खाद्य विभाग टेंडर घोटाला, अफसरों ने 20 % ब्लो तक कर दिए स्वीकृत

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बरेली। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में मंत्रीमंडल विस्तार हुआ, जिसमें मनोज पांडे खाद्य, रसद एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में कैबिनेट मंत्री बनाए गए। उनकी गिनती तेज तर्रार नेताओं में गिनी जाती है। इस विभाग में प्रमुख सचिव रणवीर प्रसाद भी जानकार और तेज तर्रार माने जाते हैं। कैबिनेट मंत्री बनते ही मनोज पांडे ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि विभाग में अव्यवहारिक टेंडर प्रक्रिया नहीं चलेगी, जिस पर प्रमुख सविच खाद्य ने तत्काल शासनादेश जारी कर दिया था। मगर विभागीय अधिकारियों ने भनक लगते ही बरेली मंडल में अव्यवहारिक टेंडर कर दिए, जो 20 % तक निचली दरों पर स्वीकार कर लिए। बताया जाता है अभी तक किसी ठेकेदार को टेंडर संबंधी कार्य आवंटन नहीं हुआ है। फिर भी दिशा निर्देश आते ही विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। नवागत संभागीय खाद्य विपणन अधिकारी (आरएमओ) राजेश उपाध्याय ने कहा है कि मामला गंभीर है, देखते हैं।

बरेली मंडल में पिछले दिनों सिंगल स्टेज परिवहन व्यवस्था में हुई टेण्डरिंग प्रक्रिया अव्यवहारिक तरीके से अपनाई गई। बताया जाता है कि ठेकेदार फर्मों ने डीजल आदि ईंधन में पांच-छह रुपये प्रति लीटर दाम बढ़ने पर भी 20 प्रतिशत निचली दरों पर टेंडर डाल दिए, जो अधिकारियों ने स्वीकार भी कर लिए। यह बात किसी को समझ में नहीं आ रही कि ईंधन महंगा होने पर भी ठेकेदार फर्मों ने 20 प्रतिशत ब्लो टेंडर क्यों भर दिए। यह घाटा ठेकेदार कहां से पूरा करेगा। इसका बहुत सीधा सवाल है राशन कार्ड धारक यानी लाभार्थी पर ही बोझा पड़ेगा। अव्यवहारिक टेंडर प्रक्रिया अपनाने को लेकर विभाग में खूब चर्चा है। किस ठेकेदार फर्म ने कहां-कहां ब्लो टेंडर डाले हैं, इसकी जानकारी आरएमओ राजेश उपाध्याय देने से कतरा रहे हैं।


नवागत आरएमओ राजेश उपाध्याय से सिंगल स्टेज परिवहन व्यवस्था में हुए अव्यवहारिक टेंडर प्रक्रिया संबंधी जानकारी मांगी गई। उनसे यह भी आग्रह किया गया कि किस फर्म ने कहां-कहां ब्लो टेंडर डाले हैं। उनके नाम पता बता दें। सवाल करते ही फोन पर वह भड़क गए। उन्होंने कहा कि अभी उन्हें कार्यभार संभाले दो दिन नहीं हुए हैं। मैं इतनी जल्दी कहां से बता दूं।

बता दें आरएमओ पिछले सप्ताह ही कार्यभार संभाल चुके हैं। बातचीत में उन्होंने कहा टेंडर संबंधी मामला देखेंगे, क्या हो सकता है। सिंगल स्टेज परिवहन व्यवस्था संबंधी नए निर्देश भी उन्हें मिल चुके हैं।


प्रमुख सचिव खाद्य रणवीर प्रसाद ने वर्ष 2026-27 तथा वर्ष 2027-28 हेतु सिंगल स्टेज परिवहन व्यवस्था संबंधी टेण्डरिंग प्रक्रिया और दिशा निर्देश दिए हैं, जिसमें कहा गया है कि जिन मण्डलों में माह अक्टूबर, नवम्बर में निविदा होनी शेष है, उनमें निविदा की कार्यवाही न करते हुए निविदा की शर्तों के परीक्षण हेतु खाद्यायुक्त द्वारा समिति का गठन किया जाएगा, जिसकी संस्तुतियों को परीक्षणोंपरान्त 15 दिवस में शासन को प्रेषित किया जाएगा। बिंदु बार इसकी समीक्षा की जाएगी। टेण्डर धनराशि सापेक्ष निर्धारित सिक्योरिटी मनी क्या पर्याप्त है? क्या सिक्योरिटी मनी को बढ़ाया जाना उचित नहीं होगा? क्योंकि प्रायः यह प्रकाश में आता है कि टेण्डर धनराशि के सापेक्ष सिक्योरिटी मनी कम होने पर ठेकेदार द्वारा सिक्योरिटी मनी की परवाह किये बगैर सिक्योरिटी मनी से अधिक धनराशि के खाद्यान्न की हेरा-फेरी करता है और विभाग मात्र विधिक कार्यवाही में ही उलझ कर रह जाता है और शासन को वित्तीय हानि भी उठानी पड़ती है। यदि सिक्योरिटी मनी अधिक होगी तो मूल्य के आधार पर विभागीय खाद्यान्न सुरक्षित रह सकेंगे।

प्रमुख सचिव खाद्य ने जारी परिपत्र में कहा है जिन जनपदों में निविदा कार्यवाही अभी तक नहीं की गयी है, उन जिलों
में अग्रिम आदेशों तक निविदा की कार्यवाही न की जाय। जहां निविदा कार्यवाही प्रचलित है, वहां पारदर्शिता से निविदा प्रक्रिया संपन्न कराई जाए। निविदाकर्ताओं के मध्य कोई भी दुरभिसंधि न हो। किसी भी निविदा में ऐसी दरों का अंकन नहीं किया जाए, जो अव्यवहारिक है। प्रतिस्पर्धा को कम करने के उद्देश्य से अनावश्यक तकनीकी कारण दिखाकर निविदाएं निरस्त न की जाय। शासन द्वारा निविदा के संबंध में दिये गये दिशा-निर्देशों और विभागीय निविदा संबंधी नियमावली के बिंदुओं का कड़ाई से पालन कराया जाये। जबकि बरेली मंडल में मनमाने तरीके से टेंडर हुए हैं। बताया जाता है कि जिन दरों पर फर्मों टेंडर भरा है उससे साफ है कि इससे विभाग को क्षति हो सकती है, और सीधे तौर पर राशन कार्ड लाभार्थी को पूरा माल मिलना संभव नहीं है।

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