निर्माण कार्यों में मनमानी, मानकों के विपरीत विद्युतीकरण
फुटपाथ बने एक्सीडेंट जोन, जगह-जगह उधड़ने लगीं सड़कें
आर. बी. लाल
टेलीग्राम संवाद,बरेली। दिल्ली हाईवे पर बसा परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र इन दिनों तमाम समस्याओं से जूझ रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) सजाने संवारने में लगा है। इसके तहत यूपीसीडा रोड नंबर एक और दो पर स्वागत द्वार का निर्माण करा रहा है। इन दोनों प्रवेश द्वार के निर्माण पर 80 लाख रुपये से अधिक धनराशि खर्च की जा रही है। निर्माण कार्य शर्तों के अनुसार दोनों स्वागत द्वार चालू वित्तीय वर्ष में बनकर तैयार होने थे, लेकिन ठेकेदार फर्म और यूपीसीडा की मनमानी की जुगलबंदी से अगले दो माह तक निर्माण कार्य पूरे होने के आसार नहीं हैं। निर्माण कार्य के चलते कार्यदायी संस्था ने एक रोड पूरी तौर से बंद कर दिया है। आवागमन बंद होने से औद्योगिक इकाईयों तक पहुंचने वाले भारी वाहन ट्रक आदि प्रवेश नहीं कर पा रहे है। इन वाहनों को जुगाड़ से इधर-उधर करके ले जाया जाता है। उद्यमियों का कहना है कि स्वागत द्वार निर्माण कार्य पर अनावश्यक खर्चा किया जा रहा है। सौंदर्यकरण के नाम पर औद्योगिक इकाईयों परिचालन करना मुश्किल हो रहा है।
बरेली और आसपास क्षेत्रों में औद्योगिक क्रांति लाने और उद्यमियों को सस्ते दामों पर भूमि उपलब्ध कराने के लिए करीब 50 साल पहले लगभग पौने चार सौ एकड़ भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया था। बताया जाता है कि इन दिनों 250 से अधिक औद्योगिक इकाईयां संचालित हैं, जिनमें स्थाई, अस्थाई, कुशल और अकुशल मिलाकर 20 हजार से अधिक लोग कार्य करते हैं। परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में अब प्लाट खाली नहीं हैं, लेकिन इतनी पुरानी इंडस्ट्रियल एरिया अपनी बदहाली सार्वजनिक करती जरूर नजर आती है। सड़क नाली, नाला और अन्य निर्माण कार्य मानकों के विपरीत हुए हैं। पानी निकासी संबंधी समस्या अक्सर उद्योग बंधु की बैठकों में उठती रही है, लेकिन मौके पर जहाँ नाला बनाया गया है, उसकी चौड़ाई और गुणवत्ता देखकर हर कोई कह सकता है कि यह नाला ही नहीं है।


दो इंट्री गेट पर स्वागत द्वार
80 लाख रुपये से अधिक लागत से तैयार हो रहे दो स्वागत द्वार इन दिनों उद्यमियों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि मुसीबत बने हुए हैं। लापरवाही, मनमानी और भ्रष्टाचार का जीता जागता नाजारा निर्माण कार्यों में देखा जा सकता है। मनमानी की हद तो यह है कि अधिकारियों और ठेकेदार ने मिलकर दोनों स्वागत द्वार एक साथ बनाना शुरू कर दिए, जिससे एक इंट्री गेट की सड़क पूरी तौर से बंद हो गई, जो काम मार्च से पहले पूरा हो जाना चाहिए वो अभी काफी दूर नजर आ रहा है। बताया जाता है इस स्वागत द्वार से हर दिन सौ से अधिक भारी वाहन सामान लाते और ले जाते हैं। निर्माण कार्य के चलने से इन वाहनों का संचालन बंद हो गया है। संबंधित औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचने के लिए वाहन काफी चक्कर लगाकर आ रहे हैं।

