हर दिन करोड़ों का धंधा, बिना लाइसेंस पकड़े गए तीन ब्रांड
न्यूट्री गोल्ड, विता गोल्ड व चार मीनार ब्रांड 249 टिन सीज
अवैध निर्माण और रिपैकिंग की शिकायत पर हुई छापामारी
टेलीग्राम संवाद
बरेली। बरेली समेत कई जिलों में बड़े स्तर पर एडिवल ऑयल अवैध रूप से तैयार कर रिपैक हो रहा है। पैकिंग में खाद्य तेल की गुणवत्ता क्या है इसका भी किसी को अंदाजा नहीं। कारोबारी अपने हिसाब से एक्सपायरी डेट और वजन लिखकर बाजार में हर दिन करोड़ों का माल खपा रहे हैं। अवैध रूप से निर्माण और रिपैकिंग संबंधी शिकायत सहायक आयुक्त बरेली मंडल खाद्य सुरक्षा व आषधि प्रशासन संदीप चौरसिया तक पहुंची। उन्होंने तत्काल जीएसटी और विभागीय टीम गठित कर दी। उनके निर्देशन में टीम ने संयुक्त कार्रवाई कर बड़ा घोटाला पकड़ा। छापा टीम ने मौके पर 249 टीन सीज कर दिए। संबंधित कारोबारी एक भी अभिलेख, लाइसेंस आदि नहीं दिखा पाया।

शुक्रवार दोपहर एफएसडीए और जीएसटी टीमों ने संयुक्त रूप से मठ चौकी क्षेत्र में छापा कार्रवाई कर अवैध रूप से रिपैक हो रहे न्यूट्री गोल्ड, विता गोल्ड व चार मीनार सोयाबीन रिफाइंड उत्पाद मौके पर पकड़े। छापा टीम ने पैकिंग टिन पर देखा तब उसमें निर्माता और पैकिंग करने वाले का नाम गोयल फूड्स बरेली लिखा था। यानी कारोबारी ने जानबूझकर अधूरा पता पैकिंग पर छापा था। कारोबार स्थल का लाइसेंस गोयल फूड्स ब्रह्मपूरा प्रेमनगर बरेली नाम से बना हुआ है। लेकिन वहां पर वर्तमान में कोई कार्य नहीं किया जा रहा था, बल्कि अवैध रूप से स्थान परिवर्तन कर मठ चौकी कार्य स्थल बना लिया था।

जिला अभिहीत अधिकारी राहुल सिंह नेतृत्व में विभागीय टीम मौके पर पहुंची। टीम ने गोयल फूडस गोदाम का निरीक्षण किया। मौके पर खाद्य कारोबारी से जीएसटी और एफएसडीए टीम ने कारोबार संबंधी कागजात तलब किए, लेकिन वह गोदाम व फूड लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका। मौके पर सोयाबीन रिफाइंड तेल चारमीनार ब्रांड (15 किलो) 153 , न्यूट्री गोल्ड ब्रांड 53 तथा विता गोल्ड ब्रांड 43 टिन मिले। इन सभी ब्रांडों का मौके पर एक-एक नमूना लिया गया, जिसकी जांच लैब में होगी।
छापा टीम ने देखा लेबल पर निर्माता व पैकर का नाम पता पूरा नहीं था, केवल गोयल फूड्स बरेली लिखा था। बैच नंबर भी नहीं लिखा था, जिससे टीम ने सभी 249 टिन सीज कर दिए। जिनकी कीमत 5,59,350 रुपये बताई जाती है। विभागीय टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुशील सचान, जितेन्द्र कुमार आदि शामिल रहे।

बाजार में बढ़ती मांग से मिलावट को बढ़ावा
बाजार में खाद्य तेलों की बढ़ती मांग को देखते हुए नामी गिरामी कई बड़े ब्रांड भी उपभोक्ताओं के साथ धोखा करने में पीछे नहीं हैं। पिछले दिनों एफएसडीए लैब से आई रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया, जिसमें रविंद्रा नामक कच्ची घानी सरसों तेल भी शुद्ध नहीं पाया गया। बताया जाता है कि रिपोर्ट में रविंद्रा ब्रांड खाने योग्य नहीं माना गया। विभाग ने फेल हुए नमूने का उत्पाद बाजार से तत्काल वापस करने के आदेश पारित किए। कंपनी द्वारा माल वापस नहीं किया गया, बल्कि लुका छिपी कर उसे खपा दिया गया। ऐसे मामले अमरोहा, संभल, चंदौसी, मुरादाबाद आदि क्षेत्रों में सामने आए। ज्यादातर जिलों में विभागीय मिलीभगत से कंपनियों ने असुरक्षित खाद्य तेल बाजार में बेंच दिया।

