एफएसडीए टीम ने भरे थे सैंपल, जांच में अधोमानक और अनसेफ मिले
सैंपल विश्लेषण पर उठे सवाल, तेल में लैड कहां से आया
फैक्ट्री बंद, फिर भी हो गई सैंपलिंग, लैब में तेल फेल
आर.बी. लाल
टेलीग्राम संवाद, बरेली। खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी पर केंद्र और राज्य सरकार बेहद संवेदनशील होती नजर आ रही हैं। पिछले दिनों खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) छापा टीमों ने सभी प्रमुख खाद्य तेल उत्पादक इकाइयों पर छापामार कार्रवाई कर करीब पांच दर्जन सैंपल भरे थे। इनकी जांच रिपोर्ट सामने आने पर हड़कंप मच गया है। क्योंकि (एफएसडीए) आयुक्त डॉ रोशन जैकब ने 14 फर्में प्रतिबंधित कर दी हैं। यानी इन फैक्ट्रियों में खाद्य तेल उत्पादन और पैकिंग कार्य बंद कर दिया है। लैब से आई जांच रिपोर्ट में नामचीन ब्रांड रविंद्रा, बाबर्ची, राधा गोल्ड, तीन इक्का जैसे कई नामचीन कच्ची घानी सरसों तेल असुरक्षित और अधोमानक पाए गए हैं। असुरक्षित का मतलब खाने योग नहीं। विभिन्न टीमों द्वारा अलसी और तिल खाद्य तेल जांच में खरे नहीं उतरे हैं। मंतोरा आयल प्रोडक्ट कानपुर द्वारा तैयार किया गया ब्रांड बाबर्ची कच्ची घानी सरसों तेल अनसेफ (खाने योग्य नहीं) पाया गया है। इसी फैक्ट्री द्वारा सुल्तान एक्टिव नाम से बिकने वाला राइस ब्रान खाद्य तेल सुरक्षित नहीं मिला। कच्ची घानी सरसों तेल रविंद्रा ब्रांड, केएल वेजिटेबल ऑयल द्वारा बनाया जाता है। इसके नमूने भी लैब में फेल हो गए हैं। टीम ने इस फैक्ट्री से पांच नमूने कच्ची घानी तेल के भरे थे, जो सभी मानक के विपरीत जांच में पाए गए। मेरठ स्थित फैक्ट्री से लिए गए डबल डायमंड सरसों कोल्हू, राधा गोल्ड, सुगंध सोयावीन तेल, तीन इक्का के नमूने भी सबस्टैंडर्ड और अनसेफ श्रेणी में पाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि बरेली स्थित खंडेलवाल एडिवल ऑयल से लिया गया चक्र ब्रांड सरसों तेल सैंपल लैब में फेल हो गया था।
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टीम ने भरा क्रूड मस्टर्ड ऑयल सैंपल, उठे सवाल
एफएसडीए द्वारा 20 दिन पहले चलाए गए विशेष अभियान में एक जिले की टीम दूसरे जिलों में लगाई गई थी। यानी क्रास चेकिंग से सैंपलिंग की गई थी। ऐसा लगता है कि टीम ने दबाव में अथवा खानापूर्ति के लिए सैंपलिंग की थी। क्योंकि गोरखपुर स्थित जय लक्ष्मी साल्वेंट फैक्ट्री से तीन (एक सीधे टैंक से और दो खुले तेल) नमूने भरे थे। तीनों नमूने सरसों तेल क्रूड ऑयल था। सल्वेंट फैक्ट्री में जिस स्टॉक से टीम ने नमूने भरे वो फिनिशिंग स्टेज पर नहीं था। उसकी सफाई और प्रोसेसिंग भी नहीं हुई थी। कुल मिलाकर क्रूड ऑयल सीधे तौर पर खाने योग्य नहीं था। फिर भी टीम ने नमूने ले लिए, जो लैब में अनसेफ पाए गए। लैब जांच में साल्वेंट क्रूड मस्टर्ड ऑयल हैबी मैटेरियल (लैड) पाया गया। खाद्य पदार्थ विशेषज्ञों का कहना है कि लैब में भारी मैटेरियल यानी लैड कैसे डिटेक्ट हुआ। उनका कहना है कि यह पहली बार ऐसा हुआ है। मजे की बात यह है कि टीम ने एक ऐसी फैक्ट्री से सैंपल भर लिया, जो पिछले तीन-चार सालों से बंद पड़ी है। उसमें उत्पादन हो नहीं रहा है। लैब में उसका नमूना फेल भी हो जाता है। रिपोर्ट में उसे असुरक्षित और अधोमानक घोषित कर फर्म प्रतिबंधित भी कर दी जाती है।
सैंपलिंग में पक्षपात, जांच जरूरी
