केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री राज भूषण चौधरी बरेली पहुंचे, कामधेनु में विदेशी गायों की देखीं प्रजातियां, सराहा प्रोजेक्ट, खिलाया गुड़ बीएल एग्रो चेयरमैन और एमडी आशीष खंडेलवाल ने आधुनिक डेयरी व अनुसंधान सुविधाओं से कराया अवगत, किया स्वागत
आर.बी. लाल
टेलीग्राम संवाद, बरेली। केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने कहा है कि बरेली में स्थापित लीड्स जेनेटिक्स फार्म भारत में अकेला ऐसा पशु पालन केंद्र है जहां पर विदेशी गायों के अलावा देशी प्रमुख प्रजातियां उपलब्ध हैं। इस प्रोजेक्ट से लोगों को सीधे रोजगार उपलब्ध हो रहा है। इसके अलावा दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में नई तकनीक भी लोगों तक पहुंचाई जा रही है। उन्होंने यहां पर साहीवाल, गिर, पुंगनूर जैसी प्रमुख प्रजातियां देखी जिनका उच्च तकनीक से पालन पोषण हो रहा है। मंत्री ने इस पशु पालन प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए कहा कि उनको पहली बार जानकारी मिली कि देश में ये पहला कामधेनु प्रोजेक्ट है। इस मौके पर उन्होंने विभिन्न प्रजापतियों की गायों को देखा और गुड़ भी खिलाया। उन्हें जानकारी दी गई कि कामधेनु फार्म में लगभग 800 विभिन्न नस्ल की गायों का संरक्षण एवं पालन किया जा रहा है। इनमें साहीवाल, गिर और पुंगनूर जैसी उच्च गुणवत्ता वाली भारतीय नस्लें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि देशी नस्लों का संरक्षण केवल जैव विविधता की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि दुग्ध उत्पादन, पशु स्वास्थ्य और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक आधारित पशुपालन भविष्य का सबसे तेजी से विकसित होने वाला कृषि आधारित उद्योग बन सकता है। यदि वैज्ञानिक प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण नस्लें और बेहतर विपणन व्यवस्था उपलब्ध हो तो पशुपालन ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ को और मजबूत करेगा। बरेली स्थित कामधेनु प्रोजेक्ट देखने आए केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री राज भूषण चौधरी ने बीएल एग्रो फैक्ट्री भी पहुंचे। वहां पर उनका चेयरमैन डा. घनश्याम खंडेलवाल, प्रबंध निदेशक आशीष खंडेलवाल तथा मानव संसाधन प्रबंधक अजय कुमार भट्ट, कामधेनु प्रोजेक्ट विशेषज्ञ आदि ने स्वागत किया। चेयरमैन डा. घनश्याम खंडेलवाल ने उनको कामधेनु प्रतिमा उपहार देकर शॉल उड़ाकर स्वागत किया। मंत्री ने इससे पहले कामधेनु प्रोजेक्ट परिसर में निर्मित राधा कृष्ण मंदिर में पहुंचकर दर्शन किए। वहां पर उनका तिलक लगाकर पुरोहित ने प्रसाद दिया

आशीष खंडेलवाल ने केंद्रीय मंत्री को कराया आधुनिक डेयरी एवं अनुसंधान सुविधाओं का अवलोकन

बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज प्रबंध निदेशक आशीष खंडेलवाल एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री का स्वागत किया और उन्हें फार्म की विभिन्न इकाइयों का भ्रमण कराया। इस दौरान पशुपालन, कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार, डेयरी प्रबंधन और अनुसंधान संबंधी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी गई। मंत्री ने प्रयोगशाला में कार्यरत विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों से वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा की।
निरीक्षण के दौरान केंद्रीय मंत्री को बताया गया कि फार्म में लगभग 800 देशी नस्ल की गायों का संरक्षण एवं पालन किया जा रहा है। इनमें साहीवाल, गिर और पुंगनूर जैसी उच्च गुणवत्ता वाली भारतीय नस्लें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि देशी नस्लों का संरक्षण केवल जैव विविधता की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि दुग्ध उत्पादन, पशु स्वास्थ्य और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक आधारित पशुपालन भविष्य का सबसे तेज़ी से विकसित होने वाला कृषि-आधारित उद्योग बन सकता है। यदि वैज्ञानिक प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण नस्लें और बेहतर विपणन व्यवस्था उपलब्ध हो तो पशुपालन ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ को और मजबूत करेगा।
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केंद्रीय मंत्री ने गायों को अपने हाथों से खिलाया चना-गुड़

