बरेली में उतरा झारखंड, परंपरागत हुई कर्मा पूजा

आदिवासी समाज ने नृत्य और गीतों से प्रस्तुत की संस्कृति

टेलीग्राम संवाद

बरेली। शहरी चमक में रहने वाले लोग आदिवासी समाज और उनकी संस्कृति से काफी दूर हैं। शहरी सभ्यता कितनी भी बदल गई हो लेकिन आदिवासी आज भी पुरानी परंपरा और संस्कृति संजोये हुये हैं। इसका नजारा कर्मा पूजा पर दिखा। आदिवासी उत्थान समिति ने आयोजन कर झारखंड छटा बिखेरी।

समिति ने सिविल लाइंस क्षेत्र में कर्मा पूजा आयोजन किया। आदिवासी व जनजाति समाज के कलाकारों ने नाच गाकर प्रकृति को याद किया, कृतज्ञता ज्ञापित कर प्रकृति और जीवन में संतुलन बनाये रखने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम मुख्य आयोजक धनेश्वर भगत और उनकी टीम ने हर साल की तरह इस साल भी इस अभूतपूर्व कार्यक्रम को आयोजित किया। कार्यक्रम में बरेली में रहने वाले जनजाति समाज से अधिकांश लोग शामिल हुए।

धनेश्वर भगत ने बताया कि दूर दराज के क्षेत्रों से आकर आदिवासी समाज यहां विभिन्न नौकरियों और व्यावसायों में कार्य करता है। उन्होंने बताया विधि विधान और परंपरा अनुसार कर्मा पूजा बाद समस्त सामग्री गंगा में प्रवाहित कराया गया।

मुख्य अतिथि व रेलवे अधिकारी सत्य नारायन रहे। बेलस खल्खो, अमोन लकड़ा, अंकुर, भद्र गुप्त, धनेश्वर, अर्जुन भगत, बिलचन एक्का, विवेक आनंद, राम विलास आर्य, एरियर कांडूलना , वुधेश्वर भगत, सोमे सिंह, बसंत लाल, विनोद कुमार, संदीप उरांव, नेहरू भगत आदि मौजूद रहे।