बरेली: बिजली विभाग बिल घोटाला, जांच शुरू

टेलीग्राम संवाद
बरेली। बिजली विभाग में कुछ अफसरों और कर्मचारियों ने मिलकर 144 बिलों में भारी भरकम रकम बिल संशोधन नाम पर घटा दी। यह खेल लंबे समय से चल रहा था लेकिन दो माह पहले यह पकड़ में आया। जब तक करोड़ों रूपया विभाग नुकसान उठा चुका था।
मामला खुलते ही विभाग में हड़कंप मच गया। चीफ इंजीनियर बरेली जोन प्रथम ज्ञान प्रकाश ने विस्तृत गोपनीय रिपोर्ट मुख्यालय में सौंपी। इसके बाद मुख्यालय ने उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी।

उच्च स्तरीय जांच समिति अध्यक्ष नरेश राम नेतृत्व में बुधवार पूर्वाहन बरेली पहुंची और जांच शुरू कर दी। बताया जाता है शुरुआती दौर में काफी गड़बड़ियां मिली है। बुधवार शाम तक जांच होती रही।
गोपनीय जांच होती रही। उधर, विभाग में अफरा तफरी फैली रही।

अभिलेख जुटाये

टीम ने 2018 से अब तक तैनात रहे एक्सईएन, लेखाकार व कार्यकारी सहायक का डेटा समेत सभी डेटा जुटाया। शुरुआत जांच से ही रामपुर बाग स्थित विभागीय कार्यालयों में हड़कंप मचा रहा। बताया जाता है शहर में वर्टिकल व्यवस्था लागू होने पर लागू व्यवस्था दौरान तत्कालीन तृतीय वितरण खंड में तैनात रहे दो अधिशासी अभियंताओं अनुज गुप्ता व सुरेंद्र गौतम द्वारा बिल रिवीजन नाम पर जमकर खेल किया गया। इस खेल में विभागीय कर्मचारी भी शामिल बताए जाते हैं।

तत्कालीन अधीक्षण अभियंता नगर ब्रह्मपाल ने 144 मामलों में 67,02,408 रुपये रकम घटाये जाने का मामला पकड़ा था। इसके बाद उन्होंने मुख्य अभियंता माध्यम से मामले की विस्तृत जांच कराने की मुख्यालय से आग्रह किया था। मध्यांचल मुख्यालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों अभियंताओं को चार्जशीट जारी करने साथ ही चार सदस्यी जांच कमेटी गठित कर दी। मध्यांचल मुख्यालय में तैनात मुख्य अभियंता नरेश कुमार अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी में मुख्यालय अधिशासी अभियंता कामर्शियल मन्नु सिंह, अधिशासी अभियंता आईटी रंजीत कुमार व लेखाधिकारी सूरज कुमार सदस्य नामित किए गए हैं। चारों अधिकारी बुधवार पूर्वाहन रामपुर बाग स्थित कार्यालय पहुंचे। कामर्शियल प्रथम वर्टिकल (पूर्व में तृतीय वितरण खंड ) व कामर्शियल द्वितीय वर्टिकल (पूर्व में द्वितीय वितरण खंड) कार्यालय जाकर अधिशासी अभियंताओं से तमाम जानकारी ली।

शुरुआती जांच में ही मिली अनियमितता

जांच कमेटी ने चार्जशीट व मुख्यालय को भेजी गई रिपोर्ट आधार पर जांच शुरू की तो शुरुआत में ही तमाम अनियमितता मिली। इसके बाद जांच कमेटी ने अब मामले की जांच 2018 से करनी शुरू कर दी है। वहीं जांच कमेटी के सख्त रवैये से पूरे विभाग में हड़कंप मचा रहा। सभी कार्यालयों में केवल जांच कमेटी संबंधी चर्चा रही।

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Author: telegramsamvad