- लोक नृत्यों ने रखा परंपराओं को जिंदा
टेलीग्राम संवाद
बरेली। एसआरएमएस रिद्धिमा मंच रविवार शाम बंगाल, गुजरात, उ.प्र. तमिलनाडु और राजस्थान लोक नृत्य गवाह बना। कलाप्रेमी दर्शकों ने इन प्रदेशों के लोकनृत्य का आनंद लिया और इन्हें प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों को सराहा। नृत्य कला विद्यार्थियों अवियान, नायरा, ईशान्वी, अनिका, कारया, वैदेही, युतिका, अवनी भसीन, अनया, त्रिशिका, अवनी अग्रवाल, आयत, ऋत्विका, गौर्वी, नित्या अग्रवाल, सान्वी, मीरा, नितारा, गौरिका, करुण्य, ऐशानी, वृंदा, नित्या जैन, बबिता, राखी, मधुर, आरजू, क्षमा अग्रवाल, निधि छाबरा, कविता तिवारी, परिन, कुंजल, मनस्वी, सान्वी अरोरा, भाव्या, संस्कृति, सैव्या, शगुन, विधि, चिरन्य, पर्या, अद्विका तिवारी, प्रग्वी, साम्भवी, अनुशा ने अपनी नृत्य पारंगता से गुरुजनों सहित सभी मेहमानों और कला प्रेमी दर्शकों की वाहवाही हासिल की। लोक नृत्य कार्यक्रम का आरंभ बंगाली लोक नृत्य से हुआ।

विद्यार्थियों ने बाउल, पल्लिगीति, रायबेशी जैसे लोक नृत्यों को प्रस्तुत किया। इसके बाद गुजराती लोक नृत्यों में गरबा और डांडिया को प्रस्तुत किया गया। उ.प्र. के लोक नृत्य चारकुला, तमिल लोक नृत्य तेम्मांगू, कुइम्मी, ओईलाट्टम और कोलाट्टम और राजस्थानी लोक नृत्य चिर्मी, घूमर और कलबेलिया को भी विद्यार्थियों ने पारंगता से प्रस्तुत किया। लोक नृत्य कार्यक्रम कोरियोग्राफर नृत्य गुरु देबाज्योति नस्कर, रियाश्री चटर्जी, अंशू शर्मा, रोबिन ए और तनया भट्टाचार्य रहे। इंस्ट्रूमेंटल गुरु ऋषभ आशीष पाठक (ढोलक), दीपकांत जौहरी (तबला) और पवन भारद्वाज (हारमोनियम) ने अपने वाद्ययंत्रों के साथ कार्यक्रम में जुगलबंदी दी, तो गायन गुरु प्रियंका ग्वाल ने अपने स्वरों से उपस्थिति दर्ज कराई।


लोक नृत्य अनुसार कास्ट्यूम डिजायनिंग कर देविशा मूर्ति ने भी सराहना पायी। देविशा ने राजस्थानी लोक नृत्य भी किया। कार्यक्रम का संचालन अरुणा गंगवार ने किया।
इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति, आदित्य मूर्ति, आशा मूर्ति, ऋचा मूर्ति, उषा गुप्ता, ट्रस्ट सलाहकार सुभाष मेहरा, डा. एमएस बुटोला, डा. प्रभाकर गुप्ता, डा. अनुज कुमार, डा. शैलेश सक्सेना, डा. आशीष कुमार, डा. रीता शर्मा सहित कई मौजूद रहे।










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