विद्या ही सर्वोपरि है: प्राचार्य ओम प्रकाश राय-बरेली कॉलेज के प्राचार्य ओम प्रकाश राय ने खोले शिक्षा, संस्कार और बदलते समाज के कई अध्याय-ग्रामीण पगडंडी से बरेली कॉलेज के प्राचार्य पद तक का सफर

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आकर्ष मिश्रा

टेलीग्राम संवाद, बरेली । उत्तर भारत की शैक्षणिक विरासत में अगर कुछ संस्थानों का नाम सम्मान से लिया जाता है, तो उनमें बरेली कॉलेज प्रमुख है।करीब दो सदियों के इतिहास को अपने भीतर समेटे यह संस्थान सिर्फ डिग्रियां नहीं बांटता, बल्कि समाज, संस्कृति और विचारों की दिशा भी तय करता रहा है।
कॉलेज के विशाल परिसर में सुबह की हल्की धूप पेड़ों की शाखाओं से छनकर जमीन पर गिर रही थी। पुराने भवनों की दीवारों पर इतिहास की परतें साफ दिखाई दे रही थीं। इसी माहौल के बीच प्राचार्य कक्ष में हमारी मुलाकात हुई कॉलेज के प्राचार्य ओम प्रकाश राय से।
सादा व्यक्तित्व, सहज मुस्कान और शब्दों में गजब की स्पष्टता… बातचीत शुरू हुई तो लगा मानो कोई शिक्षक नहीं, बल्कि गांव की चौपाल पर बैठा एक अनुभवी समाजशास्त्री देश और समाज की दिशा समझा रहा हो।


सवाल: “सर, शिक्षा जगत से जुड़ने की प्रेरणा आपको कहां से मिली?


चंद्रशेखर असली समाजवादी थे

जब बातचीत बलिया और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर पर पहुंची तो प्राचार्य के चेहरे पर गर्व साफ नजर आने लगा।
सवाल: “बलिया की धरती और चंद्रशेखर जी… उनसे क्या सीख मिली?”
उन्होंने बिना देर किए जवाब दिया—
अगर मैं कहीं कहता हूं कि मैं बलिया से हूं, तो लोग तुरंत पूछते हैं — ‘अच्छा, जहां के चंद्रशेखर जी थे?’ यही उनकी पहचान थी।”फिर उन्होंने एक ऐसा प्रसंग सुनाया जिसने बातचीत का माहौल पूरी तरह बदल दिया।
“प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वे जमीन से जुड़े रहे। हमारे गांव में एक साधारण यादव परिवार के यहां सत्यनारायण कथा थी। परिवार ने चिट्ठी लिखकर उन्हें बुलाया… और तय तारीख पर प्रधानमंत्री वहां पहुंचे। नीचे दरी पर बैठकर पूरी कथा सुनी। आज ऐसा उदाहरण कहां देखने को मिलता है?”
यह कहते समय उनकी आवाज में भावनाएं साफ महसूस हो रही थीं।


बरेली कॉलेज की सबसे बड़ी ताकत हमारी फैकल्टी है

कॉलेज की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों पर बात हुई तो प्राचार्य बेहद संतुलित नजर आए।
सवाल: “इतिहास और प्रतिष्ठा वाले इस संस्थान की सबसे बड़ी ताकत क्या है?”
उन्होंने तुरंत जवाब दिया—
हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी फैकल्टी है। हमारे पास बेहद योग्य शिक्षक हैं और उन्हीं के भरोसे कॉलेज मजबूती से आगे बढ़ रहा है।”उन्होंने माना कि जब अप्रैल 2022 में उन्होंने कार्यभार संभाला था, तब हालात चुनौतीपूर्ण थे।
“स्थिति थोड़ी गड़बड़ थी, लेकिन लगातार सुधार हो रहा है। हमारा लक्ष्य है कि बरेली कॉलेज फिर अपनी पुरानी प्रतिष्ठा हासिल करे।”

कॉलेज परिसर के बाहर से आती छात्रों की आवाजों के बीच यह भरोसा काफी मजबूत सुनाई दे रहा था।


सिलेबस विवाद पर बोले — “तकनीकी भ्रम था


हमारे छात्र उग्र नहीं हैं

छात्र राजनीति पर बात आते ही उनका लहजा बेहद मानवीय हो गया।



AI आएगा… लेकिन गुरु-शिष्य परंपरा खत्म नहीं होगी

तकनीक और AI आधारित शिक्षा पर भी उन्होंने संतुलित दृष्टिकोण रखा।
“हम आधुनिकता से इनकार नहीं कर रहे, लेकिन अपनी प्राचीन परंपरा भी नहीं छोड़ेंगे।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल कॉलेज में AI आधारित शिक्षा व्यवस्था लागू नहीं है, लेकिन भविष्य में विश्वविद्यालय और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ा जाएगा।


जब उनसे पूछा गया कि छात्रों को सिलेबस से बाहर कौन-सी किताब पढ़नी चाहिए, तो उन्होंने बिना रुके जवाब दिया—
“गीता।”
उन्होंने कहा कि गीता सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को समझने की सबसे बड़ी पाठशाला है।


बातचीत खत्म होने को थी। बाहर कॉलेज परिसर में छात्रों की हलचल बढ़ चुकी थी।
हमने आखिरी सवाल पूछा—

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