पितामह चाहते तो नहीं होता महाभारत

एसआरएमएस रिद्धिमा में “क्यूँ पितामह” का नाटक मंचन

आर बी लाल

बरेली, टेलीग्रामसंवाद।एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार शाम रिद्धिमा सभागार में नाटक क्यूँ पितामह मंचन हुआ। डॉ. प्रभाकर गुप्ता लिखित और विनायक श्रीवास्तव निर्देशित नाटक महाभारत के अमर पात्र देवव्रत यानी भीष्म पितामह पर केंद्रित रहा। इसमें महाभारत युद्ध की परिस्थियों के दौरान भीष्म पितामह की भूमिका पर सवाल उठाया गया। जिनमें हस्तक्षेप करने पर वह इस भीषण युद्ध को रोक सकते थे। नाटक का आरंभ शांतनु की पत्नी गंगा द्वारा अपने सात पुत्रों को ऋषि वशिष्ठ के शाप के कारण नदी प्रवाहित करने से होता है।

आठवें पुत्र को प्रवाहित करते समय गंगा को शांतनु रोक देता है। शांतनु के रोकने के कारण गंगा अपने पुत्र को लेकर वापस चली जाती है और सोलह वर्ष पश्चात बेटे को वापस करने का वचन देती है। उसका नाम देवव्रत रखती है। कुछ समय पश्चात देवव्रत अपने पिता शांतनु के सत्यवती से विवाह कराने के लिए आजीवन राज न करने तथा विवाह न करने की भीषण प्रतिज्ञा लेता है। इसी कारण शांतनु उसका नाम भीष्म रखते हैं और इच्छा मृत्यु का वरदान देते हैं। इस कहानी में यह दिखाया गया है कि शिव जी से वरदान लेने के कारण अम्बा भीष्म की मृत्यु का कारण बनती है। इसलिए युद्ध में अम्बा का अगला जन्म शिखंडी के रूप में होता है। इन सभी परिस्थियों के कारण भीष्म पर आरोप लगता है कि अगर वो चाहते तो युद्ध रुक सकता था। द्रोपदी के चीरहरण पर भीष्म का मौन रहना और उनकी प्रतिज्ञा अथवा अनेक ऐसे कारण रहे जिसकी वजह से युद्ध हुआ और इन्हें रोका जा सकता था। भीष्म के अंतिम समय कृष्ण उन्हें यही बताते हैं कि उनका मौन और उनकी प्रतिज्ञा महाभारत का कारण बनी।


नाटक में गंगा की भूमिका में कशिश सिंह, शांतनु की भूमिका में शिवम यादव, देवव्रत की भूमिका में मनोज शर्मा, कीट तथा शकुनि की भूमिका में सूर्यप्रकाश, कृष्ण की भूमिका में फरदीन हुसैन, दशराज और युद्धिष्ठिर की भूमिका में मानेश यादव, सत्यवती की भूमिका में रिया यादव, अम्बा की भूमिका में अक़्सा खान, अम्बिका की भूमिका में तनु मिश्रा, अम्बालिका के रोल में रिया वर्मा, शिव की भूमिका में अंशू शर्मा, सुबाल की भूमिका में ह्रदयेश, दुर्योधन की भूमिका में आशुतोष, दुःशासन की भूमिका में अंशुल, भीम की भूमिका में जितेंद्र जीत, नकुल की भूमिका में प्रणव, सहदेव की भूमिका में अभिनव, द्रोपदी की भूमिका में शीतल रावत, सारथी की भूमिका में सात्विक, द्रोण की भूमिका में चंद्रकांत, कर्ण की भूमिका में सूर्यकांत तथा सूत्रधार की भूमिका में संजय सक्सेना ने नाटक में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।नाटक में संगीत उमेश सूर्या ने दीया।

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Author: Telegram Samvad