Exclusive interview-जंगल बचेंगे तो शहर भी सांस ले पाएंगे — डीएफओ दीक्षा भंडारी,वन्यजीवों की पीड़ा और हरित भविष्य पर खुलकर बोलीं दीक्षा भंडारी

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आकर्ष मिश्रा

टेलीग्राम संवाद, बरेली। बरेली की सुबह अभी पूरी तरह जागी भी नहीं थी। वन विभाग परिसर में हवा के साथ पेड़ों की पत्तियां सरसराहट कर रही थीं। दूर कहीं कोयल की आवाज सुनाई दे रही थी और परिसर में लगे पीपल और बरगद के वृक्ष मानो शहर को सांस दे रहे हों। इसी शांत वातावरण में हमारी मुलाकात हुई बरेली की प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) दीक्षा भंडारी से।
सरकारी दफ्तरों की सामान्य औपचारिकता से बिल्कुल अलग, यह बातचीत किसी प्रशासनिक इंटरव्यू से ज्यादा प्रकृति के भविष्य पर एक गंभीर संवाद जैसी थी। सामने बैठी अधिकारी के चेहरे पर पहाड़ों की सादगी थी और शब्दों में जंगलों की संवेदना। बातचीत शुरू हुई तो लगा जैसे उत्तराखंड की वादियां, इटावा सफारी के शेर, बरेली के मिनी फॉरेस्ट, तेंदुए के रेस्क्यू ऑपरेशन और जलवायु परिवर्तन की चेतावनियां एक साथ हमारे सामने जीवंत हो उठी हों।

सवाल: सड़क चौड़ीकरण में अक्सर पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद होता है। वन विभाग इसे कैसे देखता है?

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