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तलाक नहीं, आत्मसम्मान की जीत:मेरठ कोर्ट में ढोल-नगाड़ों संग बेटी का सम्मानित स्वागत, रूढ़ियों पर सीधा प्रहार- रिटायर्ड जज ने कहा—“बेटी सामान नहीं, सम्मान है लापरवाही: लिलौर झील फैमिली ट्रेन पंचर-पांच डिब्बों में से दो डिब्बों के पहियों में नहीं हवा, खराब खड़े हैं आर्ट ऑफ लिविंग परिवार त्रिवटी नाथ मंदिर में करा रहा ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन-ज्योतिर्लिंग के पावन अवशेष छह अप्रैल को बरेली पहुंचेंगी, 9 बजे शुरु होगा शिवलिंग पूजा निदेशक पश्चिमांचल ने बरेली में देखी वर्टिकल व्यवस्था, सराहा-कामर्शियल-2 में मनमानी, रामपुर बाग उपकेंद्र में अग्निशमन यंत्र खाली होने पर बिफरे निदेशक बरेली में लाइंस चेरिटेबल ब्लड सेंटर संचालन पर रोक- विभिन्न जिलों में हुई आकस्मिक छापा कार्रवाई में मिली गड़बड़ी बीएल एग्रो एक हजार गाय लेगा गोद – उद्यमी अनुपम कपूर और आशीष खंडेलवाल एक-एक हजार कुंतल भूसा देंगे दान

तलाक नहीं, आत्मसम्मान की जीत:मेरठ कोर्ट में ढोल-नगाड़ों संग बेटी का सम्मानित स्वागत, रूढ़ियों पर सीधा प्रहार- रिटायर्ड जज ने कहा—“बेटी सामान नहीं, सम्मान है

टेलीग्राम संवाद

मेरठ। आमतौर पर अदालतों के गलियारों में गूंजती खामोशी और तनाव के बीच शनिवार को मेरठ कचहरी परिसर में एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने सामाजिक सोच की जड़ों को झकझोर दिया। फैमिली कोर्ट से तलाक का फैसला आते ही जहां अक्सर मायूसी छा जाती है, वहीं यहां ढोल-नगाड़ों और फूलों की बारिश के बीच एक बेटी का स्वागत किया गया—जैसे कोई जीतकर लौटा हो।


यह मामला शास्त्रीनगर निवासी प्रणिता शर्मा का है, जिनका विवाह 14 दिसंबर 2018 को शाहजहांपुर निवासी मेजर गौरव अग्निहोत्री से हुआ था। परिजनों के मुताबिक, शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष का रवैया बदल गया और बीते 7-8 वर्षों से प्रणिता मानसिक व भावनात्मक प्रताड़ना झेल रही थीं। एक बेटे के जन्म के बावजूद हालात में कोई सुधार नहीं हुआ।
आखिरकार, न्याय की चौखट पर दस्तक देते हुए प्रणिता ने मेरठ फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की, जिस पर शनिवार को अदालत ने मुहर लगा दी। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह महज एक कानूनी प्रक्रिया का अंत नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश की शुरुआत बन गया।

वहीं, प्रणिता शर्मा ने इस मौके को अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरक संदेश में बदल दिया। उन्होंने कहा, “चुप रहना समाधान नहीं है। हर महिला को शिक्षित और आत्मनिर्भर होना चाहिए। यदि आप प्रताड़ना झेल रही हैं, तो आवाज उठाएं—परिवार का साथ और आत्मविश्वास ही आपको फिर से खड़ा कर सकता है।”

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Author: telegramsamvad

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