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बरेली। लखनऊ से प्रबंध निदेशक मध्यांचल विद्युत वितरण निगम दूत बनकर आए मनीश गुप्ता के सामने जन प्रतिनिधियों और पीड़ित उपभोक्ताओं ने जमकर विभाग में व्याप्त मनमानी, लापरवाही और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले रखे। सभी लोगों ने एक स्वर में कहा अवर अभियंता कभी फोन नहीं उठाते। ऐसी स्थिति अधिकारियों ने भी बना रखी है। मंत्री और विधायक ने भी खरी खोटी सुनाईं। अफसर सिर्फ सुनते रहे, पीड़ित जवाब मांगते रहे, लेकिन अफसरों पर कोई जवाब नहीं था।

बरेली जिले में घंटों बिजली गुल रहने, अघोषित कटौती, भीषण गर्मी में लाइनें बदलने, मरम्मत कार्य, अनापशनाप बिल आने, दर्ज परिवाद निस्तारण की जगह उस पर लीपा पोती करना, अवर अभियंताओं और कुछ अफसरों द्वारा फोन न उठाना जैसे कई गंभीर मामले त्रिपक्षीय बैठक में उठे। जिलाधिकारी अविनाश सिंह, एडीएम सिटी अविनाश त्रिपाठी, सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार और लखनऊ से उर्जा मंत्री व प्रबंध निदेशक दूत मनीश गुप्ता के समक्ष लोगों ने विभागीय मनमानी, लापरवाही, भ्रष्टाचार और फोन न उठाने संबंधी सिलसिले बार प्रमाण सहित पार्षदों ने मामले रखे। आमने-सामने हो रही वार्तालाप धीरे-धीरे गर्माहट की ओर बढ़ने लगी। बैठक में अवर अभियंता चंद्रमा प्रसाद, मंजीत सिंह, कृष्णकांत आदि के कारनामे उजागर किए गए। उनकी मनमानी और फोन न उठाने संबंधी शिकायत की गई। साथ ही इन पर भ्रष्टाचार संबंधी गंभीर आरोप भी लगे। हालांकि वरिष्ठ पार्षद व भाजपा नेता सतीश कातिब ने अवर अभियंता मिलिंद गौतम के कामकाज की तारीफ कर दी।

बिजली अफसर सरकार विरोधी
बैठक में खुलेआम जिलाधिकारी व अन्य अधिकारियों समक्ष जन प्रतिनिधियों ने सीधे आरोप लगाए कि सिस्टम में बैठे कुछ अधिकारी और कर्मचारी सरकार विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। यह आरोप सामान्य नहीं था। मंच पर बैठे अधिकारी विचलित हुए, लेकिन कैंट विधायक संजीव अग्रवाल ने प्रमाण सहित बात रखी। उन्होंने बताया कि 2022 तक बरेली और अन्य स्थानों पर बिजली संबंधी गंभीर समस्या नहीं थी, लेकिन अचानक धीरे-धीरे बढ़ी और अब पिछले महीने अप्रैल से कुछ ज्यादा ही अफसरशाही हाबी हो गई। उन्होंने याद दिलाया कि सुभाषनगर में एक और उपकेंद्र बन गया। एक 220 केवी पारेषण उपकेंद्र भी करगैना में आ गया। पवन विहार उपकेंद्र भी चालू हो गया। फिर भी बिजली संकट क्यों पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा ऐसा लग रहा है विभाग में कुछ जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी सरकार को बदनाम करना चाहते हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर बरेली में बढ़ा है तब अचानक बिजली समस्या हर मोहल्ले में क्यों पैदा हो गई है। जगह-जगह बंच केबल पिघलकर गिर रहा है। ट्रांसफार्मर बोझ नहीं उठा पा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि केबल हो या अन्य उपकरण सबमें घटिया और मानक के विपरीत सामान लगाया जा रहा है, जिससे अव्यवस्था हो और सरकार बदनाम हो। लेकिन भाजपा ऐसा नहीं होने देगी। भ्रष्ट, मनमानी और लापरवाही में लिप्त अधिकारी व कर्मचारी बक्से नहीं जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि बैठक में जिन अभियंताओं द्वारा फोन न उठाने और अनाप सनाप नए कनेक्शन के स्टीमेट जारी किए हैं उन पर कार्रवाई सुनिश्चित कर ली जाए। उन्होंने बैठक में आरोपित अभियंताओं के नाम भी सार्वजनिक किए। बैठक में चेतावनी दी गई अगर सरकार के खिलाफ साजिश रचने वाले अफसर अब भी नहीं चेते, तो इन्हें उन्हीं की भाषा में ऐसा करारा जवाब दिया जाएगा कि ये भूल नहीं पाएंगे। क्योंकि बिजली संकट लगातार गहरा रहा है।
विधायक संजीव अग्रवाल जिस तेवर में बोल रहे थे उसका अंदाजा कार्यकर्ताओं को भी नहीं था और अफसर भी भौचक्के थे। उन्होंने साफ कहा चेकिंग नाम पर होने वाली वसूली नहीं चलेगी।



