चर्चित शख्सियत…..वीरेंद्र वत्स

नज़र नहीं है नज़ारों की बात करते हैं, ज़मीं पे चाँद-सितारों की बात करते हैं…

भाषाओं की दीवार गिराती सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक जुबां पर राष्ट्रवादी कवि की रचनाएं
राज्य सूचना आयुक्त की ग़ज़ल हिंदी के अलावा पंजाबी, गुजराती समेत कई भाषाओं में लोगों की पहली पसंद

आर.बी.लाल

लखनऊ,टेलीग्राम संवाद। सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश सदन हो या विपक्ष के तीखे तीर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास योजनाएं हों या प्रतिपक्ष के बयान वीर। आजकल सभी की जुबां पर एक ही ग़ज़ल लहरा रही आई है…

नज़र नहीं है नज़ारों की बात करते हैं
ज़मीं पे चाँद-सितारों की बात करते हैं

वो हाथ जोड़कर बस्ती को लूटने वाले
भरी सभा में सुधारों की बात करते हैं

अभी बीते दिनों, राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिन पंक्तियों को पढ़कर विपक्ष पर आक्रामक हुए थे, वे यही हैं ..
नज़र नहीं है नज़ारों की बात करते हैं…योगी आदित्यनाथ ने जब विधानसभा के बजट सत्र में ये लाइनें पढ़ीं तो पूरा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

दूसरी ओर, यदि विपक्ष की बात करें तो उसके नेता भी वीरेन्द्र वत्स के गीतों को गोली की तरह इस्तेमाल करने लगे। इसी साल फरवरी की बात है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा उस समय औरंगाबाद पहुंची ही थी। तभी राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत तमाम नेताओं ने यात्रा को संबोधित किया। इसी दौरान खरगे का शायराना अंदाज देखने को मिला। खरगे, अवध की माटी में जन्मे देश के बड़े और राष्ट्रवादी कवि वीरेंद्र वत्स की ग़ज़ल को दनादन पढ़े जा रहे थे। … नज़र नहीं है, नज़ारों की बात करते हैं, जमीं पर चांद सितारों की बात करते हैं, वो हाथ जोड़कर बस्ती को लूटने वाले भरी सभा में सुधारों की बात करते हैं। यही ग़ज़ल खरगे ने राज्यसभा में पढ़ी तो पूरा सदन वाह… वाह… कह उठा। बाद में सभापति ने ऊपर की पंक्तियों को सदन की कार्यवाही से हटाया तो इस पर काफी विवाद हुआ। खरगे ने इसे मुद्दा बना लिया और अपनी जनसभाओं में सत्ता पक्ष को निशाना बनाते हुए वे अक्सर यह ग़ज़ल पढ़ने लगे।

इस तरह पक्ष-विपक्ष ने एक ही रचना का अलग-अलग तरह से उपयोग किया। ऐसे न जाने कितने उदाहरण हैं, जब राजनेता अवध के इस सितारे की रचनाओं के माध्यम से अपनी बात प्रखरता से रखते हैं। झारखंड और हरियाणा विधानसभाओं में भी वत्स की ग़ज़ल गुंजायमान हो चुकी है। यही नहीं, किसान आंदोलन के समय भी वत्स की ग़ज़ल आंदोलनकारियों का उत्साह बढ़ाती रही। यहां तक कि वत्स की ग़ज़ल को पंजाबी में अनूदित कर माहौल को गरमाया गया। वत्स के सृजन का गुजराती वर्जन भी लोगों को बहुत पसंद आ रहा है।

मूल रूप से सुलतानपुर में कादीपुर के गोपालपुर सरायख्वाजा गांव के रहने वाले कवि वीरेंद्र वत्स इससे पहले नई दिल्ली कर्तव्य पथ पर निकलने वाली यूपी की चार गणतंत्र दिवस झांकियों के लिए गीत लिख चुके हैं। उनके गीतों से सजी झांकी को कई बार देश भर में पहला स्थान मिल चुका है। इस मामले में वीरेंद्र वत्स कहते हैं कि मेरा सौभाग्य है कि मेरे गीत को लगातार झांकी में शामिल किया गया। यह मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान है।

2024 की झांकी में प्रदेश की विरासत के साथ ही श्रीराम मंदिर स्वरूप पर स्थापित श्री रामलला की सुंदर प्रतिमा को दर्शाया गया था। झांकी में वीरेंद्र वत्स का गीत एक बार फिर देश को प्रदेश के विकास की दास्तां बताता नजर आया।

आज धरा के भाग्य खुले हैं पावन बेला आई
रामलला ने जन्म लिया है घर-घर बजे बधाई

2023 की झांकी में कर्तव्य पथ पर यह गीत गूंजा था

सीता राम अयोध्या लौटे घर-घर आज दिवाली है…

इससे पहले उन्होंने काशी विश्वनाथ कोरिडोर पर आधारित झांकी का गीत लिखा था-

काशी का गौरव लौटा जब खुला भव्य गलियारा विश्वनाथ से मिलकर पुलकित है गंगा की धारा…

उत्तर प्रदेश की झांकी के लिए उन्होंने पहला गीत 2020 में लिखा था –

वीरेंद्र वत्स राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित भी हो चुके हैं। प्रदेश के नवनियुक्त राज्य सूचना आयुक्त वीरेंद्र प्रताप सिंह ने आरंभिक शिक्षा सुल्तापुर जिले हनुमत इंटर कॉलेज सूरापुर ने की है। श्री गांधी स्मारक महाविद्यालय समोधपुर, जौनपुर से स्नातक की शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में परास्नातक की उपाधि ली। उसके बाद वत्स क्रमशः स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे बड़े समाचार पत्रों से जुड़कर समाज व देश को नई दिशा देते रहे।

वीरेंद्र सिंह का ग़जल संग्रह ‘कोई तो बात उठे’ काफी चर्चित रहा है। इसके अलावा काव्य संग्रह ‘अंत नहीं यह…’ भी काफी लोकप्रिय है। वत्स को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। नार्वे की संस्था भारत-नार्वे सूचना व सांस्कृतिक फोरम की ओर से वीरेंद्र सिंह को सम्मानित किया जाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि रही है।

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Author: Telegram Samvad