वक्ताओं ने कहा- नई वर्टिकल व्यवस्था में पिस रहा उपभोक्ता और व्यापारी
आर.बी.लाल
टेलीग्राम संवाद, बरेली। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने पहली बार बरेली में आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रस्तावित नए टैरिफ पर सुनवाई करते हुए कहा कि सभी पक्षों पर विचार विमर्श करने पर ही कोई फैसला लागू होगा। पॉवर कारपोरेशन ने आगामी वित्तीय वर्ष नया टैरिफ प्रस्तावित किया है, जिस पर तमाम आपत्तियां आई हैं। इनकी सुनवाई आयोग कर रहा है। कार्यक्रम में उद्यमी और व्यापारियों ने कहा कि बिजली सप्लाई बेहद खराब है। फाल्ट समय से दूर नहीं होते हैं, जिससे उद्योग और उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उद्यमी संगठनों ने कहा कि पहले बेहतर सप्लाई मिले तब टैरिफ बढ़ाने पर कोई फैसला हो।
जीआईसी ऑडिटोरियम में बुधवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे जनसुनवाई कार्यक्रम आरंभ हुआ। नियामक आयोग द्वारा टैरिफ पर सुझाव मांगे गए। सुझाव देने पहुंचे उद्यमी, व्यापारी और विभिन्न सैक्टरों के उत्पादक संगठनों ने एकजुट कहा कि बिजली सप्लाई व्यवस्था बेहद लचर है। जब कोई शिकायत की जाती है तब मैन पावर कमी का रोना रोया जाता है। संगठन प्रमुखों ने कहा कि छटनी होने से स्टाफ कम हुआ है। इसका प्रभाव सीधे उद्योगों पर पड़ रहा है। आम उपभोक्ता भी प्रभावित है। उद्यमियों ने कहा कि बिलिंग व्यवस्था भी चौपट है। मनमाने बिल आ रहे हैं। रीडिंग कुछ है बिल कुछ और आ रहे हैं। ट्रिपिंग से उद्योगों में लगी मशीनें प्रभावित हो रही हैं। इसका आर्थिक भार भी उद्यमी ही उठा रहे हैं। गलत बिल जबरन जमा कराए जा रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि उद्योगों में सौर ऊर्जा व्यवस्था में नेट मीटरिंग सुविधा दी जाए, जिससे कारोबार करने वाले घाटा उठाने से बच सकें।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने तीखे सवाल करते हुए कई विभागीय उदाहरण दिए। उन्होंने बताया कि किस तरह वितरण कंपनियों के अधिकारी लूटने में लगे हैं। एस्मा सरकार लगाती है, जिससे कोई आंदोलन या हड़ताल न हो सके। उन्होंने कहा एस्मा सिर्फ कर्मचारी और उनके संगठनों के साथ ही विद्युत वितरण कंपनियों के अधिकारियों पर भी लागू हो, क्योंकि कंपनियां और उनके अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। सप्लाई पूरी नहीं देते हैं। लगातार फाल्ट बढ़ रहे हैं, ट्रांसफार्मर भी फुंक रहे हैं। जिन लोगों ने आज तक कोई बिल जमा नहीं किया उनसे वसूली नहीं हो रही है। इन स खामियों का खामियाजा उपभोक्ता ही भुगत रहा है। उन्होंने विभाग में लागू नई वर्टिकल व्यवस्था का विरोध करते हुए कहा कि स्थाई रूप से कनेक्शन काटने, बिल सही कराने, नया कनेक्शन, शिकायतों का निस्तारण आदि वर्टिकल व्यवस्था में चौपट हो गया है। उन्होंने कहा कि हर फीडर पर गैंग होना चाहिए, जबकि ऐसा नहीं है। उन्होंने सवाल किया- बरेली जोन में कितने फीडर हैं, और कितने गैंग काम कर रहे हैं। इसका सीधा उदाहरण देते हुए कहा कि विद्युत विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़े गलत हैं।
कनेक्शन के लिए बनाए स्लैब
नियामक आयोग अध्यक्ष अरविंद कुमार ने टैरिफ आदि विषयों पर जनसुनवाई पूरी होने के बाद अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि नये नियमों के तहत अब कनेक्शन लेना आसान हो गया है। इसके लिए तीन स्लैब बनाए गए हैं। अब 150 किलोवाट तक के कनेक्शन का एक स्लैब बनाकर प्रति किलोवाट चार्ज देना होगा। इसके लिए कोई इस्टीमेट नहीं बनेगा। 150 से 300 किलोवाट तक के लिए दूसरी स्लैब व उसके ऊपर के कनेक्शन में केवल इस्टीमेट बनाने की व्यवस्था कमीशन ने की है।
कॉलोनियों को आसानी से मिलेगा कनेक्शन
अध्यक्ष ने बताया कि कई डेवलपर बिना बिजली कनेक्शन के ही कॉलोनियों को काटकर छोड़ देते थे। वहां कम से कम 25 प्रतिशत उपभोक्ताओं द्वारा कनेक्शन के आवेदन करने के बाद भी तमाम शर्तों का पालन करने पर कनेक्शन मिलता था। इसे भी सरल करते हुए अब आयोग ने नए कनेक्शन के लिए उपभोक्ता को अब 70 रुपये स्क्वायर फीट के हिसाब से डेवलपमेंट चार्ज जमा कर कनेक्शन करा सकेगा।
उद्यमियों की समस्याओं का कराएं निस्तारण
