उद्योग और शिक्षाक्षेत्र में नई पहल
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ ने दी अकादमिक जिम्मेदारी
नवाचार, कृषि-उद्यमिता और स्किल आधारित शिक्षा को मिलेगा नया आयाम
टेलीग्राम संवाद
मेरठ/बरेली। भारत में नई शिक्षा नीति (NEP-2020) तहत उद्योग और शिक्षा के बीच मजबूत साझेदारी स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ ने बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज प्रबंध निदेशक आशीष खंडेलवाल ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ नियुक्त किया है। नियुक्ति केवल एक औपचारिक अकादमिक निर्णय नहीं, बल्कि भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था, उद्योग जगत और उच्च शिक्षा संस्थान बीच बढ़ते सहयोग का प्रतीक मानी जा रही है।
कृषि क्षेत्र उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि वैल्यू एडिशन, फूड प्रोसेसिंग, सप्लाई चेन, निर्यात और तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रहा है। ऐसे समय में उद्योग जगत के अनुभवी नेतृत्व को विश्वविद्यालयों से जोड़ना छात्रों को वास्तविक व्यावसायिक अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में एक प्रभावी पहल है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस नियुक्ति को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बताया है।

आशीष खंडेलवाल, प्रबंध निदेशक बीएल एग्रो
आशीष खंडेलवाल, प्रबंध निदेशक बीएल एग्रो देश प्रतिष्ठित कृषि व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग समूह बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज नेतृत्व करेंगे। उनके नेतृत्व में कंपनी ने खाद्य तेल, कृषि उत्पाद प्रसंस्करण, गुणवत्ता प्रबंधन, तकनीकी नवाचार तथा वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धात्मक पहचान स्थापित करने की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उद्योग जगत में उनके अनुभव का लाभ अब विश्वविद्यालय विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को भी मिलेगा।’प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ रूप में आशीष खंडेलवाल विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि उद्योग की वास्तविक चुनौतियों, बाजार की बदलती आवश्यकताओं, कृषि आधारित स्टार्टअप, नवाचार, उद्यमिता, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण और आधुनिक औद्योगिक प्रक्रियाओं से भी परिचित कराएंगे। इससे विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों की रोजगार क्षमता और व्यावहारिक दक्षता दोनों में वृद्धि होने की संभावना है।
नई शिक्षा नीति का प्रमुख उद्देश्य शिक्षा को रोजगारोन्मुख, कौशल आधारित और उद्योग से जोड़ना है। इसी सोच के तहत देश के विभिन्न विश्वविद्यालय अनुभवी उद्योग विशेषज्ञों को ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के रूप में जोड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अकादमिक शोध को व्यावसायिक उपयोगिता मिलेगी तथा उद्योगों की वास्तविक समस्याओं पर आधारित अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। कृषि क्षेत्र में यह मॉडल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की बड़ी आबादी आज भी कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है।

विश्वविद्यालय ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि आशीष खंडेलवाल का नेतृत्व, औद्योगिक विशेषज्ञता और दूरदर्शी सोच विश्वविद्यालय में अकादमिक-उद्योग सहयोग (Academia-Industry Collaboration), नवाचार, उद्यमिता और अनुभवात्मक शिक्षा (Experiential Learning) को नई दिशा प्रदान करेगी। यह साझेदारी विद्यार्थियों को उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करने में सहायक होगी।
आर्थिक दृष्टि से भी यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष बल दे रही है। ऐसे में विश्वविद्यालयों और निजी उद्योगों के बीच सहयोग से कृषि अनुसंधान का व्यवसायीकरण तेज होगा, किसानों के लिए नई तकनीकों का विकास होगा तथा कृषि आधारित स्टार्टअप और एग्री-बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि विश्वविद्यालय इसी प्रकार उद्योग जगत से अनुभवी पेशेवरों को अपने साथ जोड़ते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि शिक्षा वैश्विक मानकों के अनुरूप अधिक व्यावहारिक और परिणामोन्मुख बन सकेगी। इससे न केवल छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे बल्कि कृषि क्षेत्र में निवेश, नवाचार और रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे। नियुक्ति इस बात का संकेत है कि भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था अब पारंपरिक शिक्षण मॉडल से आगे बढ़कर ज्ञान, कौशल और उद्योग अनुभव के समन्वित मॉडल की ओर अग्रसर है। कृषि शिक्षा और उद्योग बीच बढ़ती साझेदारी भविष्य में आत्मनिर्भर भारत, कृषि आधारित आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।









