युवाओं को दिया जुनून और व्यवहारिकता का संतुलित मंत्र
श्री रजनीश ध्यान मन्दिर, दीपालपुर (कुमाशपुर रोड) सोनीपत (हरियाणा) में टेलीग्राम संवाद के संपादक(एनसीआर), पवन सचदेवा से हुई विशेष बातचीत पर आधारित
पवन सचदेवा
टेलीग्राम संवाद, सोनीपत। हर बड़ी सफलता के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी छिपी होती है, और टेरेंस लुईस की जिंदगी इसका जीवंत उदाहरण है। साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय समकालीन नृत्य को नई पहचान दिलाने वाले लुईस ने अपने सफर में चुनौतियों को ही सीढ़ी बनाया। सोनीपत के श्री रजनीश ध्यान मंदिर में टेलीग्राम संवाद के संपादक (एनसीआर) पवन सचदेवा से विशेष बातचीत में उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष, करियर के कठिन फैसलों, विदेशी अनुभवों और युवाओं के लिए जरूरी जीवन मंत्र को बेबाकी से साझा किया।

मध्यमवर्गीय परिवार और अनुशासन की नींव
10 अप्रैल 1975 को मुंबई में जन्मे टेरेंस आठ भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनके पिता एक टायर कंपनी में कार्यरत थे, जबकि उनकी मां घर से सिलाई का काम करती थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनके परिवार में शिक्षा और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती थी।
टेरेंस बताते हैं, हमारे पास केवल बुनियादी सुविधाएं थीं, लेकिन माता-पिता ने सिखाया कि शिकायत नहीं करनी चाहिए और जो है, उसी में सर्वश्रेष्ठ करना चाहिए। उनका मानना था कि शिक्षा ही गरीबी से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता है।
घर का माहौल धार्मिक और अनुशासित था
रोज चर्च जाना, परिवार के साथ प्रार्थना करना और नियमों का पालन करना उनके जीवन का हिस्सा था। गलतियों पर सख्ती भी होती थी, जिसने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया।
शिक्षा में उत्कृष्टता, लेकिन दिल नृत्य में
टेरेंस ने 12वीं तक विज्ञान की पढ़ाई की और माइक्रोबायोलॉजी व बायोकैमिस्ट्री में स्नातक की पढ़ाई शुरू की। लेकिन किस्मत ने करवट ली और होटल मैनेजमेंट में उनका चयन हो गया। उन्होंने तुरंत यह नया क्षेत्र अपनाया और साथ ही दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से मनोविज्ञान और समाजशास्त्र में डिग्री भी प्राप्त की।
आर्थिक जिम्मेदारियों को संभालने के लिए उन्होंने फिटनेस ट्रेनिंग, एरोबिक्स और डांस सिखाना शुरू किया। यही वह दौर था, जब उनका झुकाव नृत्य की ओर और अधिक गहरा होता गया।