अध्यक्ष ने बताया कि अधिकांश प्राप्त समस्याएं व शिकायत एमडी स्तर की हैं। वह स्वयं यहां मौजूद हैं इसलिए उम्मीद करता हूं कि इसका निस्तारण उनके स्तर से हो जाएगा। वहीं इंस्ट्रीयल फीडर की समस्याओं, बिजली आपूर्ति की समस्याओं को लेकर कहा कि उद्यमी व व्यापारी हमारे रेवन्यू का मुख्य अंग हैं उन्हें किसी प्रकार की समस्या न हो। उन्होंने कहा कि जो लोग बिल जमा नहीं कर रहे हैं, उन्हें बिजली सप्लाई क्यों दी जा रही है।
15 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने बिल जमा नहीं किए
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की एमडी रिया केजरीवाल ने जनसुनवाई से पहले आंकड़ों को दिखाया। इस दौरान कनेक्शन लेने के बाद 15 लाख उपभोक्ताओं द्वारा बिल जमा न करने को भी दर्शाया गया। इस पर आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि उपभोक्ता बेहतर सर्विस हमसे चाहते हैं, इसके लिए समय से भुगतान करना भी जरूरी है। उन्होंने स्मार्ट प्रीपेड मीटर के फायदे भी बताए।
स्मार्ट मीटर पर उठे सवाल
जनसुनवाई में सबसे अधिक शिकायतें स्मार्ट मीटर की रहीं। उपभोक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि स्मार्ट के नाम पर लगाए गए ये मीटर अब उनकी आर्थिक और मानसिक परेशानी का कारण बन चुके हैं। स्मार्ट मीटर से न तो बिलिंग पारदर्शी हुई है और न ही सेवा में सुधार आया है। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर बिल संबंधी संदेश नहीं मिल रहे। मीटर रीडिंग और बिल में अंतर होने की शिकायत की गई। कुछ उपभोक्ताओं ने कर्मचारियों द्वारा सेवा शुल्क मांगे जाने की भी शिकायत की। इसके अलावा उपभोक्ताओं ने समय पर बिल न मिलने, गलत बिलिंग की समस्या, शिकायतों का कोई ठोस समाधान नहीं होने की बात रखीं।

सोलर की ओर बढ़ने को अध्यक्ष ने दी सलाह
जनसुनवाई आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने सभी शिकायतों को सुनने के बाद सौर ऊर्जा की ओर बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया। कहा कि बिजली का भंडारण संभव नहीं है, इसलिए आवश्यकता के अनुसार ही बिजली खरीदी जाती है। उन्होंने उपभोक्ताओं और उद्योगों से अपील की कि वे दिन के समय बिजली का अधिक उपयोग करें, जिससे लोड संतुलन में सुधार हो सके। उनका सुझाव था कि जो लोग सौर ऊर्जा इस्तेमाल कर रहे हैं उनको ज्यादातर काम दिन में निपटा लेना चाहिए। उन्होंने उपभोक्ताओं से कहा कि दिन में प्रेस आदि जैसे घरेलू काम दिन में निपटाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि रात में सौर ऊर्जा उत्पादन नहीं होता है। इसके लिए कंपनियां महंगी बिजली खरीदती हैं, जिसके चलते टैरिफ ऊपर नीचे हो जाता है। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि जनसुनवाई प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। सभी पक्ष सुन लिए हैं। आयोग जगह-जगह सुनवाई कर रहा है। इस पर पूरी समीक्षा की जाएगी। तब टैरिफ व अन्य मामलों में फैसला लिया जाएगा।
कई स्तरों पर सुधार की जरूरत
जनसुनवाई में यह स्पष्ट हो गया कि बिजली व्यवस्था के कई स्तरों पर सुधार की जरूरत है। स्मार्ट मीटर से लेकर बिलिंग और आपूर्ति तक, हर मोर्चे पर उपभोक्ताओं को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह भी सामने आया कि विभागीय तंत्र में समन्वय की कमी और फील्ड स्तर पर संसाधनों की कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
कार्यक्रम में ये भी रहे मौजूद
आयोग सचिव सुमित अग्रवाल, सदस्य डॉ संजय कुमार सिंह, निदेशक सर्वजीत सिंह ढींगरा, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल, चीफ इंजीनियर बिलिंग नरेश राम, बरेली चीफ इंजीनियर ज्ञान प्रकाश, राघवेंद्र कुमार, एसई ज्ञानेंद्र सिंह व धर्मेंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता अंकित गंगवार, ओपी सिंह, मनोज कुमार, सुरेश सिंह, जुनैद आलम समेत सभी प्रमुख अधिकारी और अधीनस्थ मौजूद रहे।
जनसुनवाई में आईआईए, चैंबर ऑफ कामर्स और लघु उद्योग भारती पदाधिकारी भी पहुंचे। भोजीपुरा इंडस्ट्रीयल एरिया अध्यक्ष अजय शुक्ला ने अधिशासी अभियंता ओपी सिंह पर सीधा प्रहार किया, जिस पर आयोग ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जो कुछ कहना है कि लिखकर दें।









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