रुहेलखंड विश्वविद्यालय बना कानून-व्यवस्था का ‘वार रूम’ 780 पुलिस कर्मियों ने किया मंथन- एडीजी, डीआईजी से एसएसपी तक ने दिये टिप्स

टेलीग्राम संवाद

बरेली। बदलते आपराधिक कानूनों और तकनीकी न्याय प्रणाली दौर में रुहेलखंड विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम में पुलिस प्रशिक्षण की पाठशाला बन गया। पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश निर्देश पर आयोजित एक दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स में बरेली जोन के नौ जनपदों के 181 थानों के पैरोकारों और कोर्ट मोहर्रिरों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम शुभारंभ मुख्य अतिथि रुहेलखंड विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. केपी सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली में विधिक दक्षता, अभिलेखों की शुचिता और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वविद्यालय और पुलिस तंत्र के इस समन्वय को ज्ञान और प्रशासन का सशक्त संगम बताया। उन्होंने कहा कि विधिक दक्षता, अनुशासन के साथ डिजिटल पुलिस प्रणाली को धारदार बनाकर अपराधों और अपराधों की जन्मस्थली को बांझ बनाया जा सकता है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में हुआ यह प्रशिक्षण महज औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि बदलती आपराधिक संरचना अनुरूप पुलिस तंत्र को अपडेट करने की सशक्त पहल बना। अकादमिक नेतृत्व और पुलिस प्रशासन का यह समन्वय आने वाले समय में विवेचना की गुणवत्ता और अभियोजन की प्रभावशीलता को नई गति देने देगा।

तीन नए कानूनों पर गहन मंथन

प्रथम सत्र में संयुक्त निदेशक (अभियोजन) अच्छेलाल यादव ने भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला। पैरोकारों और कोर्ट मोहर्रिरों की भूमिका को आपराधिक न्याय प्रणाली की धुरी बताते हुए अभियोजन की मजबूती पर जोर दिया गया।

द्वितीय और तृतीय सत्र में उच्चतम न्यायालय और उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेशों की समीक्षा की गई। संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण) केके शुक्ल ने चेन आफ कस्टडी, रिमांड प्रक्रिया, साक्ष्य प्रस्तुतिकरण, ई-समन, आईसीजेएस, सीसीटीएनएस, ई-मालखाना और एनएसटीईपी जैसे तकनीकी बिंदुओं पर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया। हर सत्र बाद प्रश्नोत्तर माध्यम से मैदानी चुनौतियों पर चर्चा हुई।


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Author: telegramsamvad