प्रीत योग में प्रकटेंगे हनुमान देंगे आयुष्मान-ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा

टेलीग्राम न्यूज़ नेटवर्क

बरेली,टेलीग्रामसंवा। दीपावली जहां भगवान राम के चौदह वर्ष वनवास से अयोध्या नगरी लौटने की खुशी में प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। वहीं उनके परम सेवक हनुमान जी का भी जन्मोत्सव ठीक एक दिन पहले यानी छोटी दीपावली के दिन मनाया जाता है। इस दिन नरक चतुर्दशी, काली मां की पूजा के साथ ही साथ हनुमान जी का जन्मदिवस भी मनाया जाता है।अगर बात करें हनुमान जयंती की तो यह साल में दो बार पड़ती है। एक चैत्र मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन और दूसरी कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन। वैसे इसका उल्लेख वायु पुराण, क्षेपक रामायण सहित कई धर्म ग्रंथो में है।

ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा

इस बार छोटी दिवाली का महत्व कई गुना अधिक बढ़ गया है। क्योंकि अत्यंत मंगलकारी तीन शुभ योग इस दिन बन रहे हैं। इस दिन प्रीति योग और आयुष्मान योग का संगम होगा। साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी इस दिन व्याप्त रहेगा। जिस कारण इन तीन योगों के संगम में पूजा का तीन गुना ज्यादा फल मिलेगा। सबसे खास बात तो यह है कि शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा अत्यंत मंगलकारी हो जाती है। इसलिए यह दिन विशेष रहेगा। इस दिन पूजा करने से पितरों को भी मुक्ति मिलती है और दीर्घायु का वरदान भी। इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। इसलिए इस दिन नरक चतुर्दशी के रूप में पर्व मनाया जाता है इसलिए इस दिन पूजा करने से प्राणी को नरक यातनाएं नहीं मिलती।साथ ही मरने पर मोक्ष की प्राप्ति भगवान की कृपा से सहजता से होती है।

यम दीपक जलाने का समय

इस दिन शाम को 05:32 बजे सूर्यास्त होगा, उसके साथ ही प्रदोष काल शुरू हो जाएगा। शाम 05:32 बजे से यम का दीपक जला सकते हैं।यमराज के लिए तेल का चौमुखा दीपक जलाते हैं और उसे घर से दक्षिण दिशा में रखते हैं।

हनुमान जी की पूजा मुहूर्त और विधि

हनुमान जी की पूजा प्रदोष काल या इसके बाद रात्रि के प्रथम पहर में करें।हनुमान जी की पूजा लाल रंग के फूल, फल, धूप, दीप, सिंदूर आदि चीजों से करें। इस समय हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करें। अगर समय है, तो सुंदर काण्ड का पाठ अवश्य करें। अंत में आरती अर्चना कर सुख, समृद्धि, बल, बुद्धि, विद्या और शक्ति की कामना करें। पूजा में हनुमान जी को सिंदूर जरूर अर्पित करें। इस प्रकार हनुमान जी की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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Author: Telegram Samvad