परिवार और समाज से बहिष्कृत बुज़ुर्ग महिलाओं की कहानी है ‘और एक सच’ मंचन

एसआरएमएस रिद्धिमा में रुबरू थिएटर दिल्ली ने किया मंचन

विशेष संवाददाता

टेलीग्राम संवाद, बरेली। श्रीराम मूर्ति स्मारक रिद्धिमा में रविवार शाम रुबरू थिएटर दिल्ली ने ‘और एक सच’ नाटक मंचन किया। अजीज कुरेशी की परिकल्पना और काजल सूरी निर्देशन से सजे इस नाटक में परिवार से तिरस्कृत और समाज से बहिष्कृत बुज़ुर्ग महिलाओं की जिजीविषा का मंचन किया गया। इसकी कहानी एक साथ रहने वाली दो ऐसी बुजुर्ग महिलाओं के इर्दगिर्द घूमती है, जिन्हें समाज ने छोड़ दिया है। दोनों लड़ती झगड़ती हैं, लेकिन एक दूसरे के बिना नहीं रह सकती।

इस नाटक में यह भी दिखाया गया है कि झूठ, अंधविश्वास, हार सबसे बड़े दुश्मन हैं।
द्वंद्व के चलते वह अंत में सभी को एक मार्मिक अपील के जरिए कहती है कि सबसे बड़ा दोषी है, ये पुरुष समाज जो कदम-कदम पर एक महिला को खिलौना समझता है। उसकी भावनाओं से लगातार खिलवाड़ करता है। दोनो औरतों की नोकझोंक नाटक को हास्य प्रधान भी बनाता है। नाटक में मुख्य पात्र बानों की भूमिका इसकी निर्देशक काजल सूरी ने निभाई जबकि दूसरी मुख्य पात्र महिला सलमा और सास की दोहरी भूमिका में जसकीरण चोपड़ा ने अभिनय किया। शुभम शर्मा ने (समय और बाबा नाड़े शाह), कृष बब्बर (चेला), तनिषा गांधी (भूरी और खैरन), आशा खन्ना (सास), प्रवीण (नेता जी), हर्षित (मास्टरजी), गीता सेठी (बहु और चाची), नीरज तिवारी (लल्ला) ने अपनी अपनी भूमिकाओं में बेहतरीन अभिनय किया।

नाटक में मेकअप रशीद और संगीत संचालन जिम्मेदारी स्पर्श रॉय ने निभाई। प्रोडक्शन मैनेजर रोहित कुमार और प्रेसिडेंट रुबरू समीर रहे।
इस मौके पर एसआरएमएस ट्रस्ट संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति, आशा मूर्ति, आदित्य मूर्ति, डा. प्रभाकर गुप्ता, डा. अनुज कुमार आदि मौजूद रहे।

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Author: Telegram Samvad