मनमानी: बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री आवास पर 22 लाख रुपये बिजली बिल बकाया, आरसी जारी

टेलीग्राम संवाद

बरेली। एडीएम कंपाउंड स्थित बरेली सिटी मजिस्ट्रेट आवास एक बार फिर चर्चा में है। बिजली विभाग ने इस आवास पर करीब 22 लाख रुपए बिजली बिल बकाया दिखा कर आरसी जारी कर दी है। यह कारनामा अधिशासी अभियंता वाणिज्यक वर्टिकल द्वितीय कार्यालय से हुआ है। बताया जाता है मनमानी पर जब प्रशासन ने नाराजगी जताई तब अधिशासी अभियंता सूर्य कुमार ने आरसी वापस करने हेतु पत्र लिख दिया।

विभागीय लापरवाही और मनमानी से प्रशासन में हलचल मच गई है। बिजली विभाग ने इस आवास पर बकाया बिल चलते 22 लाख रुपये से अधिक आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी कर दिया। जैसे ही यह आरसी कलेक्ट्रेट पहुंची, उच्चाधिकारियों में खलबली मच गई और मामले को दबाने की कोशिशें शुरू हो गईं। क्योंकि जिस आवास पर आरसी जारी हुई है उसमें चर्चित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री रहते थे। श्री अग्निहोत्री ने अपने पद और सेवा से पिछले दिनों त्यागपत्र दे दिया है। वे आजकल अपनी बयान बाजी से चर्चा में बने हुए हैं। माना जा रहा है मामला भी तूल पकड़ सकता है। इसलिए बिजली विभाग अधिकारी भी परेशान दिख रहे हैं।

यह है मामला

रामपुर बाग स्थित बिजली विभाग कॉमर्शियल-2 वर्टिकल कार्यालय से अधिशासी अभियंता की लापरवाही से यह मांगपत्र वसूली के लिए प्रशासन को भेजा गया था। आरसी में 22 लाख 73 हजार 932 रुपये बकाया राशि दर्शायी गई थी। यह वही सरकारी आवास है, जहां से निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी मुद्दे पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया था। इसी कारण यह आवास पहले से चर्चा में रहा है।

प्रशासन ने जताई नाराजगी

आरसी कलेक्ट्रेट पहुंचते ही अधिकारियों ने कड़ी नाराजगी जताई। मामला सार्वजनिक न हो, इसके लिए जिला संग्रह कार्यालय से लेकर तहसील सदर तक फाइल को गोपनीय रखने के निर्देश दिए गए। प्रशासनिक स्तर पर आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद बिजली विभाग अधिकारी बैकफुट पर आ गए। विभागीय नियमानुसार किसी सरकारी अधिकारी अथवा आवास आदि पर कोई बकाया है तब उस पर कोई आरसी जारी नहीं होती है। जबकि अधिशासी अभियंता कामर्शियल द्वितीय द्वारा बरती गई लापरवाही से विभागीय छवि प्रभावित हुई है। बिजली विभाग बरेली आनन-फानन में आरसी वापस लेने में जुट गया है। उधर, पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री समर्थक इस मुद्दे पर लामबंद होते दिख रहे हैं।

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Author: telegramsamvad