Breaking News
बरेली में दो बहनों ने फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर की लाखों की ठगी- पुलिस ने दोनों बहनों समेत तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर भेजा जेल मई दिवस से पहले मजदूर संगठनों ने बांटे पर्चे, खुफिया तंत्र अलर्ट- -गुड़गांव नोएडा, पानीपत के श्रमिकों को न्याय दिलाने के लिए 1 मई को होगी सभा गंगा एक्सप्रेस-वे भारत में सबसे लंबी परियोजना, प्रधानमंत्री कल करेंगे उद्घाटन,अडाणी ग्रुप ने निर्माण में दिया है विशेष योगदान सेहत से खिलवाड़: रविंद्रा, बाबर्ची, सुल्तान एक्टिव, सनवलिया ,राधा गोल्ड सरसों तेल, लैब में फेल-14 फर्मों पर बड़ी कार्रवाई, खाद्य तेल उत्पादन इकाईयों पर लगा प्रतिबंध टेलीग्रामसंवाद ईपेपर दिनांक :26 अप्रैल 2026 दिन: शनिवार उर्स-ए-ताजुश्शरिया पर ऐलान, 200 छात्रों को NEET की फ्री कोचिंग-फरमान मियाँ बोले- जरूरतमंदों के ऑपरेशन भी कराएंगे,आज से 15 मई तक होंगे रजिस्ट्रेशन

बरेली में दो बहनों ने फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर की लाखों की ठगी- पुलिस ने दोनों बहनों समेत तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर भेजा जेल

बेरोजगारों से नौकरी लगवाने के नाम पर करती थीं ठगी, गाड़ी पर लिखा रखा था एडीएम एफआर

टेलीग्राम संवाद

बरेली। बरेली नगर स्थित बारादरी क्षेत्र में ग्रीन पार्क कॉलोनी निवासी दो बहनों ने मिलकर बेरोजगारों को शिकार बनना शुरू कर दिया। इसके लिए वह फर्जी आईएएस अधिकारी बन गई। उन्होंने चार बेरोजगारों से नौकरी लगवाने के नाम पर लाखों रुपये ठग लिए। सच्चाई सामने आने पर पीड़ित बारादरी थाने में दोनों बहनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मंगलवार अपराहन दोनों बहनों समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

फाइक एन्क्लेव निवासी प्रीति लॉयल ने बारादरी थाना प्रभारी विजेंद्र सिंह को बताया कि ग्रीन पार्क निवासी शिखा पाठक ने उनसे जान पहचान बढ़ाई। शिखा शर्मा ने उन्हें बताया कि उसकी बहन डॉ. विप्रा शर्मा आईएएस अधिकारी हैं। जो गजरौला में एडीएम वित्त पद पर तैनात हैं। उसकी सचिवालय में काफी पहचान है और कई लोगों की नौकरी लगवा चुकी हैं। प्रीति उसकी बातों में आ गईं। उसने अपनी कॉलोनी निवासी आदिल खान, सतीपुर निवासी संतोष कुमार व बारादरी निवासी मुशाहिद को यह बात बताई।
चारों ने सरकारी नौकरी पाने के लालच में शिखा माध्यम से विप्रा से मुलाकात की और उनके मांगने पर कई बार में कई लाख रुपये उसे दे दिए। दोनों बहनों द्वारा की जा रही ठगी में दीक्षा पाठक का भी नाम शामिल है।

लाखों वसूले, और थमा दिए फर्जी नियुक्ति पत्र

फर्जी आईएएस बनीं दोनों बहनों ने नौकरी पाने वालों को मनीषा त्रिघाटिया, आयुक्त व सचिव उप्र शासन के नाम से जारी नियुक्ति पत्र सौंप दिए। उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर व अन्य समकक्ष पदों पर नियुक्त दिलाने का वादा पूरा करने की बात कही। चारों लोग ज्वॉइनिंग के लिए विभूति खंड लखनऊ पहुंचे तो पता लगा कि इस तरह की कोई नौकरी निकली ही नहीं है।

ठगी करने में शामिल था पूरा परिवार

पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने जानकारी ली तो पता लगा कि पूरे खेल में दोनों बहनों के साथ ही इनका परिवार भी शामिल है। बताया गया कि विप्रा व शिखा इसी तरह लोगों को फंसाकर रुपये ऐंठती थीं। दोनों बहनों ने कई अन्य लोगों को भी ठगा है।

11 लाख रुपये ठगी करने का आरोप

बारादरी थाना प्रभारी विजेंद्र सिंह ने बताया कि फाइक एन्क्लेव निवासी प्रीति लॉयल समेत चार लोगों ने रिपोर्ट कराकर इन दोनों बहनों पर करीब साढ़े 11 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ कर मामला दर्ज कर लिया है। दोनों बहनों के साथ गैंग में कुछ अन्य लोग भी बताए जा रहे हैं, जो ठगी का रैकेट चलाने में इनकी मदद करते थे।

