मनमानी: बीडीए और फायर एनओसी बिना बन रहा फूडकोट, जांच होगी- दिल्ली में रेस्टोरेंट अग्निकांड बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

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टेलीग्राम संवाद

बरेली।दिल्ली में रेस्टोरेंट में आग लगने से 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इसके बाद सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। इसी बीच बरेली में निर्माणाधीन फूड कोट को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि फूड कोट निर्माण बिना बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) से मानचित्र स्वीकृत कराए और फायर ब्रिगेड की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिए बिना कराया जा रहा है।
डीडीपुरम क्षेत्र स्थित नगर निगम की बेशकीमती जमीन पर फूड कोट का प्रस्ताव मंजूर हुआ था। पहले फड़ विक्रेताओं को फूड कोट में जगह देनी थी जिसका प्रस्ताव पारित किया गया था। लेकिन यह सब कागजों तक सीमित रहा वास्तविक तौर पर कुछ और है।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में मनमानी और लापरवाही एक बार फिर सुर्खियों में है। बरेली स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने 5 नवंबर 2024 को एड टेक प्रिंट एंड मीडिया से मल्टी लेवल कार पार्किंग (33 कार स्पेस), फूड कोट परिसर और लाइट एंड साउंड शो संचालन का अनुबंध किया था। लगभग 4 – 5 लाख रुपये सालाना ठेका 15 साल के लिए दिया था। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जहां बड़ी संख्या में लोगों के आने-जाने और भोजन करने की व्यवस्था होगी, वहां अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन सबसे पहली आवश्यकता है। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमों की अनदेखी की जा रही है।

बताया जाता है निर्माण स्थल पर न तो फायर सेफ्टी का स्पष्ट प्लान है और न ही आपातकालीन निकासी व्यवस्था को लेकर कोई जानकारी सार्वजनिक की गई है। ऐसे में भविष्य में किसी हादसे की स्थिति में जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। अग्निशमन दल विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी एनओसी जारी नहीं हुई है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोका जाए तथा बीडीए, फायर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों से इसकी जांच कराई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी आवश्यक अनुमतियां और सुरक्षा मानक पूरे होने के बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़े।

सुरक्षा विशेषज्ञ अनुसार किसी भी व्यावसायिक भवन, विशेषकर फूड कोट, मॉल और रेस्टोरेंट जैसी जगहों के लिए फायर एनओसी, आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण और भवन मानचित्र की स्वीकृति अनिवार्य होती है। इन नियमों की अनदेखी भविष्य में बड़े हादसों का कारण बन सकती है। क्या निर्माण से पहले बीडीए से मानचित्र स्वीकृत कराया गया। फायर विभाग की एनओसी ली गई या नहीं। सुरक्षा मानकों की निगरानी कौन कर रहा है। नियमों के उल्लंघन पर जिम्मेदारी किसकी होगी। फूड कोट निर्माण को लेकर उठे इन सवालों ने स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा मानक पालन नहीं किया है।

फूड कोर्ट निर्माण को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि एड टेक प्रिंट एंड मीडिया ने स्मार्ट सिटी, नगर निगम और बरेली विकास प्राधिकरण अधिकारियों को गुमराह कर शासन की महत्वाकांक्षी परियोजना में नियमों को ताक पर रख दिया है। रूहेलखंड उद्योग व्यापार मंडल प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार महरोत्रा ने कहा है कि निर्माण से जुड़ी तमाम प्रक्रियाओं और कानूनी आवश्यकताओं की जानकारी होने के बावजूद न तो बीडीए से भवन का मानचित्र स्वीकृत कराया गया और न ही फायर ब्रिगेड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिया गया। सार्वजनिक उपयोग की इस परियोजना में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में भविष्य में किसी भी आपात स्थिति या हादसे की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो सकता है। मामले को लेकर परियोजना की वैधता और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। जिम्मेदारों पर कार्रवाई होना चाहिए।


  • डा. मनिकंडन, उपाध्यक्ष बीडीए, बरेली

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