी गुरुकुल की योजना इस पहल का विशेष आकर्षण है। इसमें बेटियों को सनातन संस्कारों के साथ आधुनिक शिक्षा देने की बात कही गई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई, रोबोटिक्स और आधुनिक तकनीक से जुड़े विषयों को भी शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने की परिकल्पना है। इसका उद्देश्य छात्राओं को अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हुए विज्ञान, तकनीक और रोजगार के बदलते अवसरों के लिए तैयार करना है।इशिका की सोच में संस्कार और आधुनिक शिक्षा के बीच कोई टकराव नहीं है। उनका मानना है कि बेटियों को भारतीय परंपराओं का ज्ञान देने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनने, अपने निर्णय स्वयं लेने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त अवसर भी मिलने चाहिए।

प्रस्तावित श्री महालक्ष्मी कन्या अनाथालय के माध्यम से कठिन परिस्थितियों से गुजर रही बच्चियों, बाल तस्करी और शोषण से प्रभावित बालिकाओं को सुरक्षित आश्रय, शिक्षा तथा बेहतर भविष्य उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इस परिकल्पना में केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भर जीवन की संभावनाओं को भी महत्व दिया गया है।महिला सशक्तिकरण के लिए कौशल प्रशिक्षण, आर्थिक प्रबंधन की जानकारी और रोजगार अथवा स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की योजना है। इस सोच के अनुसार महिलाओं को सशक्त बनाने का अर्थ केवल उनके अधिकारों की बात करना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता से जोड़ना भी है।इशिका का मानना है कि महिलाएं अपनी सांस्कृतिक पहचान और पारिवारिक मूल्यों से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा, तकनीक, व्यवसाय और रोजगार के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकती हैं। शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता को महिला सशक्तिकरण के प्रमुख आधार के रूप में देखा गया है।

सनातन परंपरा में गोसेवा का विशेष महत्व है। प्रस्तावित श्री महालक्ष्मी गौशाला के माध्यम से बेसहारा गायों, दूध न देने वाली गायों और नर गोवंश की देखभाल की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य ऐसे गोवंश को भी सुरक्षित आश्रय, भोजन और आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराना है, जिनकी जिम्मेदारी उठाना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है।बागेश्वर धाम प्रवास के दौरान इशिका श्री महालक्ष्मी ने वहां संचालित गौशाला और कैंसर अस्पताल से संबंधित सेवा गतिविधियों का भी अवलोकन किया। इस दौरान उन्हें धार्मिक आस्था के साथ करुणा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व को करीब से समझने का अवसर मिला।उनकी परिकल्पना में गोसेवा केवल धार्मिक विश्वास का विषय नहीं, बल्कि जीवों के प्रति संवेदनशीलता और उनकी देखभाल के दायित्व से भी जुड़ी है। श्री महालक्ष्मी धाम के माध्यम से इस भावना को व्यवस्थित सेवा गतिविधियों में बदलने का लक्ष्य रखा गया है।

बागेश्वर धाम में प्रस्तुत किया धाम का संकल्प

इसी उद्देश्य के साथ इशिका तनेजा 21 अक्टूबर 2026 को बागेश्वर धाम में आयोजित भारतीय सनातनी युवा शक्ति कॉन्क्लेव एवं अवॉर्ड्स 2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। डॉ. गौरव शर्मा और मनप्रीत कौर दीदी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया और श्री महालक्ष्मी धाम की परिकल्पना प्रस्तुत की।इस अवसर पर उन्होंने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को मां महालक्ष्मी का स्मृति-चिह्न भेंट किया। आयोजकों के अनुसार, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सनातन संस्कृति और समाज सेवा से जुड़े उनके प्रयासों की सराहना की। साथ ही मार्च में आयोजित होने वाले कन्या विवाह कार्यक्रम में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया गया।सम्मेलन में संत-महात्माओं, धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों और सामाजिक माध्यमों पर सक्रिय व्यक्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य सनातन परंपरा से जुड़े युवाओं तथा विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को एक मंच पर लाकर समाजहित में सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना था।

ग्लैमर से मिली पहचान को सेवा के उद्देश्य से जोड़ने की पहल

इशिका श्री महालक्ष्मी की यात्रा मनोरंजन जगत की उपलब्धियों से आध्यात्मिक साधना और समाज सेवा की ओर बढ़ते कदमों की कहानी है। सौंदर्य प्रतियोगिताओं, फिल्मों और सार्वजनिक गतिविधियों से मिली पहचान के बाद अब वह सनातन संस्कृति, ध्यान-साधना और सामाजिक कल्याण को अपनी गतिविधियों का प्रमुख आधार बना रही हैं।श्री महालक्ष्मी धाम की परिकल्पना इसी सोच का विस्तार है। इसमें बेटियों को शिक्षा और सुरक्षा, महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता तथा बेसहारा गोवंश को संरक्षण देने की योजना शामिल है। धार्मिक मूल्यों को सामाजिक जरूरतों से जोड़ने का यह प्रयास तभी व्यापक प्रभाव पैदा कर सकेगा, जब प्रस्तावित योजनाओं को पर्याप्त संसाधनों, पारदर्शी व्यवस्था और दीर्घकालिक प्रबंधन के साथ धरातल पर उतारा जाएगा।

फिलहाल, श्री महालक्ष्मी धाम की परिकल्पना सनातन संस्कृति, आधुनिक शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, कन्या कल्याण और गोसेवा को एक साथ जोड़ने वाली पहल के रूप में सामने आई है। इशिका श्री महालक्ष्मी का संदेश है कि आस्था का वास्तविक महत्व समाज के प्रति संवेदनशीलता और सेवा के संकल्प में भी दिखाई देना चाहिए। अब इस पहल की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि योजनाएं किस प्रकार मूर्त रूप लेती हैं और उनसे जरूरतमंदों को कितना प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।

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