बचपन से मंच का आकर्षण और आत्मविश्वास
टेरेंस कहते हैं, 6 साल की उम्र में मैं पहली बार मंच पर गया और दर्शकों की प्रतिक्रिया ने मुझे बांध लिया। वहीं से नृत्य मेरे जीवन का हिस्सा बन गया।
वे आगे एक महत्वपूर्ण अनुभव साझा करते हैं कि स्कूल में एक डांस प्रतियोगिता में भाग लेने पर उन्हें प्रथम पुरस्कार मिला। हालांकि, प्रतियोगिता की निर्णायक शिक्षिका ने टिप्पणी की – तुम सबसे कमजोर प्रतिभागियों में सबसे बेहतर हो, अंधों में काना राजा।
इस पर उन्होंने उनसे सवाल किया कि जब पुरस्कार उन्होंने ही दिया है, तो ऐसा क्यों कहा। तब शिक्षिका ने स्पष्ट किया कि उनमें डांस और आत्मविश्वास तो है, मंच पर उनकी उपस्थिति प्रभावशाली है, लेकिन उनकी तकनीक बिल्कुल शून्य है। उस समय उन्हें तकनीक के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
यही वह क्षण था, जब उन्हें पहली बार समझ आया कि नृत्य केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक विधा है जिसमें तकनीकी ज्ञान भी आवश्यक है।
पहली ट्रेनिंग और फिर पढ़ाई का दबाव
इस अनुभव के बाद उन्हें तीन महीने का एक निःशुल्क कोर्स करने का अवसर मिला, जहां उन्होंने जाना कि डांस वास्तव में क्या होता है और उसकी तकनीक क्या होती है। उस समय वे आठवीं कक्षा में थे।
इसके बाद पढ़ाई का दबाव बढ़ गया, दसवीं की परीक्षा आ गई और नृत्य पीछे छूट गया। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे नृत्य को करियर बनाएंगे, क्योंकि उनका पारिवारिक वातावरण पढ़ाई पर केंद्रित था। उन्होंने विज्ञान विषय चुना और डॉक्टर बनने का लक्ष्य रखा, क्योंकि उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में विशेष रुचि थी।
करियर की तलाश और रास्ता बदलना
आगे चलकर उन्होंने माइक्रोबायोलॉजी का अध्ययन किया, लेकिन बाद में उसे छोड़कर होटल मैनेजमेंट किया, क्योंकि उन्हें नौकरी की आवश्यकता थी। होटल मैनेजमेंट के दौरान उन्होंने मनोविज्ञान और समाजशास्त्र का अध्ययन किया और दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से बी.ए. पूरा किया। साथ ही उन्होंने मुंबई के आईएचएम से तीन वर्षीय कोर्स भी पूरा किया और उन्हें नौकरी मिल गई। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अंततः नृत्य को ही अपना करियर चुना।
स्व-अध्ययन से शिक्षक बनने तक
टेरेंस स्वीकार करते हैं कि उन्हें नृत्य के बारे में बहुत कम जानकारी थी- सिर्फ बचपन का तीन महीने का प्रशिक्षण। उन्हें यह भी नहीं पता था कि सिखाया कैसे जाता है। इसलिए उन्होंने स्वयं ही सीखना शुरू किया कि दूसरों को किस प्रकार सिखाया जाए। 17 से 26 वर्ष की आयु तक, लगभग आठ वर्षों तक, उन्होंने बिना औपचारिक प्रशिक्षण के बच्चों को नृत्य सिखाया, कक्षाएं चलाईं और इससे आय अर्जित की। इसी दौरान उन्होंने एरोबिक्स भी सीखा और सिखाया।
कठिन निर्णय: सुरक्षित करियर या जुनून
होटल इंडस्ट्री में उन्हें आकर्षक नौकरी के अवसर मिल रहे थे, लेकिन उन्होंने नृत्य को अपना करियर बनाने का फैसला किया।
वे कहते हैं, यह मेरे जीवन का सबसे कठिन निर्णय था। एक तरफ सुरक्षित भविष्य था और दूसरी तरफ अनिश्चितता, लेकिन मैंने अपने दिल की सुनी। इस निर्णय के कारण उन्हें परिवार और समाज से विरोध भी झेलना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

सीख की तलाश और बड़ा मोड़
जीवन के एक चरण में उन्हें महसूस हुआ कि केवल अनुभव के आधार पर आगे बढ़ना पर्याप्त नहीं है। वे नृत्य में शिक्षित होना चाहते थे। 26 वर्ष की आयु में, जब वे कुछ हद तक प्रसिद्ध हो चुके थे और माधुरी दीक्षित तथा मलायका अरोरा जैसी हस्तियों के ट्रेनर रह चुके थे, उन्होंने एक बड़ा निर्णय लिया। उन्होंने अपनी प्रसिद्धि और स्थापित काम को छोड़कर न्यूयॉर्क जाने का फैसला किया, ताकि वे नृत्य की औपचारिक शिक्षा प्राप्त कर सकें। उन्होंने अपनी कमाई को संचित किया और छात्र के रूप में वहां पहुंचे, लेकिन नौकरी न होने के कारण उन्हें तीन महीने बाद वापस लौटना पड़ा। फिर भी, इस अनुभव ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया।
न्यूयॉर्क से वियना तक: बदलाव की यात्रा
न्यूयॉर्क के अनुभव के बाद, लगभग तीन वर्ष बाद, वर्ष 2003 में उन्हें भारत से यूरोप के वियना में समकालीन नृत्य का अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति मिली। यही वह अवसर था, जिसने उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल दी।
समकालीन नृत्य: अभिव्यक्ति का आधुनिक माध्यम
टेरेंस कहते हैं, “समकालीन नृत्य आज के समय की भाषा है, जिसमें हर भावना को व्यक्त किया जा सकता है। इसमें दिखावा नहीं, बल्कि सच्ची अभिव्यक्ति होती है।” उनके अनुसार, इसे समझने के लिए दर्शकों को भी संवेदनशील होना पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय पहचान
टेरेंस ने वियना, जर्मनी, मिस्र और अन्य देशों में प्रदर्शन और प्रशिक्षण दिया है। वे बताते हैं, योग, भारतीय शास्त्रीय नृत्य और समकालीन शैली का मिश्रण विदेशी कलाकारों के लिए नया और आकर्षक है।
डांस को पेशे के रूप में स्थापित करने का प्रयास
उन्होंने एक ट्रस्ट और डांस अकादमी की स्थापना की है, जहां प्रतिभाशाली युवाओं को स्कॉलरशिप के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है। तीन वर्षीय कोर्स में बैले, जैज़, समकालीन, कथक, भरतनाट्यम और योग का प्रशिक्षण दिया जाता है। वे कहते हैं, हम चाहते हैं कि डांस को सिर्फ शौक नहीं, बल्कि एक सम्मानजनक पेशा माना जाए।
डांस और व्यक्तित्व विकास
उनके अनुसार, नृत्य आत्मविश्वास, शारीरिक संतुलन और व्यक्तित्व को निखारता है।
डांस थेरेपी मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद प्रभावी है, वे बताते हैं।
बॉलीवुड पर स्पष्ट राय
बॉलीवुड के बारे में उन्होंने कहा कि पहले कलाकार स्वयं नृत्य करते थे, जबकि आज तकनीक का अधिक उपयोग हो रहा है। मैं वही प्रोजेक्ट चुनता हूं, जहां वास्तविक कला और रचनात्मकता हो, उन्होंने स्पष्ट किया।