फार्म भ्रमण के दौरान केंद्रीय मंत्री ने गायों को अपने हाथों से चना और गुड़ खिलाया तथा उनका स्नेहपूर्वक स्पर्श कर उनकी देखभाल की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने पशुओं के स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता के लिए अपनाई जा रही व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए इसे अन्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणादायी मॉडल बताया।
केंद्रीय मंत्री ने राधा-कृष्ण मंदिर में किया दर्शन

फार्म परिसर स्थित राधा-कृष्ण मंदिर पहुंचकर केंद्रीय मंत्री ने विधिवत पूजा-अर्चना की। मंदिर में प्रवेश से पहले उन्होंने घंटा बजाया और भगवान राधा-कृष्ण के दर्शन किए। उन्हें बताया गया कि मंदिर में स्थापित प्रतिमा एक ही पत्थर को तराशकर बनाई गई है, जिसकी उन्होंने विशेष सराहना की और भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक परंपरा के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
केंद्रीय मंत्री ने बेल का पौधा लगाकर दिया हरित विकास का संदेश

दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने फार्म परिसर में बेल का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने स्वयं फावड़े से गड्डा खोदा, पौधा लगाया और कंपनी के निदेशक आशीष खंडेलवाल के साथ उसमें पानी भी डाला। आशीष खंडेलवाल ने बताया कि बेल का फल गायों के लिए लाभकारी माना जाता है। इससे पाचन तंत्र को सहायता मिलती है, गर्मी के मौसम में राहत मिलती है और इसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है। उन्होंने बताया कि फार्म परिसर में ऐसे ही उपयोगी और औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जिनसे पशुओं के स्वास्थ्य को लाभ मिल सके।
वैज्ञानिक पशुपालन ही ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव: डॉ. घनश्याम खंडेलवाल
इस अवसर पर बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल ने कहा कि भारत की वास्तविक आर्थिक शक्ति उसकी कृषि और पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था में निहित है। यदि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और देशी नस्लों के संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाया जाए तो डेयरी एवं पशुपालन क्षेत्र ग्रामीण विकास का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि लीड्स जेनेटिक्स का उद्देश्य केवल उत्कृष्ट देशी नस्लों का संरक्षण करना नहीं, बल्कि किसानों और पशुपालकों को वैज्ञानिक तकनीक, बेहतर आनुवंशिकी और आधुनिक प्रबंधन उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादकता एवं आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है। डॉ. खंडेलवाल ने कहा कि केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी का संस्थान में आगमन हमारे प्रयासों के लिए प्रेरणादायी है। उनका मार्गदर्शन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि बीएल एग्रो समूह नवाचार, अनुसंधान और गुणवत्ता के बल पर भारतीय पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।
वैज्ञानिक पशुपालन और देशी नस्लों का संरक्षण ही ग्रामीण समृद्धि की असली ताकत है : आशीष खंडेलवाल
बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक आशीष खंडेलवाल ने कहा कि वैज्ञानिक पशुपालन, आधुनिक तकनीक और देशी नस्लों के संरक्षण का समन्वय ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि कामधेनु परियोजना में पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और प्राकृतिक पोषण को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी उद्देश्य से फार्म परिसर में बेल सहित अनेक औषधीय एवं उपयोगी पौधों का रोपण किया गया है। उन्होंने कहा कि बेल का फल विशेष रूप से गायों के लिए लाभकारी है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करने, गर्मी से राहत देने तथा प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है। केंद्रीय मंत्री ने परियोजना की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि वैज्ञानिक पशुपालन, आधुनिक डेयरी प्रबंधन और देशी नस्लों के संरक्षण जैसे प्रयास भारत के कृषि एवं डेयरी क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।










