



- कलाकारों ने वाद्ययंत्र माध्यम से प्रस्तुत किये शास्त्रीय राग
- एसआरएमएस रिद्धिमा में वाद्ययंत्रों का तराना निःनाद आयोजित
आर बी लाल
बरेली, टेलीग्रामसंवाद। एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार शाम वाद्ययंत्र गुरुओं और6 उनके विद्यार्थियों ने इंस्ट्रूमेंटल सिंफनी में वाद्ययंत्र माध्यम से शास्त्रीय राग प्रस्तुत किये। कार्यक्रम आरंभ स्वरों का ध्यान लगाने से हुआ। इसमें रिद्धिमा वाद्ययंत्र गुरु, गायन गुरु और गायन विद्यार्थियों और भरतनाट्यम गुरु ने अहीर भैरव, मंगल भैरव और बैरागी वैभव रागों को साधा।

रविवार शाम रिद्धिमा में वाद्ययंत्रों पर विद्यार्थी शिवांग अग्रवाल और गुरुओं ने राग भोपाली में मध्य लय की बंदिश बजाई और द्रुत लय में इसका समापन किया। इंस्ट्रूमेंट गुरु हिमांश चंद्रा ओर विद्यार्थी अथर्व पाठक ने गिटार के कर्णप्रिय धुनों के जरिये नदी के बैठे होने का अहसास कराया। इंस्ट्रूमेंट गुरु प्रियांशु मैस (ड्रम), सूर्यकांत चौधरी (वायलिन), रॉनी फिलिप्स (सेक्सोफोन) ने पश्चिमी वाद्ययंत्रों की संगत से वेस्टर्न म्यूजिक को पेश किया। अंत में उमेश मिश्रा (सारंगी), कुंवर पाल (सितार), सूर्यकांत चौधरी (वायलिन), टुकुमनी सेन (हारमोनियम और स्वर मंडल), सूरज पांडेय (बांसुरी), आशीष सिंह (कीबोर्ड), हिमांश चंद्रा (गिटार), अमर नाथ (तबला), सुमन बिस्वास (मृदंगम), रॉनी फिलिप्स (सेक्साफोन), प्रियांशु (ड्रम) और सुरेंद्र (कांगो) ने भारतीय और पाश्चात्य वाद्ययंत्रों की संगत से राग मिश्र मधुकौस को प्रस्तुत किया।

गायन गुरु प्रियांग ग्वाल ने श्लोक बोल कर तो रॉबिन ए. ने बोल पढ़ंत माध्यम से निःनाद में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। गायन विद्यार्थी श्रेया प्रभाजोत और पंखुड़ी गुप्ता ने अपनी आवाज से स्वरों का ध्यान लगाने में सहयोग किया।
इस मौके पर एसआरएमएस ट्रस्ट संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति, आशा मूर्ति, ऋचा मूर्ति, उषा गुप्ता, इंजीनियर सुभाष मेहरा, डा. एमएस बुटोला, डा. प्रभाकर गुप्ता, डा. रीता शर्मा और तमाम श्रोता मौजूद रहे।
