टेलीग्राम संवाद
बरेली । उत्तराखंड अल्मोड़ा जिला स्थित जागेश्वर धाम मंदिर गर्भगृह में राइफल धारी गनर मौजूदगी में हवन, पूजा-पाठ किया। इस पर विवाद हो गया जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बरेली आकर लिखित माफी मांगी है।सोमवार सुबह बरेली जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर मंदिर पूजा पाठ किया इस दौरान उनका गनर भी मौजूद रहा। फोटोग्राफी भी हुई जो मंगलवार में वायरल हो गई। उसके बाद कुछ पुजारियों ने विवाद खड़ा कर दिया। मामला पुरातत्व विभाग और अल्मोड़ा जिला प्रशासन तक पहुंचा।गर्भगृह में राइफलधारी मौजूदगी में पूजा पाठ करने संबंधी आपत्ति बाद एएसआई ने प्रवेश द्वार पर असलाह नहीं ले जाने का चेतावनी बोर्ड लगा दिया।

बरेली पहुंचकर जिलाधिकारी श्री सिंह ने बुधवार सुबह सार्वजानिक तौर पर हस्तलिखित माफी मांगी है जिसमें अपना और पत्नी का नाम लिखा है।माफीनामा में कहा है कि 29 जनवरी 2026 को मेरे पिताजी के देहावसान से पूर्व हम लोगों द्वारा जागेश्वर धाम सरकार में महामृत्युजंय जाप रखवाया गया था जिसको प्रातः आनलाइन दर्शन-पूजा-अर्चना करते थे। इसी बीच पूज्य पिताजी ने पार्थिव देह का त्याग कर दिया और उनकी आत्मा की शान्ति के लिये हवन-पूजन करने में सपत्नी छुट्टी लेकर जागेश्वर घाम गया था। संध्याकालीन पूजा-अर्चना के समय सिपाही कुछ पूजा-सामग्री लेकर अनजाने में अन्दर आ गया जिसे तत्काल बाहर कर दिया गया। दुख की पराकाष्ठा अनजाने में हुई इस गलती के लिये में हृदय से क्षमा प्रार्थी है तथा भगवान जागेश्वर धाम सरकार के चरणों में सिरझुका कर कर माफी मांगता हूँ तथा समस्त पुरोहित समाज, वा समस्त श्रद्धालु भक्तजनों से भी उस सिपाही द्वारा अनजाने में की गई गलती के लिये क्षमा प्रार्थी है। भविष्य में ऐसा कभी नहीं होगा।
जानकारी मिलने पर पंडित नवीन चंद्र भट्ट हनुमान, मनोज भट्ट, पूरन भट्ट, मुकेश भट्ट, गोपाल भट्ट, वसंत भट्ट आदि ने वीआईपी कल्चर पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि गर्भगृह में मोबाइल से फोटो और रील बनाने के अलावा असलहा लेकर पहुंचना बाबा के प्रत्ति आस्था को ठेस पहुंचाने जैसा है। पुजारियों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से इस तरह की घटनाओं पर सख्त प्रतिबंध लगाने और मंदिर के गेट पर चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग की है। उनका कहना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जागेश्वर धाम पहुंचे थे तो उनकी सुरक्षा में तैनात एसपीजी कमांडो गर्भगृह की दहलीज बाहर ही रुक गए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी भी कई बार जागेश्वर पहुंचकर पूजा-अर्चना कर चुके हैं। उनके सुरक्षाकर्मी भी बाहर ही रुक जाते हैं।










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