यात्रा से मिली जीवन की सीख
दुनिया के विभिन्न देशों की यात्रा ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया। वे कहते हैं, यात्रा ने मुझे सहनशीलता, कृतज्ञता और दूसरों के विचारों का सम्मान करना सिखाया।
युवाओं के लिए संदेश: जुनून के साथ व्यवहारिकता भी जरूरी
अंत में टेरेंस लुईस ने युवाओं को सलाह देते हुए कहा कि जीवन में केवल जुनून नहीं, बल्कि व्यवहारिकता को भी महत्व देना चाहिए। सिर्फ ‘अपने जुनून का पालन करो’ हर किसी के लिए सही नहीं होता, खासकर तब जब आर्थिक या पारिवारिक सहयोग सीमित हो,वे कहते हैं।
उन्होंने बताया कि जब नृत्य से आय कम होने लगी, तो उन्होंने फिटनेस क्षेत्र अपनाया, क्योंकि उस समय उनकी प्राथमिकता आर्थिक स्थिरता थी। इसी दौरान उनके संपर्क फिल्म उद्योग तक पहुंचे और उन्हें फिल्म लगान से जुड़ने का अवसर मिला। वे मानते हैं कि जीवन का रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता। यदि आगे बढ़ना संभव न हो, तो परिस्थिति के अनुसार रास्ता बदलना भी जरूरी होता है। इसलिए व्यक्ति को लचीला होना चाहिए और अपने उपलब्ध संसाधनों का पूरा उपयोग करना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि व्यक्ति को परफेक्ट समय” का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि जो उपलब्ध है, उसी से शुरुआत करनी चाहिए। साथ ही, अपेक्षाएं सीमित रखें, क्योंकि अधिक अपेक्षाएं निराशा का कारण बनती हैं। उनके अनुसार, छोटे और साकार होने वाले लक्ष्य निर्धारित करना अधिक प्रभावी होता है। काम की प्रक्रिया का आनंद लेते हुए निरंतर आत्म-सुधार पर ध्यान देना चाहिए।
अंत में उन्होंने कहा कि परफेक्शन के बजाय एक्सीलेंस पर ध्यान दें, अपने काम में सर्वश्रेष्ठ बनने का प्रयास करें, सहयोग करें और लगातार सीखते हुए आगे बढ़ें—यही सफलता का मूल मंत्र है।अपने जुनून को पहचानिए, जोखिम उठाने का साहस रखिए और निरंतर मेहनत करते रहिए। सफलता देर से मिले, लेकिन जरूर मिलेगी।टेरेंस लुईस की कहानी यह साबित करती है कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों को रोक नहीं सकते। यदि दृढ़ निश्चय, मेहनत और जुनून हो, तो हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।










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