जज रविंद्र प्रसाद गुप्ता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

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गजेन्द्र पटेल (विधि संवाददाता)

टेलीग्राम संवाद , लखनऊ। न्यायालय ने गोमतीनगर थाने से जुड़े एक आपराधिक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पुलिस अधिकारियों को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। अपर सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-17, लखनऊ रविंद्र प्रसाद गुप्ता ने माल मुकदमे से संबंधित चार्ज हस्तांतरित नहीं किए जाने और न्यायालय के समक्ष माल प्रस्तुत न होने के मामले को गंभीरता से लिया है। अदालत ने पुलिस उपायुक्त, पूर्वी कमिश्नरेट लखनऊ को निर्देश दिया है कि प्रकरण की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट की जाए और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

न्यायालय के 8 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार, सत्र परीक्षण संख्या 594/2016 तथा अपराध संख्या 593/2011, धारा 457, 380 और 413 भारतीय दंड संहिता के मामले में अभियोजन साक्ष्य के लिए कार्यवाही चल रही है। मामला सरकार बनाम अशोक यादव से संबंधित है। अदालत ने उल्लेख किया कि अभियोजन साक्षी निरीक्षक जयशंकर सिंह को समन तामील होने के बावजूद वह न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। अभियोजन पक्ष की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से साक्ष्य प्रस्तुत कराने की प्रार्थना भी की गई थी।

दो साल बाद भी चार्ज हस्तांतरण नहीं होने पर सवाल

आदेश में कहा गया है कि पूर्व में भी इस मामले में माल मुकदमे का चार्ज हस्तांतरित किए जाने के संबंध में निर्देश दिए गए थे। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत आख्या के मुताबिक, तत्कालीन हेड मोहर्रिर अवदेश कुमार सिंह का स्थानांतरण हरदोई जनपद हो गया था, लेकिन संबंधित माल मुकदमे का चार्ज पूरी तरह हस्तांतरित नहीं किया गया और माल भी न्यायालय में प्रस्तुत नहीं हुआ।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इस संबंध में पूर्व में पत्राचार किए जाने के बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। आदेश के अनुसार, थाना गोमतीनगर के प्रभारी निरीक्षक और पुलिस उपायुक्त, पूर्वी कमिश्नरेट की ओर से प्रस्तुत आख्या में भी चार्ज हस्तांतरण की स्थिति तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर स्पष्टीकरण अपेक्षित पाया गया।

पुलिस अधिकारियों से बिंदुवार जांच कर रिपोर्ट मांगी

न्यायालय ने निर्देश दिया है कि माल मुकदमे का चार्ज हस्तांतरित नहीं करने के संबंध में जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता अथवा भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत अभियोग पंजीकृत करने और विधिसम्मत कार्रवाई के पहलू पर भी विचार किया जाए। साथ ही, यह पता लगाया जाए कि संबंधित पुलिसकर्मियों के स्थानांतरण के बाद माल मुकदमे का चार्ज किसके पास रहा और अब तक आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

अदालत ने पुलिस उपायुक्त, पूर्वी कमिश्नरेट लखनऊ को निर्देशित किया है कि जांच के बाद विस्तृत अनुपालन आख्या 30 अक्टूबर 2026 को न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। आदेश की प्रति पुलिस उपायुक्त, पूर्वी कमिश्नरेट तथा पुलिस आयुक्त लखनऊ को भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निर्धारित तिथि पर अभियोजन साक्ष्य और माल मुकदमे से संबंधित कार्यवाही नियमानुसार आगे बढ़ाई जाए। मामले में अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

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