भारत में उच्चायुञ्चत अनिसा कपूफी मबेगा बीएल कामधेनु फार्म्स में आयोजित दो दिवसीय कैटल जीनोमिक्स समिट में पहुंचीं
आरबी लाल
बरेली। बीएल कामधेनु फार्म्स में आयोजित दो दिवसीय कैटल जीनोमिक्स समिट मंगलवार शाम संपन्न हो गया। समिट में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, पशु प्रजनकों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों ने जीनोमिक्स, आईवीएफ, एडवांस्ड सीक्वेंसिंग, जेनेटिक इवैल्यूएशन और डेटा आधारित ब्रीडिंग की संभावनाओं पर मंथन हुआ। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, उत्तर प्रदेश पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह और वनमंत्री अरुण कुमार सक्सेना भी शामिल हुए। समिट में तंजानिया की उच्चायुक्त अनिसा कपूफी मबेगा भी शामिल हुईं। इस मौके पर उन्होंने टेलीग्राम संवाद (हिंदी दैनिक) से खास बातचीत करते हुए कहा कि तंजानिया और भारत की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों देशों में छोटे और सीमांत पशुपालकों की बड़ी संख्या तथा जलवायु जोखिम जैसी समान चुनौतियां हैं। हमें पशुओं की तादाद बढ़ाने पर जोर नहीं देना है बल्कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नई तकनीक अपनाना जरूरी होगा।

विशेष बातचीत में भारत में तंजानिया की उच्चायुक्त अनिसा कपूफी मबेगा ने कहा कि तंजानिया में पशुपालन की तस्वीर बदल रही है। पारंपरिक चारागाह से स्मार्ट और जलवायु-अनुकूल तकनीक अपनाना आवश्यक हो गया है। उन्होंने बताया कि अफ्रीका में तंजानिया पशुधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण देशों में है। देश में लगभग 3.66 करोड़ मवेशी हैं और मवेशियों की संख्या के लिहाज से यह अफ्रीका में इथियोपिया के बाद दूसरे स्थान पर है। पशुधन क्षेत्र लगभग 46 लाख परिवारों को आजीविका से जोड़ता है और देश की लगभग एक-तिहाई आबादी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार/आय के अवसर प्रदान करता है। इसके बावजूद कम उत्पादकता, पशु रोग, चारे और पानी की कमी, जलवायु परिवर्तन तथा बाजार एवं बुनियादी ढांचे की सीमाएं इस क्षेत्र की क्षमता को प्रभावित करती हैं।

तंजानिया अब इस चुनौती का सामना केवल अधिक पशु पालकर नहीं, बल्कि बेहतर नस्ल, बेहतर पोषण, बेहतर स्वास्थ्य और डिजिटल तकनीक के माध्यम से करने की दिशा में बढ़ रहा है। तंजानिया में बड़ी संख्या में पशुपालक आज भी चरागाह आधारित व्यवस्था पर निर्भर हैं। विशेषकर शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में मवेशी, बकरी और भेड़ खुले चरागाहों पर निर्भर रहते हैं।
तंजानिया जैसे विशाल ग्रामीण क्षेत्र में मोबाइल तकनीक भी महत्वपूर्ण है। भविष्य की लाइवस्टोक सेवाओं में मोबाइल फोन के माध्यम से किसान को बीमारी संबंधी चेतावनी, मौसम की जानकारी, बाजार मूल्य, प्रजनन जानकारी और आधुनिक पशुपालन जैसी सेवाएं दी जा रही हैं। इससे पशु चिकित्सक और ग्रामीण पशुपालक के बीच दूरी कम की जा रही है।
उच्चायुञ्चत ने प्रश्नोîार में बताया कि तंजानिया में जलवायु परिवर्तन के साथ तालमेल जरूरी है। इसके प्रति विशेष संवेदनशीलता भी आवश्यक है। इसलिए वहां की नई रणनीति का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि लोचकता को बढ़ाना भी है।
उन्होंने बताया कि भारत तंजानिया से पशुपालन क्षेत्र में नई तकनीक और सीख ले सकता है। इसके तहत पशुओं की पहचान, डिजिटल हेल्थ और वैञ्चसीनेशन रिकार्ड बनाया जा सकता है। बड़े डेयरी फार्मों में सेंसर और एआई का इस्तेमाल कर दूध उत्पादन में वृद्घि संभव है।

उच्चायुक्त अनिसा कपूफी मबेगा टेलीग्राम संवाद में प्रकाशित समाचार देखती हुई
डिजिटल पहचान, सेंसर, जीपीएस, डेटा एनालिटिक्स, बेहतर नस्ल, कृत्रिम गर्भाधान, वैज्ञानिक चारा, टीकाकरण, पशु स्वास्थ्य निगरानी, जलवायु-स्मार्ट तकनीक जोड़कर एक नए प्रकार का पशुपालन मॉडल विकसित किया जा रहा है।
विशेष रूप से 2024-26 के सटीक पशुधन खेती कार्यक्रम से यह संकेत मिलता है कि तंजानिया अब पशुपालन को केवल ग्रामीण आजीविका के रूप में नहीं, बल्कि तकनीक, रोजगार, खाद्य सुरक्षा, निर्यात और जलवायु-सहिष्णु आर्थिक विकास के क्षेत्र के रूप में देख रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि तंजानिया का मॉडल हाई-टेक फार्मिंग और पारंपरिक ग्रामीण काव्य के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। यही पहलू इसे भारत जैसे बड़े पशुधन वाले देश के लिए विशेष रूप से अध्ययन योग्य बनाता है।पशुपालन में तादाद नहीं उत्पादन वृद्घि जरूरी तंजानिया पशुधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण देश तंजानिया अब पशुपालन को केवल ग्रामीण आजीविका के रूप में नहीं, बल्कि तकनीक, रोजगार, खाद्य सुरक्षा, निर्यात और जलवायु-सहिष्णु आर्थिक विकास क्षेत्र के रूप में देख रहा
- पशुपालन में तादाद नहीं उत्पादन वृद्धि जरूरी
- तंजानिया पशुधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण देश
- तंजानिया अब पशुपालन क्षेत्र में तकनीक, रोजगार, खाद्य सुरक्षा, निर्यात और जलवायु-सहिष्णु आर्थिक विकास में कर रहा उल्लेखनीय काम