रविंद्र तेल नमूने में हुआ था फेल, फिर भी बाजार में खपाया
खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन विभाग आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने कार्यभार संभालते ही खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया, जिसके तहत प्रदेश भर में पिछले दिनों खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) छापा टीमों ने सभी प्रमुख खाद्य तेल उत्पादक इकाइयों पर छापामार कार्रवाई कर करीब पांच दर्जन सैंपल भरे थे। इनकी जांच रिपोर्ट सामने आने पर हड़कंप मच गया है। क्योंकि (एफएसडीए) आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने 14 फर्मे प्रतिबंधित कर दी हैं। यानी इन फैक्ट्रियों में खाद्य तेल उत्पादन और पैकिंग कार्य बंद कर दिया है। लैब से आई जांच रिपोर्ट में नामचीन ब्रांड रविंद्रा, बाबर्ची, राधा गोल्ड, तीन इक्का जैसे कई नामचीन कच्ची घानी सरसों तेल असुरक्षित और अधोमानक पाए गए हैं। असुरक्षित का मतलब खाने योग नहीं। विभिन्न टीमों द्वारा अलसी और तिल खाद्य तेल जांच में खरे नहीं उतरे हैं। मंतोरा आयल प्रोडक्ट कानपुर द्वारा तैयार किया गया ब्रांड बाबर्ची कच्ची घानी सरसों तेल अनसेफ (खाने योग्य नहीं) पाया गया है। इसी फैक्ट्री द्वारा सुल्तान एक्टिव नाम से बिकने वाला राइस ब्रान खाद्य तेल सुरक्षित नहीं मिला। कच्ची घानी सरसों तेल रविंद्रा ब्रांड, केएल वेजिटेबल ऑयल द्वारा बनाया जाता है। इसके नमूने भी लैब में फेल हो गए हैं। टीम ने इस फैक्ट्री से पांच नमूने कच्ची घानी तेल लिए थे, जो सभी जांच में मानक के विपरीत पाए गए।मेरठ स्थित फैक्ट्री से लिए गए डबल डायमंड सरसों कोल्हू, राधा गोल्ड, सुगंध सोयावीन तेल, तीन इक्का नमूने भी सबस्टैंडर्ड और अनसेफ श्रेणी में पाए गए। ज्यादातर जिलों में खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन विभाग अधिकारियों ने अनसेफ और सबस्टैंडर्ड मिले खाद्य तेलों के ब्रांड बाजार से वापस नहीं कराए। बताया जाता है कंपनियों ने दो माह पहले विभागीय मिलीभगत से खराब माल बाजार में बेंच दिया।

खाद्य तेल कारोबारियों को दिए थे निर्देश
रविंद्रा कच्ची घानी सरसों तेल आदि ब्रांड नमूने लैब में मानक पर खरे न उतरने पर एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने कारोबारियों को निर्देश दिए थे कि सूचीबद्ध उत्पादों (खाद्य तेलों और वसा) का निर्माण, बिक्री और वितरण तत्काल प्रभाव से बंद कर दें। उन्होंने कहा अपने पास मौजूद स्टॉक की स्थिति की जानकारी संबंधित ‘पदनामित अधिकारी’ को 48 घंटों के भीतर दें। उन्होंने कहा था असुरक्षित उत्पाद को बाजार से वापस (Recall) मंगाया जाए। इसे तत्काल प्रभावी माना जाए। पदनामित अधिकारी और खाद्य सुरक्षा अधिकारी इस आदेश अनुपालन को सुनिश्चित करने तथा सूचीबद्ध फर्मों/कंपनियों/विनिर्माण इकाइयों के खाद्य पदार्थों (खाद्य तेलों और वसा) आगे और प्रसार को रोकने हेतु कड़ी निगरानी रखेंगे। उन्होंने कहा था आदेश सार्वजनिक हित में एक एहतियाती रूप में जारी किया गया है।













