घटिया सामग्री से बना रामगंगा नगर उपकेंद्र, जोड़ दीं दर्जन भर निजी कॉलोनियां

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बिजली विभाग ने टेकओवर किए बगैर शुरू करा दी सप्लाई

बरेली। करीब चार साल पहले बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने करोड़ों रुपये खर्च कर रामगंगा नगर क्षेत्र में बिजली उपकेंद्र तैयार कराया था। पूरा नेटवर्क सिस्टम तीन ठेकेदार फर्मों द्वारा तैयार किया गया, लेकिन चला एक भी दिन नहीं। पिछले माह जिले में आए तूफान और बारिश से बिजली सप्लाई नेटवर्क ध्वस्त हो गया। बिजली विभाग ने अपनी फजीहत छिपाने के लिए करीब दर्जन भर कॉलोनियां और कामर्शियल कनेक्शन जोड़ दिए। बिना हैंडेड टेकिंगओवर सप्लाई शुरू होते ही रामगंगा नगर में जगह-जगह केबल बॉक्स, भूमिगत लाइनें और अन्य उपकरणों ने जवाब देना शुरू कर दिया। लोगों में आक्रोश भड़का, जिसका सामना तत्कालीन चीफ इंजीनियर ने खुद किया।

बीडीए द्वारा घटिया सामग्री से तैयार कराया गया रामगंगा नगर बिजली उपकेंद्र पर 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। इस उपकेंद्र से संबंधित सप्लाई नेटवर्क में बेहद घटिया उपकरण लगाए। बिजली विभाग में फिर भी इससे सप्लाई देना शुरू कर दिया। फिर क्या था आए दिन बड़े फाल्ट होने लगे। करीब दो माह पहले 11 केवी व एलटी वर्टिकल सहायक अभियंता ने अपनी एक अंतरिक रिपोर्ट अधिशासी अभियंता को सौंपी, जिसमें कहा गया कि भूमिगत लाइनों में हर दिन फाल्ट, केबल बॉक्स फटने आदि समस्या आ रही है। सहायक अभियंता ने अपने पत्र लिखा है फीडर पर
अधिकतम भार 120 एम्पीयर चल रहा है। फिर भी फाल्ट हो रहे हैं, क्योंकि करीब 17 किलोमीटर अंडरग्राउंड केबल बेहद घटिया है। बार-बार फाल्ट होने से उसे मेंटेन करना मुश्किल है। मेन पावर भी कम है। उपभोक्ता परेशान हैं। सहायक अभियंता ने लिखा है केबल बॉक्स प्रापर फिलिंग न कर सिर्फ छीलकर लगाए हुए हैं। सहायक अभियंता ने अपने पत्र में क्षतिग्रस्त अंडरग्राउंड केबल का ब्योरा भी दिया है।

अपने सहायक अभियंता की आंतरिक रिपोर्ट नजरअंदाज करते हुए अफसरों ने बिजली अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से बीडीए द्वारा तैयार किया गया बिजली सप्लाई नेटवर्क अपनी देखरेख में ले लिया। हालांकि कागजी तौर पर इसे टेकओवर नहीं किया गया है। बताया जाता है बीडीए ने जब दबाव दिया तब बिजली विभाग ने नेटवर्क टेकओवर करने संबंधी पत्राचार शुरू कर दिया, लेकिन बिजली विभाग अधिकारियों ने दर्जनों खामियां इसमें गिना दीं। ये खामियां परीक्षण दौरान ही सामने आई थीं।

बताया जाता है कि तत्कालीन चीफ इंजीनियर ज्ञान प्रकाश ने स्टेट्स रिपोर्ट मांगी तब अधिकारियों ने साफ कह दिया कि बीडीए द्वारा तैयार किया गया बिजली सप्लाई नेटवर्क इस्तेमाल करने योग्य नहीं है। इसके बावजूद चीफ इंजीनियर कार्यालय ने लगातार दबाव बनाया कि किसी तरह बीडीए से रामगंगा नगर बिजली उपकेंद्र टेकओवर कर लिया जाए, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में हो रहा बिजली संकट दूर हो सके। विभागीय सूत्रों ने बताया कि करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक लागत से बने बिजली उपकेंद्र टेकओवर करने के नाम पर 03 प्रतिशत कमीशन मांगा गया। किसी तरह यह 02 प्रतिशत पर आया और गुपचुप तरीके से रामगंगा नगर बिजली उपकेंद्र से सप्लाई लेना शुरू कर दी। जैसे ही उपकेंद्र चालू हुआ धड़ाधड़ फाल्ट होना शुरू हो गए। आज भी यह उपकेंद्र सही काम नहीं कर पा रहा है।


अवैध रूप से इन्हें जोड़ दिया

बताया जाता है कि बिजली विभाग ने रामगंगा नगर उपकेंद्र से अवैध तरीके से विभिन्न कालोनियां और कॉमर्शियल कनेDशन जोड़ दिए। जिससे नेटवर्क अभी भी नहीं चल पा रहा है। बताया जाता है विभाग ने जेएचएम, साईं, मेगा मेंशन, रॉयल रेजीडेंसी, गिरिराज पुरम, जॉय, ऑरा, जेएचएम सेDटर एस, अमृतवाड़ा, सूर्य, उदय कालोनियों के साथ ही रजवाड़ा बारातघर समेत कई कॉमर्शियल कनेशन भी जोड़ दिए। जिससे घटिया सामग्री द्वारा बनाए गए रामगंगानगर बिजली सप्लाई नेटवर्क और उपकेंद्र लोड नहीं संभाल पा रहा है। आये दिन बड़े फाल्ट होना आम बात हो गई है।


बीडीए ने अपने खर्च पर रामगंगानगर बिजली घर और सप्लाई इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराया है। जिस पर भारी भरकम धनराशि खर्च हुई है। बिना अनुमति बिजली विभाग द्वारा इसका इस्तेमाल अपने विभागीय कनेक्शनों के लिए कर लिया जो अनुचित है। बिजली सप्लाई नेटवर्क बीडीए ने अपने निर्माण क्षेत्र में इस्तेमाल के लिए तैयार किया है। अन्य कनेक्शन इससे नहीं जोड़े जा सकते। पूरे मामले को हम दिखवाएंगे।

वंदिता श्रीवास्तव, सचिव, बीडीए

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