बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल के आवास पर जुटे जेपी नड्डा, केशव प्रसाद मौर्य, जयंत चौधरी और सुरेश खन्ना
- सुरेश खन्ना बोले- परियोजना देखने जरूर आएंगे
- ब्राजील की तकनीक से गोवंश संवर्धन और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की पहल
- तंजानिया के साथ सात हजार करोड़ रुपये के निवेश समझौते की भी दी जानकारी
टेलीग्राम संवाद
बरेली। बरेली में कृषि, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के जरिए औद्योगिक संभावनाओं को विस्तार देने की दिशा में बीएल एग्रो समूह की कामधेनु परियोजना ने देश और प्रदेश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व का ध्यान आकर्षित किया है। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी और प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने परियोजना की कार्यप्रणाली, आधुनिक पशुपालन तकनीक और उत्पादन क्षमता के बारे में विस्तार से जानकारी ली। गायों की प्रतिदिन 40 लीटर तक दूध देने की क्षमता की जानकारी पर नेताओं ने विशेष उत्सुकता दिखाई। कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने परियोजना का प्रत्यक्ष अवलोकन करने आने की इच्छा जताई, जबकि जेपी नड्डा ने परियोजना के प्रयासों की सराहना की।
राजेंद्र नगर स्थित बीएल एग्रो समूह के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल के आवास पर यह मुलाकात हुई। सभी प्रमुख नेता बरेली में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम से पहले उन्होंने खंडेलवाल आवास पर पहुंचकर परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान जलपान और भोजन के साथ पारिवारिक आत्मीयता का माहौल रहा। इसी मुलाकात के दौरान बीएल एग्रो समूह की कामधेनु परियोजना और उससे जुड़ी भविष्य की योजनाओं का प्रस्तुतिकरण भी किया गया।


ब्राजील की तकनीक से गोवंश संवर्धन की तैयारी
बीएल एग्रो समूह के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल ने बताया कि परियोजना में ब्राजील सहित अन्य देशों की आधुनिक पशुपालन तकनीकों और विशेषज्ञता का सहयोग लिया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्नत नस्ल के गोवंश का संवर्धन, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और पशुपालन को अधिक उत्पादक एवं व्यावसायिक बनाना है। उन्होंने बताया कि विदेश से विशेष भ्रूण तकनीक के माध्यम से केवल बछिया पैदा करने की व्यवस्था विकसित की गई है। इससे भविष्य में बेहतर दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली गायों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।
प्रबंध निदेशक आशीष खंडेलवाल ने बताया कि परियोजना में गायों की दुग्ध उत्पादन क्षमता 40 लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके अलावा प्राग देश की तकनीक हासिल करने की प्रक्रिया भी चल रही है। इसके माध्यम से भविष्य में दुग्ध उत्पादन क्षमता को 60 लीटर प्रतिदिन तक ले जाने की संभावना पर काम किया जा रहा है।

पशुपालन से किसानों की आय और रोजगार बढ़ाने की योजना
समूह प्रबंधन ने नेताओं को बताया कि आधुनिक पशुपालन तकनीक का लाभ केवल बड़े दुग्ध उत्पादकों तक सीमित रखने के बजाय किसानों तक पहुंचाने की योजना है। उन्नत नस्ल, वैज्ञानिक पशु प्रबंधन और अधिक दुग्ध उत्पादन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ पशुपालन, दुग्ध प्रसंस्करण, परिवहन और संबंधित सेवाओं में रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बरेली में आधुनिक तकनीक पर आधारित गोशाला और पशुपालन परियोजना संचालित होने पर प्रसन्नता जताई। वहीं, वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी लेने के बाद कहा कि वह एक दिन यहां आकर इसकी कार्यप्रणाली को नजदीक से समझेंगे।
तंजानिया के साथ सात हजार करोड़ रुपये के निवेश समझौते की जानकारी
बीएल एग्रो प्रबंधन ने शीर्ष नेताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समूह की निवेश योजनाओं से भी अवगत कराया। बताया गया कि तंजानिया के साथ लगभग सात हजार करोड़ रुपये के निवेश से संबंधित समझौता हुआ है। इस योजना में आवारा गोवंश के प्रबंधन और उनके बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई। समूह की ओर से इसे पशुपालन क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बड़े निवेश की संभावनाओं से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।

खंडेलवाल आवास पर राजनीतिक और औद्योगिक जगत का संगम
इस मुलाकात के दौरान राजेंद्र नगर स्थित डॉ. घनश्याम खंडेलवाल के आवास पर स्थानीय, क्षेत्रीय और प्रदेश स्तर के कई नेता एवं पदाधिकारी मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने आवास में रखे पियानो पर भी अपनी उंगलियां थिरकाईं। सभी प्रमुख नेताओं ने खंडेलवाल परिवार के साथ पारिवारिक तस्वीरें खिंचवाईं और भोजन किया।
इस मुलाकात को बरेली के औद्योगिक और व्यावसायिक परिदृश्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां बीएल एग्रो समूह ने कामधेनु परियोजना के माध्यम से आधुनिक पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग की संभावनाएं सामने रखीं, वहीं दूसरी ओर शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व को बरेली में विकसित हो रहे इस औद्योगिक प्रयास की जानकारी मिली।












