शासन ने मांगी विस्तृत आख्या, जिम्मेदार लीपापोती में जुटे
शिकायतकर्ता बोले- जो आरोपी वही करेंगे करोड़ों रुपये घपले की जांच
डीडीपुरम में स्ट्रीट वेंडरों के लिए बना प्रोजेक्ट, खुलने लगे बड़े शोरूम और मयखाना
टेलीग्राम संवाद
बरेली। डीडीपुरम स्थित निर्माणाधीन फूड कोर्ट परियोजना में कई गंभीर आरोप लगे हैं। शासन ने इसकी जांच भी शुरू करा दी है। राज्य मिशन निदेशक के संस्तुति सहित आख्या तलब करने पर नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़े अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है। परियोजना में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी आदि गंभीर आरोप रुहेलखंड उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार मेहरोत्रा ने लगाए हैं। शिकायती पत्र पर संगठन अध्यक्ष मनोज कपूर, कोमल रस्तोगी, पार्षद जय प्रकाश राजपूत, कृष्णकांत आदि ने हस्ताक्षर किए हैं, जिसे शासन ने गंभीरता से लिया है।


रुहेलखंड उद्योग व्यापार मंडल ने नगर विकास मंत्री, प्रमुख सचिव नगर विकास आदि को प्रेषित शिकायती पत्र में कहा गया है कि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के तहत स्ट्रीट वेंडर के लिए डीडीपुरम में स्थान आरक्षित किया गया, जहां ठेले आदि लगाने वाले छोटे दुकानदारों के लिए स्थान दिया जाना था। परियोजना में टीन शैड भी बनाया गया था, लेकिन अचानक पूरा ले आऊट, मानचित्र और परियोजना ढांचा ही बदल गया। शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि यह सब गड़बड़ी संबंधित अधिकारियों और ठेका लेने वाले एजेंसी की मिलीभगत से हुआ है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए राज्य मिशन निदेशक, स्मार्ट सिटी मिशन ने पत्र जारी कर मंडलायुक्त/अध्यक्ष बरेली स्मार्ट सिटी से पूरे मामले की जांच कर स्पष्ट संस्तुति सहित रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है। यह कार्रवाई नगर विकास विभाग के निर्देशों के क्रम में की गई है। शासन को भेजी गई शिकायत में डीडीपुरम स्थित निर्माणाधीन फूड कोर्ट परियोजना में तमाम भृष्टाचार, मनमानी और हेराफेरी संबंधी कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रोजेक्ट पर लगभग 3.02 करोड़ रुपये के सरकारी धन के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल हैं। साथ ही यह भी आरोप है कि परियोजना कारण स्ट्रीट वेंडर हित प्रभावित हुए हैं और कई प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
रूहेलखंड उद्योग व्यापार मंडल प्रदेश अध्यक्ष द्वारा प्रमुख सचिव नगर विकास को भेजी गई शिकायत के आधार पर नगर विकास अनुभाग-9 ने मामले का संज्ञान लिया। इसके बाद राज्य मिशन निदेशक ने संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की बिंदुवार जांच कराने के निर्देश दिए हैं। आदेश पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं का परीक्षण कर तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार की जाए। जांच के बाद संबंधित अधिकारियों की संस्तुति सहित रिपोर्ट मिशन निदेशालय को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
विवादों में रहा फूड कोर्ट
डीडीपुरम रोड स्थित नगर निगम की बेशकीमती जमीन पर फूड कोर्ट का प्रस्ताव मंजूर हुआ था। पहले फड़ विक्रेताओं को फूड कोट में जगह देनी थी, जिसका प्रस्ताव पारित किया गया था। बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने 5 नवंबर 2024 को एड टेक प्रिंट एंड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड से मल्टी लेवल कार पार्किंग (33 कार स्पेस), फूड कोट परिसर और लाइट एंड साउंड शो के संचालन का अनुबंध किया था। चार से पांच लाख सालाना ठेका 15 साल के लिए दिया था। इस ठेके पर आपत्ति लगी। शिकायत हुई जिसमें आरोप लगे कि जहां बड़ी संख्या में लोगों के आने-जाने और भोजन करने की व्यवस्था होगी, वहां अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन सबसे पहली आवश्यकता है। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमों की अनदेखी की जा रही है। आरोप है कि निर्माण स्थल पर न तो फायर सेफ्टी का प्लान है और न बीडीए से नक्शा पास है। ऐसे में भविष्य में किसी हादसे की स्थिति में जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। अब शासन स्तर पर जांच के आदेश जारी होने के बाद पूरे प्रकरण पर अधिकारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होने की संभावना बढ़ गई है।

फूड कोर्ट में रेडीमेड गारमेंटशोरूम का क्या काम
शिकायतकर्ता राजकुमार मेहरोत्र ने कहा है कि गरीब दुकानदारों को कारोबार स्थल उपलब्ध कराने के लिए फूड कोर्ट योजना बनी। इसके तहत परियोजना शुरू हुई, लेकिन कुछ अधिकारियों और ठेकेदार फर्म के बीच साठगांठ हो गई और धीरे-धीरे फूड कोट बड़े-बड़े ब्रांडेड शोरूम का अड्डा बनने लगा। कई नामी गिरामी शोरूम तैयार हो रहे हैं। शिकायतकर्ता ने कहा है कि इन शोरूम का फूड कोर्ट में क्या काम। इससे गरीब वेंडर का कोई भला नहीं होने वाला है। इससे बड़े कारोबारियों को बेहतर स्थान देने की साजिश है।
निष्पक्ष जांच की उम्मीद कम
श्री मेहरोत्रा ने यह भी कहा कि शासन से जो जांच आई है उस पर निष्पक्ष आख्या लगना मुश्किल लग रहा है। क्योंकि कुछ आरोपी अफसर ही इसकी जांच में लगाए गए हैं, जो मन मुताबिक आख्या तैयार करने के लिए लीपापोती में जुटे हैं। उन्होंने साफ कहा है कि अगर न्याय नहीं मिला तो वह जनहित याचिका दायर करेंगे और करोड़ों का घपला और गरीबों से धोखाधड़ी करने वालों को बेनकाब किया जाएगा। परियोजना से जुड़े दस्तावेजों और स्थानीय चर्चाओं के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या परिसर में भविष्य में बार या शराब दुकान जैसी गतिविधियों को भी अनुमति देने की योजना है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शिकायतकर्ताओं ने जांच में इस पहलू को भी शामिल करने की मांग की है।



मांगी आरटीआई
ग्रीन पार्क निवासी अजय कुमार गोयल ने फूड कोर्ट में हुई मनमानी, भ्रष्टाचार और करोडों रुपए की हेराफेरी संबंधी आरोप लगाए हैं। उन्होंने फूड कोर्ट प्रोजेक्ट में हुए बदलाव पर भी सवाल उठाएं हैं।उन्होंने कहा है कि गरीबों के लिए परियोजना बनी थी। अब बड़े कारोबारी अपने शोरूम खोलने की तैयारी कर रहे हैं। ब्रांडेड शोरूम खोलने और शराब बिक्री आदि भी फूड कोर्ट में करने की तैयारी है।श्री गोयल ने विभिन्न बिंदुओं पर आरटीआई मांगी थी लेकिन संबंधित अफसरों ने जवाब नहीं दिया।