बानखाना डेयरियों में चोरी
बैठक में कुछ लोगों ने बताया कि बानखाना आदि क्षेत्रों में संचालित डेयरी और अवैध ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशनों पर विभागीय मिलीभगत से खूब बिजली चोरी हो रही है। जिस पर शिकायत कर्ताओं से गोपनीय नाम, पते बैठक में मांग लिए और चीफ इंजीनियर को इस चेतावनी के साथ सौंपे गए कि गोपनीय तौर से इनकी चेकिंग कराई जाए।
बैठक में लोगों ने बल्लियों पर लंबी लाइनें चलने की शिकायतें उठाई। नए कनेक्शन देने में मनमानी हो रही है। पैसा न देने पर अनाप सनाप एस्टीमेट बनाया जाता है। बताया गया कि 40 मीटर पर कनेक्शन चल रहा है, लेकिन 30 मीटर दूरी वाले को नहीं दिया जा रहा है। पार्षदों ने नालों पर रखे ट्रांसफार्मर, झुके हुए जर्जर खंभे, ट्रांसफार्मर की फैंसिंग न होना, बार-बार केबल टूटना आदि की शिकायतें रखीं।

शिकायतों का पुलिंदा सौंपा गया
विभिन्न क्षेत्रों से मिली शिकायती पत्रों का अंबार लग गया। वन मंत्री के अग्रज व वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल कुमार ने लखनऊ से आए विभागीय प्रतिनिधि चीफ इंजीनियर (तकनीक) को शिकायतों का पुलिंदा सौंपा। इस मौके पर चीफ इंजीनियर बरेली ज्ञान प्रकाश भी मौजूद रहे।
हेल्प डेस्क बना हेल्प लैस
बैठक में फोन न उठाने संबंधी मामले सबसे अधिक रहे। इसके साथ ही शिकायत कर्ताओं ने बताया कि विभागीय अफसर 1912 और निर्धारित हेल्प डेस्क पर परिवाद दर्ज करने की सलाह दी जाती है, लेकिन हेल्प डेस्क का फोन नंबर कभी उठता नहीं है। भाजपा नेता हरिओम कश्यप और पार्षद सरिता रानी ने कहा फोन न उठाने वाले कर्मचारी व अधिकारी पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वार्ड नंबर 40 में कई स्थानों पर नीचे से क्षतिग्रस्त और झुके हुए खंभे लगे हुए हैं, जो कभी गिर सकते हैं, जिनसे बड़ी दुर्घटना हो सकती है। कई बार विभाग को लिखकर दिया जा चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वनमंत्री डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि जिले में सबसे अधिक बंच केबल टूटने से बिजली कटौती की शिकायतें हैं। मुख्य अभियंता ने बंच केबलों की गुणवत्ता की जांच कराने को कहा। वन मंत्री ने कहा जिस प्रकार पानी जरूरी है वैसे ही अब बिजली भी जरूरी है। उन्होंने उपकेंद्रों पर स्टॉफ की कमी की शिकायतें मान्य न होने को कहते हुए मुख्य अभियंता से लिखकर देने को कहा, ताकि ऊर्जा मंत्री से वार्ता कर स्टाफ दिलाया जाए। सभी जेई से लेकर उच्च अधिकारियों के मोबाइल में सभी जनप्रतिनिधियों व पार्षदों का नंबर सेव कराने, उनका फोन उठाने के अधिकारियों को निर्देश देने को कहा। मंत्री ने सभी शिकायतों का एक सप्ताह में निराकरण करने के निर्देश दिए।
डीएम ने माना बिजली व्यवस्था खराब, हटाए जाएंगे लापरवाह
बैठक में मौजूद डीएम अविनाश सिंह ने भी विधायक द्वारा आरोप सही ठहराते हुए माना कि जिले में बिजली व्यवस्था काफी खराब है। जिला प्रशासन को लगातार इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। डीएम ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि बिजली अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं और उनका व्यवहार जनता के प्रति बेहद संवेदनहीन है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो अधिकारी बरेली में व्यवस्था को नहीं संभाल पा रहे हैं, उन्हें यहां से तत्काल हटवाया जाएगा।
मुख्यालय से आए दूत ने भी मानी विभागीय गलती
बैठक में मौजूद लखनऊ से आए मुख्य अभियंता तकनीक मनीष गुप्ता ने माना कि बरेली में विभागीय लापरवाही से अव्यवस्था बनी हुई है, जिसे दुरुस्त किया जाना जरूरी है। वह इसकी रिपोर्ट प्रबंध निदेशक मध्यांचल को सौंपेंगे। मनीष गुप्ता ने बताया बरेली में जेई, एसडीओ व एक्सईएन द्वारा फोन न उठाने से अधिक समस्या है। उन्होंने हेल्पडेस्क के नंबर व कार्यप्रणाली के बारे में बताया। उन्होंने मंच से ही अधिकारियों को सुधार करने की नसीहत दी।
किला, हरूनगला उपकेंद्रों की शिकायतें सबसे ज्यादा
किला, हरूनगला, सुभाषनगर, कुतुबखाना आदि उपकेंद्रों की शिकायतें सबसे ज्यादा सामने आईं। बैठक में पार्षदों ने बताया कि इन उपकेंद्रों के अवर अभियंता फोन नहीं उठाते हैं। उपकेंद्रों पर शिकायत करने जाते हैं तब वहां अभद्र व्यवहार किया जाता है।

10 जून को फिर होगी समीक्षा
बैठक में वन मंत्री ने सप्ताह भर में सुधार लाने की चेतावनी दी। कैंट विधायक संजीव अग्रवाल ने मुख्य अभियंता को सभी पार्षदों की समस्याओं का निराकरण कर वन मंत्री व संबंधित पार्षद के साथ डीएम को अवगत कराने को कहा। विधायक ने कहा कि 10 जून तक सुधार का समय दिया जाता है। इसकी फिर से समीक्षा होगी। क्या सुधार हुआ क्या नहीं, यह देखने के बाद अगली रणनीति तैयार होगी।














