आतिशबाजी लाइसेंस में वसूली का खेल, सुरक्षा व्यवस्था पर चुप्पी:पुलिस की संस्तुति से शस्त्र लिपिक काउंटर तक कथित उगाही, एक आवेदन पर 20 हजार तक खर्च

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें


बरेली। दीपावली पर आतिशबाजी का बाजार सजने से पहले लाइसेंस प्रक्रिया में कथित वसूली और विभागीय मनमानी के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक दुकान का लाइसेंस बनवाने के लिए पुलिस चौकी से लेकर कलेक्ट्रेट स्थित शस्त्र लिपिक काउंटर तक आवेदनकर्ता को करीब 20 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। यह रकम लाइसेंस स्वीकृत होने के नाम पर नहीं, बल्कि पुलिस की संस्तुति और जांच प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर वसूली जा रही है। जान-पहचान होने पर रकम कम या शून्य होने का दावा भी किया जा रहा है, लेकिन शस्त्र लिपिक काउंटर पर किसी तरह की रियायत नहीं मिलने के आरोप हैं।


आतिशबाजी कारोबारियों के बीच चर्चा है कि अस्थायी दुकान और आतिशबाजी बाजार खोलने के लिए आवेदन करने के बाद पुलिस स्तर पर संस्तुति और जांच के नाम पर रकम खर्च करनी पड़ती है। आरोप है कि चौकी से लेकर संबंधित अधिकारियों तक आवेदन की प्रक्रिया में आर्थिक दबाव बनाया जाता है। कुछ कारोबारियों का दावा है कि परिचितों के आवेदन बिना अतिरिक्त खर्च के आगे बढ़ जाते हैं, जबकि अन्य को कथित तौर पर रकम देनी पड़ती है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए पुलिस और प्रशासनिक अभिलेखों की जांच जरूरी है।


अग्निशमन मुख्यालय की ओर से अपर पुलिस महानिदेशक पद्मजा द्वारा जारी पत्र में अस्थायी आतिशबाजी दुकानों के लाइसेंस की प्रक्रिया सरल बनाने पर जोर दिया गया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि क्लस्टर निर्धारण के समय अग्निशमन विभाग की आख्या प्राप्त होने के बाद प्रत्येक लाइसेंस धारक के लिए अलग-अलग आख्या लेने का औचित्य नहीं है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी के सुझाव और निर्देशों की प्रति सभी विक्रेताओं को अनुपालन के लिए उपलब्ध कराई जाए।
पत्र में कहा गया है कि इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की परिकल्पना साकार होगी और छोटे व्यवसायियों के उत्पीड़न की संभावना समाप्त होगी। इसके बावजूद कलेक्ट्रेट स्थित शस्त्र लिपिक काउंटर पर अलग-अलग दिशा-निर्देशों और कथित मनमानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कारोबारियों का आरोप है कि प्रक्रिया सरल करने के बजाय आवेदनकर्ताओं को अतिरिक्त औपचारिकताओं में उलझाया जा रहा है।.


शस्त्र लिपिक काउंटर से जारी दिशा-निर्देशों में दुकानों के सामने आतिशबाजी के डिब्बे एकत्र नहीं करने, ध्वनि मानकों का पालन करने और प्रतिबंधित आतिशबाजी का उत्पादन, बिक्री तथा प्रयोग रोकने की बात कही गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और संबंधित शासनादेशों के अनुपालन पर भी जोर दिया गया है।
निर्देशों के मुताबिक फुटकर आतिशबाजी लाइसेंस जारी करने से पहले आवेदकों से अग्निसुरक्षा व्यवस्था संबंधी प्रमाणपत्र प्राप्त करना और उन्हें अग्निशमन उपकरण चलाने की जानकारी देना जरूरी है। अस्थायी बाजारों के निर्माण में कपड़ा, टेंट और लकड़ी जैसी ज्वलनशील सामग्री का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
सवाल यह है कि जब सुरक्षा मानकों को लेकर इतने सख्त निर्देश हैं, तो क्या सभी दुकानों पर इनका वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित कराया जा रहा है? क्या निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित है या बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था की धरातलीय जांच भी हो रही है?


मनोहर भूषण इंटर कॉलेज परिसर में आतिशबाजी दुकानों की संख्या को लेकर भी गंभीर सवाल उठे थे। आरोप है कि पिछले वर्ष जहां 30 दुकानों की व्यवस्था निर्धारित थी, वहां 56 दुकानों के लाइसेंस जारी कर दिए गए। निर्धारित संख्या से अधिक दुकानें लगाने की अनुमति किस आधार पर दी गई, इसका जवाब संबंधित विभागों को देना चाहिए।
घनी आबादी के बीच आतिशबाजी दुकानों की संख्या बढ़ने से अग्निकांड की स्थिति में खतरा कई गुना हो सकता है। दुकानों के बीच निर्धारित दूरी, आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण, भीड़ नियंत्रण और भंडारण की व्यवस्था की जांच जरूरी है। वन मंत्री के आवास के आसपास भी आतिशबाजी बाजार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।


कारोबारियों के बीच चर्चा है कि लाइसेंस प्रक्रिया में कथित उत्पीड़न और रिश्वत मांगने की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई गई थी। दावा है कि संबंधित पत्रावली के निस्तारण के लिए फोन भी आया, लेकिन इसके बावजूद कुछ आवेदकों को लाइसेंस मिलने में देरी हुई। आरोप यह भी हैं कि कथित मांग पूरी होने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ी। इन दावों की पुष्टि शिकायतों, पत्रावलियों और कार्यालयीय अभिलेखों से की जानी चाहिए।


आतिशबाजी लाइसेंस प्रक्रिया में कथित वसूली, पुलिस संस्तुति के नाम पर खर्च, शस्त्र लिपिक काउंटर की कार्यप्रणाली और अग्निशमन विभाग के निरीक्षण को लेकर प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। मनोहर भूषण इंटर कॉलेज परिसर में स्वीकृत दुकानों की संख्या, जारी लाइसेंस, अग्निशमन निरीक्षण रिपोर्ट और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।यदि लाइसेंस प्रक्रिया में किसी कर्मचारी की ओर से अनुचित लाभ के लिए आवेदन रोका गया या सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर अनुमति दी गई है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। त्योहार के दौरान नागरिकों की सुरक्षा और छोटे कारोबारियों का उत्पीड़न रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

और पढ़ें