बिजली अफसरों ने ट्यूलिप कनेक्शन में किया खेल, नियम हो गए फेल

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प्रशासन और चीफ इंजीनियर तक पहुंचा मामला, जांच शुरू

बरेली। बिजली विभाग में सब कुछ संभव है। अगर आपकी जेब में पैसा और थोड़ा से प्रभाव है। यानी पैसा फेंको और मनमर्जी से काम कराओ। इसके आगे तमाम अफसर जो ईमानदारी का लवादा ओढ़े घूमते हैं वे भी आपके इशारे पर काम करेंगे। घरेलू या जरूरतमंद नया कनेक्शन पाने के लिए चक्कर लगाता रहता है, जबकि बिल्डर अफसरों को अपनी अंगुली पर नचाता है। बिजली सप्लाई समस्या से पब्लिक त्राहि-त्राहि कर रही है, वहीं पर पीलीभीत बाईपास स्थित ट्यूलिप परिसर में वर्षों से विभागीय अधिकारी मेहरवान हैं। मल्टी स्टोरी आवासीय व कामर्शियल ट्यूलिप भवन सरकारी सिस्टम से रोशन हो रहा है। मामला जिला प्रशासन और चीफ इंजीनियर तक पहुंचा तब खलबली मच गई। जांच भी शुरू हो गई है।

विभागीय अभिलेखों अनुसार ट्यूलिप आवासीय परिसर में कनेक्शन देने के लिए बिल्डर ने करीब डेढ़ दशक पहले आवेदन किया था। बिजली विभाग ने कनेक्शन स्वीकृत कर दिया और सनसिटी विस्तार से ट्यूलिप आवासीय परिसर तक स्वतंत्र लाइन बनाने की अनुमति दे दी। स्वतंत्र लाइन बिल्डर ने अपने खर्चे पर बनवाई। करीब ढाई किलोमीटर लाइन बनाने का सुपरविजन चार्ज आदि विभाग ने वसूला। कुछ वर्षों यह स्वतंत्र फीडर चालू स्थिति में रहा। करीब 10 साल से लाइन हिचकोले ले रही है। बिल्डर ने गुहार लगाई कि उसकी सप्लाई दुरुस्त की जाए। विभाग ने कह दिया कि स्वतंत्र लाइन रखरखाव और अनुरक्षण आदि की जिम्मेदारी बिल्डर की है। यहीं से शुरू हो गया पैसे का खेल।

बताया जाता है कि बिजली अफसरों ने लंबा चौड़ा एस्टीमेट थमा दिया। फिर क्या था बिल्डर लाखों रुपये का एस्टीमेट देकर बगलें झांकने लगा। उसने अफसर से पूछा कि इसका कोई और रास्ता हो तो बताएं। ईमानदार अफसरों ने बहुत सीधा रास्ता बताया कि अपनी स्वतंत्र लाइन से सप्लाई लेने की जगह सनसिटी विस्तार उपकेंद्र से कनेक्शन जुड़वा लें। इसके लिए आवेदन करें बाकी ऊपर से नीचे तक देखना हमारा काम है। फिर क्या था सौदा तय हो गया। बिल्डर ने हामी भर दी और ट्यूलिप परिसर कनेक्शन सनसिटी बिस्तार से जोड़ दिया गया, जो आज भी बदस्तूर चल रहा है।

बिजली विभाग में नियम है कि अगर 500 या इससे अधिक किलोवाट कनेक्शन चाहिए तब इसके लिए अपना लाइन नेटवर्क बनाना होगा। इससे नीचे क्षमता वाले कनेक्शन विभाग अपने नेटवर्क से देता है। ट्यूलिप परिसर में करीब 1200 किलोवाट क्षमता वाला कनेक्शन मांगा गया था। विभाग ने इसे नियमानुसार बिल्डर खर्चे पर नेटवर्क तैयार कराया और सप्लाई कनेक्शन सिंगल प्वाइंट पर दिया। सिंगल प्वाइंट यानी पूरे परिसर का कनेक्शन और उसका नंबर एक ही होगा। एक ही बिल जारी होता है। इसकी वसूली भी सिंगल बिल पर ही होती है। ऐसे कनेक्शनों वाले परिसर में बिल्डर द्वारा आवासों में रहने वाले लोग अथवा दुकानदारों से वसूली होती है। सब-मीटर भी वह खुद लगवाता है।

बताया जाता है बिल्डर द्वारा ट्यूलिप परिसर में संचालित कनेक्शन हेतु तैयार कराई गई लाइन करीब 10 साल से बंद पड़ी है। जगह-जगह क्षतिग्रस्त भी हो चुकी है। ओवरहेड लाइन कई जगह से चोरी भी हो गई। आरोप है तत्कालीन अधिशासी अभियंता गौरव शुक्ला ने बिल्डर की सहायता करते हुए सप्लाई सनसिटी विस्तार उपकेंद्र से जोड़ दी। इसका मौजूदा लोड 1160 किलोवाट बताया जाता है। सवाल यह है कि इतना भारी भरकम कनेक्शन सरकारी सिस्टम नेटवर्क पर कैसे चल रहा है। फिर भी सब मौन साधे हुए हैं। हर महीने हजारों रुपये विभाग अपने लाइन नेटवर्क पर मेंटीनेंस और रखरखाव पर खर्च करता है, जिसका फायदा बिल्डर को मिल रहा है। ट्यूलिप परिसर में करीब 250 आवास बताए जाते हैं, जबकि ग्राउंड फ्लोर पर व्यवसायिक गतिवधियां अलग से संचालित हैं।

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