फुटपाथ पर लगा दिए बिजली पोल
परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में सड़क, सुधार, चौड़ीकरण और निर्माण कार्य आदि भी कराया गया है। करोड़ों रुपये बिना किसी प्लानिंग के ही खर्च कर दिया गया। बिजली खंभे फुटपाथ और नाली के बीच लगे थे, लेकिन नए सिरे से विद्युतीकरण कार्य होने पर बिजली खंभे सड़क की ओर फुटपाथ पर लगा दिए। यानी इस लापरवाही और मनमानी से सड़क की चौड़ाई कम हो गई और जगह-जगह एक्सीडेंट प्वाइंट बन गए हैं।

उधड़ने लगी जगह-जगह सड़क
परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में करोड़ों रुपये लागत से सीमेंटेड और तारकोल से सड़कें बनाई गई हैं। कुछ स्थानों पर काम हो रहा है, तो कई जगह काम पूरा किया जा चुका है। तारकोल, सीमेंट और बजरी आदि मानक के अनुरूप मिश्रण न होने से मोड़ पर पहुंचने वाले भारी वाहनों से सड़क उधड़ने लगी है। जानकार बताते हैं कि मोड़ पर सामान से लदा वाहन जब घूमता है तब उसके पिछले पहिए तेजी से रगड़ पैदा करते हैं, जिससे सड़क जगह-जगह खराब होने लगी है। बताया जात है कि इंडस्ट्रियल एरिया में जो भी निर्माण कार्य होता है उसका सुपरविजन कोई नहीं करता, जिससे गुणवत्ता और मानक दोनों ही पूरे नहीं होते हैं। बदहाली की स्थिति यह है कि एक प्लाइवुड फैक्ट्री की मनमानी के चलते पूरी सड़क ही बंद हो गई है। यूपीसीडा या अन्य किसी एजेंसी ने प्रभावी कार्रवाई करना भी नहीं समझा।

दुर्घटनाग्रस्त विद्युतीकरण
सड़क किनारे विद्युतीकरण पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। नए खंभे लगाकर लाइनें बिछाई गई हैं। इस कार्य में घोर लापरवाही और मनमानी की गई है। नए विद्युतीकरण कार्य में कहीं भी अर्थिंग कार्य नहीं किया गया है। जानकार बताते हैं कि उच्चशक्ति लाइन के प्रत्येक खंभे को अर्थिंग से जोड़ा जाना चाहिए, जिससे बारिश आदि में करंट न फैले। इस नियम को पूरी तौर से अनदेखा किया गया है। विद्युत सुरक्षा निदेशालय अधिकारी भी आंखें बंद किए बैठे हैं। कई स्थानों पर क्रांस लाइनें बनीं हैं, जो मानक के अनुरूप ऊंचाई पर नहीं हैं।
अप्रैल तक स्वागत द्वार निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। किन्हीं कारणों से समय पर काम पूरा नहीं हो पाया। ठेकेदार फर्म पर भी दबाव दिया जा रहा है। निर्देश न मानने पर नियमानुसार कार्रवाई भी प्रस्तावित है।
प्रभात यादव, अधिशासी अभियंता, यूपीसीडा
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परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया समृद्ध बनाने के लिए यूपीसीडा पूरी तौर से प्रयासरत है। इसके तहत सड़क सुधार चौड़ीकरण, सुंदरीकरण, स्वागत द्वार, फुटपाथ, विद्युतीकरण कार्य आदि किया जा रहा है। स्वागत द्वार निर्माण से उद्यमियों को जो समस्या हो रही है उसका निस्तारण भी प्राथमिकता से होगा। इसके लिए अधिशासी अभियंता को निर्देशित किया गया है।
मंसूर कटियार, क्षेत्रीय प्रबंधक यूपीसीडा

परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया करीब पांच दशक पुराना है। लगातार मंडल और जिला स्तर पर आयोजित उद्योग बंधु बैठकों में इंडस्ट्रियल एरिया संबंधित मामले उठाए जाते हैं। काफी अव्यवस्थाएं हैं। स्वागत द्वार मनमानी का एक जीता जागता उदाहरण है। निर्माण कार्य के चलते आवागमन बंद हो गया है, जिससे तमाम औद्योगिक इकाईयां प्रभावित हैं। ठेकेदार फर्म अपनी मनमानी और मानकों के विपरीत कार्य करने में जुटा है।
विमल रेवाड़ी, वरिष्ठ उद्यमी, परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया












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