दिल खोलकर करती थीं खर्चा

जांच में पता चला है कि तीनों लोग खर्चा करने में कोई कमी नहीं रखती थी। एक साथ हजारों रुपये से शॉपिंग की जाती थी। महंगे होटल में रुकना, ब्रांडेंड कपड़े पहनना, महंगे मोबाइल चलाना उनका शौक था। दीक्षा ने कुछ समय पहले ही पवन विहार में अपना नया घर लिया था। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है। दीक्षा ने बीएससी की पढ़ाई की है।

चार साल में हो गया था तलाक

विप्रा की शादी 2017 में हुई थी। उसके बाद उसका पति से विवाद हो गया। विवाद धीरे धीरे इतना बढ़ा की तलाक तक पहुंच गया। 2021 में दोनों ने सहमति से तलाक ले लिया। उसके बाद उनकी आपस में कभी कोई मुलाकात नहीं हुई।

साइट से तलाशते थे ‘शिकार’

जांच में यह भी सामने आया है कि बड़ी बहन शिखा एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर काम करती थी। वहां आने वाले युवकों से संपर्क कर वह उनकी नौकरी और करियर से जुड़ी जानकारी जुटाती और फिर उन्हें सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर अपनी बहन के पास भेज देती। इसके बाद फर्जी नियुक्ति पत्र और पदों का लालच देकर उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी।

कुछ महीनों तक देते थे सैलरी

ठग गैंग भरोसा जीतने के लिए फर्जी ज्वाइनिंग लेटर देने के बाद कुछ माह तक सैलरी भी भेजता था। ताकि किसी को शक न हो। इसके बाद वह सैलरी देना बंद कर देता था। इसके लिए उन्होंने अलग से एकाउंट भी खुलवाया था।

डबल एमए और पीएचडी बताया

पुलिस पूछताछ में विप्रा ने पुलिस को बताया कि उसने रूहेलखंड विश्चविद्यालय से इतिहास और इंग्लिश में डबल एमए किया है। इसके बाद उसने आगरा के एक कॉलेज से पीएचडी की। जिसके बाद वह अपने नाम के आगे डाॅ लगाने लगी। लेकिन जब उनसे उनका पीएचडी दिखाने के लिए कहां गया तो वह कुछ भी नहीं दिखा सकी।

25-30 लोगों को बना चुकी है निशाना

जांच में यह भी सामने आया है की बरेली में चार लोगों से ही ठगी नहीं की गई। बल्कि इससे पहले उन्होंने प्रदेश में 25-30 लोगों को नौकरी का झांसा देकर अपना निशाना बनाया है। अब पुलिस उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। जिन लोगों से इसी तरह ठगी कर रुपये लिए गए है।

आठ साल बरेली और प्रयागराज में रहकर की यूपीएससी की तैयारी

डॉ विप्रा शर्मा ने बताया कि उन्होंने 2012 से 2020 तक करीब आठ साल से बरेली और प्रयागराज में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रही थीं। एक बार उन्होंने प्री पास किया था, लेकिन लंबे समय तक प्रयास के बावजूद जब सफलता हाथ नहीं लगी तो उन्होंने खुद को ही ”अफसर” घोषित कर दिया। इसके बाद से शिखा और दीक्षा बड़ी बहन विप्रा को अफसर बताने लगे। वर्ष 2020 से शुरू हुआ ठगी खेल में पहले विप्रा एसडीएम थी फिर खुद ही अपना प्रमोशन करते हुए खुद को एडीएम बना लिया।

छवि मजबूत करने को खरीदी लग्जरी कार


पुलिस अनुसार आरोपियों ने अपनी छवि मजबूत करने के लिए करीब 22 लाख रुपये की लग्जरी कार खरीदी, जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार और एडीएम लिखवाया गया था। यही नहीं, तीसरी आरोपी दीक्षा पाठक खुद को फर्रुखाबाद में तैनात बीडीओ बताती थी। इस पूरे सेटअप जरिए बेरोजगार युवाओं को यह यकीन दिलाया जाता था कि उनकी पहुंच शासन- प्रशासन में ऊंचे स्तर तक है।

आरोपियों से 4.50 लाख रुपये व लग्जरी कार बरामद

पुलिस ने आरोपियों से कूटरचित दस्तावेज बरामद किए है। इसके अलावा 10 चैक बुक, 04 मोबाइल फोन (आईफोन व वीवो कम्पनी) घटना में प्रयुक्त एक कार MAHENDRA XUV 700 रंग सफेद UP25 EC3222,दो लैपटाप, 4.50 लाख रुपये नगद, 03 पासबुक, 55 लाख रुपये विभिन्न खातो में फ्रीज किया है।

telegramsamvad
Author: telegramsamvad

Our Visitor

1 0 1 2 6 1
Total Users : 101261
Total views : 1222187