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बरेली। पिछले माह से लगातार बिजली सप्लाई में लापरवाही और मनमानी हो रही थी। भ्रष्टाचार में लिप्त ज्यादातर अवर अभियंता फोन भी उठाना पसंद नहीं कर रहे थे। धीरे-धीरे आक्रोश बढ़ता रहा। बाद में वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने पत्र लिखकर नाराजगी जताई। मामला गंभीर मानते हुए ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने निर्देश जारी किए। तब एक अधिकारी दूत बनकर बरेली आया और त्रिपक्षीय वार्ता हुई।
बिजली समस्या पर आयोजित वार्ता में जिलाधिकारी और लखनऊ से आए दूत के समक्ष जमकर फजीहत हुई। चीफ इंजीनियर बरेली ज्ञान प्रकाश ने बैठक उपरांत आरोपी एसडीओ और जेई शहर से देहात में स्थानांतरित कर दिया। हालांकि मामला यहीं थम नहीं है अभी पिक्चर बाकी है।
शनिवार सर्किट हाउस में हुई त्रिपक्षीय वार्ता में वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार, कैंट विधायक संजीव अग्रवाल, भाजपा नेता, प्रभावित जनता और नगर निगम पार्षदों ने बिजली सप्लाई अव्यवस्था, अभियंताओं द्वारा फोन ना उठाना, भ्रष्ट अभियंताओं द्वारा मनमाना नया कनेक्शन का एस्टीमेट देना, पैसे लेकर खंभा और ट्रांसफार्मर इधर-उधर शिफ्ट समेत कई मामले बैठक में उठे।
जनप्रतिनिधियों ने बताया कि घटिया माल लगने से केबिल पिघल कर गिर रही है। घटिया सामान लगाने वालों पर कार्रवाई होना चाहिए।
बैठक में उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया सिस्टम बैठे कई अधिकारी सरकार विरोधी गतिविधियों में लिप्त है। इसी वजह से बिजली सप्लाई अस्त-व्यस्त है। जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर और उपकेंद्र बढ़ चुके हैं। फिर भी स्थिति बदहाल है। जिस पर बैठक में बैठे मंत्री और विधायक ने कड़े तेवर दिखाये। जिलाधिकारी अविनाश सिंह और लखनऊ से आए विशेष दूत मनीष गुप्ता ने बिजली सप्लाई से संबंधित आक्रोश खुद देखा। जन प्रतिनिधि चेतावनी दी कि अधिकारी सुधर जाएं। अन्यथा दंड पाने के लिए तैयार रहें।
बैठक में आक्रोश देखकर चीफ इंजीनियर बरेली सहमे नजर आए। उन्हें अपनी गलती का एहसास भी होने लगा। उन्होंने तुरंत बैठक उपरांत आरोपी एसडीओ अभिषेक कपासिया और जेई चंद्रमा प्रसाद किला क्षेत्र से देहात स्थानांतरित कर दिया। बैठक में अवर अभियंता मनजीत सिंह पर कई भ्रष्टाचार संबंधी आरोप लगे उनको भी ग्रामीण क्षेत्र में तैनात किया गया है। अवर अभियंता साबिर खान अफसरों के नजदीक माने जाते हैं इसलिए उन्हें मनपसंद शाही क्षेत्र मिला है। बताया जाता है शाही क्षेत्र में उन्होंने कई विवाद पैदा किए थे इसलिए उन्हें वहां से हटाया गया था। अब उन्हें फिर वही तैनाती मिल गई है। रामपुर बाग उपकेंद्र पर तैनात कृष्णकांत सिर्फ एक उपकेंद्र देख रहे थे लेकिन फोन किसी का नहीं उठाते थे। अब उन्हें ग्रामीण क्षेत्र में तैनात किया गया है।
पहले कार्यवाही क्यों नहीं हुई, उठे सवाल
बैठक में हुई फजीहत बाद चीफ इंजीनियर बरेली ने आरोपित अभियंता शहर से देहात रवाना कर दिए। इस कार्यवाही पर सवाल उठ रहे हैं इनकी शिकायतें पहले से ही थीं। तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई ? बताया जाता है नए कनेक्शन देने, बिल सही करने, नया कनेक्शन एस्टीमेट बनवाने आदि में जमकर वसूली हो रही है। शिकायतें ऊपर तक पहुंच रही हैं फिर भी लीपापोती हो रही है। कई घंटा फाल्ट सही नहीं किया जा रहे थे। नलकूप कनेक्शन हेतु एस्टीमेट बनवाने हेतु 30000 जिले भर में तय हैं। ऐसे मामले सामने आते हैं लेकिन रफा दफा कर दिया जाता है। विभाग ने tg2 कर्मचारी भी इधर-उधर किए हैं।