तेज तर्रार महिला आईएएस डॉ. रोशन जैकब एफएसडीए आयुक्त हैं। उनकी कार्यशैली पारदर्शी और प्रभावी मानी जाती है। वह जिस विभाग में भी रहीं उनका दबदबा बना रहा। लेकिन इस बार 20 दिन पहले प्रदेश भर में आकस्मिक 14 फैक्ट्रियों में सैंपलिंग हुई, और करीब 5 दर्जन सैंपल लिए गए। पूरी प्रक्रिया में ऐसा लगता है कि जो टीमें लगी थीं उनमें कुछ अधिकारियों ने पक्षपात पूर्ण कार्य किया है। क्योंकि बंद फैक्ट्री से सैंपलिंग कैसे हो गई। इसके साथ ही क्रूड आयल सरसों तेल जो सीधे तौर पर खाने योग्य नहीं होता है उसके सैंपल क्यों भर लिए गए। इसकी जांच भी होना जरूरी है।
14 फर्म और 5 दर्जन उत्पाद प्रतिबंधित, बाजार से स्टॉक होगा वापस
एफएसडीए आयुक्त ने जारी किए निर्देश,स्टॉक वापसी ले
विशेष प्रतिनिधि
टेलीग्राम संवाद, लखनऊ। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने कहा है कि 14 सूचीबद्ध फर्मों/इकाइयों/कंपनियों ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 में उल्लिखित वैधानिक प्रावधानों और उसके तहत बनाए गए विनियमों का उल्लंघन किया है। विनिर्माण इकाइयों द्वारा तैयार खाद्य तेल के नमूने, उनमें सीसा (भारी धातु) की उपस्थिति के कारण, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए गए। नमूने विभिन्न मापदंडों पर भी निम्न-मानक पाए गए, जिससे यह संकेत मिलता है कि लेबल पर ऐसी कोई घोषणा किए बिना ही दो या अधिक खाद्य तेलों को आपस में मिलाया गया था। कुछ मामलों में, मानक मापदंडों से विचलन खाद्य तेल की गुणवत्ता में गिरावट का संकेत देता है। फोर्टिफाइड खाद्य तेल और वसा भी फोर्टिफिकेशन के मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ-साथ सार्वजनिक हित के भी विरुद्ध है और आम उपभोक्ताओं को धोखा देने का प्रमाण है।
आयुक्त ने जारी पत्र में कहा है कि खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 18(1)(a) के साथ पठित धारा 30(2)(a)तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ता हित की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संबंधित फर्मों/कंपनियों/विनिर्माण इकाइयों द्वारा निर्मित, ऊपर सूचीबद्ध उत्पादों (खाद्य तेलों और वसा) के निर्माण, बिक्री, भंडारण और वितरण को पूरे उत्तर प्रदेश राज्य में तत्काल प्रभाव से तब तक के लिए प्रतिबंधित किया जाता है। जब तक कि निर्माता द्वारा संबंधित उत्पाद (खाद्य तेलों और वसा) की गुणवत्ता अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु सुधारात्मक उपाय नहीं कर लिए जाते।
खाद्य तेल कारोबारियों को दिशा निर्देश
एफएसडीए आयुक्त डॉ रोशन जैकब ने निर्देश दिए हैं कि सूचीबद्ध उत्पादों (खाद्य तेलों और वसा) का निर्माण, बिक्री और वितरण तत्काल प्रभाव से बंद कर देंगे। उन्होंने कहा है कि अपने पास मौजूद स्टॉक की स्थिति की जानकारी संबंधित ‘पदनामित अधिकारी’ को 48 घंटों के भीतर दें। उन्होंने कहा कि असुरक्षित उत्पाद को बाजार से वापस (Recall) मंगाया जाए। इसे तत्काल प्रभावी माना जाए। पदनामित अधिकारी और खाद्य सुरक्षा अधिकारी इस आदेश अनुपालन को सुनिश्चित करने तथा सूचीबद्ध फर्मों/कंपनियों/विनिर्माण इकाइयों के खाद्य पदार्थों (खाद्य तेलों और वसा) आगे और प्रसार को रोकने हेतु कड़ी निगरानी रखेंगे। उन्होंने कहा है कि यह आदेश सार्वजनिक हित में एक एहतियाती रूप में जारी किया गया है और यह संबंधित खाद्य व्यवसाय संचालकों को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 तथा उसके तहत बनाए गए नियम अंतर्गत प्रदत्त ‘पुनः-विश्लेषण’ (Re-analysis) वैधानिक अधिकार लाभ उठाने से वंचित नहीं करता है।
















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